{"_id":"5e29ea7d8ebc3e4b593b8582","slug":"13-year-old-neelam-resident-of-gyanamajra-muzaffarnagar-news-mrt465428299","type":"story","status":"publish","title_hn":"हौसले से तीन बहन-भाइयों का जिम्मा उठा रही नीलम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हौसले से तीन बहन-भाइयों का जिम्मा उठा रही नीलम
विज्ञापन
चरथावल ज्ञानामाजरा में मां-बाप की मृत्यु के बाद मौजूद चारों बच्चे।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हौसले से तीन बहन-भाइयों का जिम्मा उठा रही नीलम
चरथावल। टीबी से पीड़ित मां-बाप का साया सिर से उठने के बाद 13 साल की नीलम अपनी दो छोटी बहनों और भाई की परवरिश कर रही है। हौसले के उड़ान के साथ नीलम पढ़ाई के साथ तीनों भाई-बहन का पढ़ाने और घर की तमाम जिम्मेदारी बखूबी निभाती है।
चरथावल ब्लॉक की सीमा से सटे गांव ज्ञानामाजरा के मुन्ना के यहां वर्ष 2007 को पहली जनवरी को जन्मी नीलम का अतीत संघर्षों से भरा है। पिता मुन्ना और माता पूनम को अरसे से टीबी की बीमारी थी। सरकारी अस्पताल में इलाज चला। भट्ठे पर पथेर पर जाने के कारण दवाओं का क्रम टूट गया, जिससे छह वर्ष पहले माता पूनम ने दम तोड़ दिया और तीन साल पहले पिता की भी टीबी ने जान ले ली। परिवार में ताऊ और चाचा है, मगर उन्होंने भी मृत दंपती के बच्चों का परवरिश से मुुंह मोड़ लिया। 13 वर्ष की नीलम गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा आठ में पढ़ रही है। उसका भाई सन्नी कक्षा पांच, बहन सलोनी कक्षा चार और छोटी बहन गुंजन कक्षा तीन में प्राइमरी स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रही है। नीलम खुद उनकी देखभाल की जिम्मेदारी निभाती है। कहती हैं कि भगवान उन्हें हौसला देता है और वह अपनी जिम्मेदारी निभाती है। स्कूल में कार्य के लिए ग्राम प्रधान उसे एक हजार रुपये महीने दिलवाते हैं। जिला पंचायत सदस्य राकेश वशिष्ठ बताते हैं कि ब्लॉक में विपरीत परिस्थितियों में गांव की बेटी नीलम की जज्बा और हौसला सराहनीय है।
नीलम के पिता के नाम प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फार्म भरवाया था, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद परिवार में कोई वयस्क नहीं होने के कारण सरकारी पारिवारिक राष्ट्रीय सहायता आदि योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा। गांव के लोगों के सहयोग से नीलम अपने घर की बागडोर उठा रही है - कंवरपाल ग्राम प्रधान ज्ञानामाजरा।
विज्ञापन
विज्ञापन
चरथावल। टीबी से पीड़ित मां-बाप का साया सिर से उठने के बाद 13 साल की नीलम अपनी दो छोटी बहनों और भाई की परवरिश कर रही है। हौसले के उड़ान के साथ नीलम पढ़ाई के साथ तीनों भाई-बहन का पढ़ाने और घर की तमाम जिम्मेदारी बखूबी निभाती है।
चरथावल ब्लॉक की सीमा से सटे गांव ज्ञानामाजरा के मुन्ना के यहां वर्ष 2007 को पहली जनवरी को जन्मी नीलम का अतीत संघर्षों से भरा है। पिता मुन्ना और माता पूनम को अरसे से टीबी की बीमारी थी। सरकारी अस्पताल में इलाज चला। भट्ठे पर पथेर पर जाने के कारण दवाओं का क्रम टूट गया, जिससे छह वर्ष पहले माता पूनम ने दम तोड़ दिया और तीन साल पहले पिता की भी टीबी ने जान ले ली। परिवार में ताऊ और चाचा है, मगर उन्होंने भी मृत दंपती के बच्चों का परवरिश से मुुंह मोड़ लिया। 13 वर्ष की नीलम गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा आठ में पढ़ रही है। उसका भाई सन्नी कक्षा पांच, बहन सलोनी कक्षा चार और छोटी बहन गुंजन कक्षा तीन में प्राइमरी स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रही है। नीलम खुद उनकी देखभाल की जिम्मेदारी निभाती है। कहती हैं कि भगवान उन्हें हौसला देता है और वह अपनी जिम्मेदारी निभाती है। स्कूल में कार्य के लिए ग्राम प्रधान उसे एक हजार रुपये महीने दिलवाते हैं। जिला पंचायत सदस्य राकेश वशिष्ठ बताते हैं कि ब्लॉक में विपरीत परिस्थितियों में गांव की बेटी नीलम की जज्बा और हौसला सराहनीय है।
विज्ञापन
नीलम के पिता के नाम प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फार्म भरवाया था, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद परिवार में कोई वयस्क नहीं होने के कारण सरकारी पारिवारिक राष्ट्रीय सहायता आदि योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा। गांव के लोगों के सहयोग से नीलम अपने घर की बागडोर उठा रही है - कंवरपाल ग्राम प्रधान ज्ञानामाजरा।
विज्ञापन