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आठ दुकानदारों का रोजी -रोटी छीनने का आरोप
Updated Fri, 15 Dec 2017 12:01 AM IST
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दुकानदारों ने न्याय की गुहार लगाई
मुजफ्फरनगर। नगर पंचायत बुढ़ाना ने जिन दुकानों को बनाकर बोली लगाकर छोड़ा था। 22 साल बाद उन्हीं दुकानों को अवैध बताकर ध्वस्त कर दिया गया। इससे सात दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया। दुकानदारों ने न्याय के लिए एडीएम प्रशासन से गुहार लगाई है।
अंसारी रोड पर एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से वार्ता में इन दुकानदारों ने बताया कि 1996 में खुली बोली लगाकर नगर पंचायत से दुकानें ली थी। कुरैशियों वाली पुलिया पर बनी इन दुकानों का किराया नियमित रूप से 2008 तक नगर पंचायत में जमा होता रहा। 2008 में नगर पंचायत ने दुकान खाली कराने का नोटिस दे दिया। नोटिस के विरोध में दुकानदार इलाहाबाद हाईकोर्ट गए, जहां से उन्हें स्टे मिल गया। नगर पंचायत को यह आदेश दिया गया कि वैकल्पिक व्यवस्था होने तक ध्वस्तीकरण न किया जाए। दुकानदार मुस्तकीम, मतलूब, बाबू, इमरान, सेठूराम, गोपाल आदि ने बताया कि 11 दिसंबर की रात उनकी दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया था कि दुकानदारों से जमानत राशि नगर पंचायत ने ली है, इसलिए उन्हें अन्यत्र दुकान दी जाएं। नगर पंचायत की कार्रवाई से वह सड़क पर आ गए हैं। परिवार पर रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
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मुजफ्फरनगर। नगर पंचायत बुढ़ाना ने जिन दुकानों को बनाकर बोली लगाकर छोड़ा था। 22 साल बाद उन्हीं दुकानों को अवैध बताकर ध्वस्त कर दिया गया। इससे सात दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया। दुकानदारों ने न्याय के लिए एडीएम प्रशासन से गुहार लगाई है।
अंसारी रोड पर एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से वार्ता में इन दुकानदारों ने बताया कि 1996 में खुली बोली लगाकर नगर पंचायत से दुकानें ली थी। कुरैशियों वाली पुलिया पर बनी इन दुकानों का किराया नियमित रूप से 2008 तक नगर पंचायत में जमा होता रहा। 2008 में नगर पंचायत ने दुकान खाली कराने का नोटिस दे दिया। नोटिस के विरोध में दुकानदार इलाहाबाद हाईकोर्ट गए, जहां से उन्हें स्टे मिल गया। नगर पंचायत को यह आदेश दिया गया कि वैकल्पिक व्यवस्था होने तक ध्वस्तीकरण न किया जाए। दुकानदार मुस्तकीम, मतलूब, बाबू, इमरान, सेठूराम, गोपाल आदि ने बताया कि 11 दिसंबर की रात उनकी दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया था कि दुकानदारों से जमानत राशि नगर पंचायत ने ली है, इसलिए उन्हें अन्यत्र दुकान दी जाएं। नगर पंचायत की कार्रवाई से वह सड़क पर आ गए हैं। परिवार पर रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
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