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श्रद्घा-भक्ति की रफ्तार में अपनों से बिछुड रहे भोले
Updated Mon, 17 Jul 2017 12:46 AM IST
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मुजफ्फरनगर।
हरिद्वार से गंगाजल लाकर अपने गंतव्य की ओर दौड़ते भोलों के साथी बिछुड़ रहे हैं। रविवार रात आठ बजे तक 176 भोले ऐसे थे, जो अपनों से बिछुड़ गए। इनमें आठ मासूम बच्चे और दस महिलाएं भी रहीं। कांवड़ कंट्रोल रूम के प्रयासों से सभी हो अपनों से मिलाया गया। तीन मासूम बच्चों के परिजनों को ढूंढने में आठ घंटे तक का समय लग गया।
शहर के शिवचौक पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से जहां कांवड़ की शहर की सभी गतिविधियों को यहीं पर बैठे देखा जा रहा है, वहीं रफ्तार से दौड़ते भोलों के बिछुड़े साथियों को मिलाने का काम कंट्रोल रूम कर रहा है। रविवार को मार्ग पर कांवड़ियों की भीड़ बढ़ी तो आपस में बिछुड़ने वालों की संख्या भी बढ़ गई। सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक कंट्रोल रूम में 176 ऐसे लोग पहुंचे, जिनके अपने उनसे बिछुड़ गए। इनमें आठ मासूम बच्चे और दस से अधिक महिला भी रही। कंट्रोल रूम पर बिछुडे़ लोगों के साथियों के मोबाइल नंबर पर फोन मिलाकर उन्हें मिलवाने का काम किया गया, वहीं नाम, पता और मोबाइल नंबर सही नहीं बता पाने के कारण मासूम बच्चों को लेकर परेशानियां हुई। तीन बच्चों के परिजनों को ढूंढने में तो आठ-आठ घंटे लग गए, लेकिन टीम के सदस्यों ने हिम्मत नहीं हारी। कंट्रोल रूम पर लगाई गई टीम के सदस्यों ने बड़ी ही सजगता, संवेदनशीलता और मानवीयता से काम लिया। बच्चों से उनका शहर और गांव पूछकर पुलिस के माध्यम से भी परिजनों के फोन नंबर लिए गए।
बच्चों को दूध-बिस्किट दिए
मुजफ्फरनगर। रविवार को जो आठ मासूम भोले अपने परिजनों से बिछुड़े, उनमें से कुछ अपने शहर का नाम भी नहीं बता पा रहे थे। ऐसे रोते हुए बच्चों को ढांढस बधाया। उनके दूध-बिस्किट और भोजन की व्यवस्था कंट्रोल रूम पर ही की गई। तीन बच्चे अपने परिजनों से आठ घंटे बाद मिले।
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डीएम-एसएसपी ने खुद संभाली कमान
मुजफ्फरनगर। शिवचौक पर शाम के समय शिवभक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए डीएम जीएस प्रियदर्शी और एसएसपी अनंतदेव ने कमान संभाली। डीएम ने बताया कि बिछुडे़ लोगों को मिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाता है। इसमें कुछ लोगों को अलग से लगाया गया है।
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हरिद्वार से गंगाजल लाकर अपने गंतव्य की ओर दौड़ते भोलों के साथी बिछुड़ रहे हैं। रविवार रात आठ बजे तक 176 भोले ऐसे थे, जो अपनों से बिछुड़ गए। इनमें आठ मासूम बच्चे और दस महिलाएं भी रहीं। कांवड़ कंट्रोल रूम के प्रयासों से सभी हो अपनों से मिलाया गया। तीन मासूम बच्चों के परिजनों को ढूंढने में आठ घंटे तक का समय लग गया।
शहर के शिवचौक पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से जहां कांवड़ की शहर की सभी गतिविधियों को यहीं पर बैठे देखा जा रहा है, वहीं रफ्तार से दौड़ते भोलों के बिछुड़े साथियों को मिलाने का काम कंट्रोल रूम कर रहा है। रविवार को मार्ग पर कांवड़ियों की भीड़ बढ़ी तो आपस में बिछुड़ने वालों की संख्या भी बढ़ गई। सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक कंट्रोल रूम में 176 ऐसे लोग पहुंचे, जिनके अपने उनसे बिछुड़ गए। इनमें आठ मासूम बच्चे और दस से अधिक महिला भी रही। कंट्रोल रूम पर बिछुडे़ लोगों के साथियों के मोबाइल नंबर पर फोन मिलाकर उन्हें मिलवाने का काम किया गया, वहीं नाम, पता और मोबाइल नंबर सही नहीं बता पाने के कारण मासूम बच्चों को लेकर परेशानियां हुई। तीन बच्चों के परिजनों को ढूंढने में तो आठ-आठ घंटे लग गए, लेकिन टीम के सदस्यों ने हिम्मत नहीं हारी। कंट्रोल रूम पर लगाई गई टीम के सदस्यों ने बड़ी ही सजगता, संवेदनशीलता और मानवीयता से काम लिया। बच्चों से उनका शहर और गांव पूछकर पुलिस के माध्यम से भी परिजनों के फोन नंबर लिए गए।
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बच्चों को दूध-बिस्किट दिए
मुजफ्फरनगर। रविवार को जो आठ मासूम भोले अपने परिजनों से बिछुड़े, उनमें से कुछ अपने शहर का नाम भी नहीं बता पा रहे थे। ऐसे रोते हुए बच्चों को ढांढस बधाया। उनके दूध-बिस्किट और भोजन की व्यवस्था कंट्रोल रूम पर ही की गई। तीन बच्चे अपने परिजनों से आठ घंटे बाद मिले।
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डीएम-एसएसपी ने खुद संभाली कमान
मुजफ्फरनगर। शिवचौक पर शाम के समय शिवभक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए डीएम जीएस प्रियदर्शी और एसएसपी अनंतदेव ने कमान संभाली। डीएम ने बताया कि बिछुडे़ लोगों को मिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाता है। इसमें कुछ लोगों को अलग से लगाया गया है।