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सीनियर अफसरों का जूनियर को सेल्यूट
Updated Fri, 21 Jul 2017 01:10 AM IST
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सीनियर अफसरों का जूनियर को सेल्यूट
मुजफ्फरनगर। कांवड़ यात्रा के दौरान भोलेनाथ की कृपा कहें या सरकारी चूक, जिले के सीनियर अफसरों को अपने जूनियरों को सलाम ठोकना पड़ा। कांवड़ ड्यूटी में क्लास-1 अफसर जोनल और क्लास-2 के अफसर सुपर जोनल मजिस्ट्रेट बन गए। नौ सुपर जोनल में एक आबकारी निरीक्षक भी यह पद पाने में सफल रहे। हालांकि जब इनके अफसरों ने इन्हें सलाम ठोका तो ये शरमा गए।
कांवड़ यात्रा के दौरान अफसरों की ड्यूटी में प्रोटोकॉल गायब हो गया। जिले में कांवड़ यात्रा को नौ सुपर जोन, 18 जोन, 47 सबजोन और 83 सेक्टरों में बांटा गया था। जोनल मजिस्ट्रेट में क्लास-1 और क्लास-2 के सीनियर अफसरों को तैनात किया गया था। व्यवस्था के अनुसार अफसरों के पद को देखकर ही उनकी ड्यूटी लगनी थी। जोनल मजिस्ट्रेट के साथ एक इंस्पेक्टर और सुपर जोनल मजिस्ट्रेट के साथ एक सीओ की ड्यूटी लगी थी। कांवड़ के दौरान उस समय अजीब स्थिति हो गई, जब जोनल मजिस्ट्रेट का कार्य देख रहे डीडीओ मोतीलाल व्यास अपने सुपर जोनल मजिस्ट्रेट की गाड़ी को देखकर खड़े हो गए। गाड़ी में जब अपने मातहत तीन माह पहले ही नौकरी पर आए डीपीआरओ पवन कुमार को देखा, तो अचंभित हो गए। जूनियर अफसर सीनियर के सेल्यूट करने से खुद ही शरमा गए। कमाल तब हुआ जब जोनल मजिस्ट्रेट परियोजना निदेशक विक्रम सिंह से कहा गया कि आओ आपको सुपर जोनल मजिस्ट्रेट से मिलवाते हैं। जब वह सुपर जोनल मजिस्ट्रेट से मिलने पहुंचे, तो अपनी जूनियर अफसर जिला कार्यक्रम अधिकारी माला सोनकर को देखकर हैरान रह गए। सोनकर पीडी को देखकर खड़ी हो गईं और बोली, सर मेरा कोई दोष नहीं है। जोनल मजिस्ट्रेट बीएसए चंद्रकेश यादव अपने जोनल मजिस्ट्रेट के आने पर खड़े हुए, तो हाल ही में नौकरी ज्वाइन करने वाले जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी भरत लाल को सामने देख हतप्रभ रह गए। सुपर जोनल बनाए गए आबकारी निरीक्षक त्रिभुवन सिंह को उनके सीनियर अफसरों ने सलाम ठोका। एक तरफ जहां पीसीएस अधिकारी बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी को जोनल बनाया गया, वहीं उनके मातहत काम करने वाले तहसीलदार कमलेश कुमार और अमित कुमार को सुपर जोनल बना दिया गया। इसके अलावा अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग देवेश शर्मा, जल निगम के परियोजना प्रबंधक राजीव त्यागी, अधिशासी अभियंता रामहेत सिंह, एआर कॉपरेटिव प्रदीप सिंह, डीएसओ मदन यादव, उप प्रभागीय वन अधिकारी संजीव कुमार, एआरटीओ अरुण कुमार को सुपर जोनल मजिस्ट्रेट बनाया गया। भोले की कृपा कहें या अफसरों की नासमझी से सीनियरों ने इन्हें जमकर सलाम ठोकी।
पंचायत सचिव को भी लगे सेल्यूट
मुजफ्फरनगर। प्रशासन ने सेक्टर मजिस्ट्रेट में जो ड्यूटी लगाई, उसमें लगभग 20 ग्राम पंचायत सचिव भी शामिल रहे। जीप में बैठकर ग्राम पंचायत सचिव सेक्टर मजिस्ट्रेट के रूप में कांवड़ यात्रा की देखरेख को निकले तो समान वेतन वाले पुलिसकर्मियों ने उन्हें सेल्यूट किया। ड्यूटी देने के बाद अपने अफसरों को यह बताते हुए सभी ग्राम पंचायत सचिवों ने गर्व का महसूस किया।
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समान पद के भाइयों में ही कर दिया फर्क
मुजफ्फरनगर। नलकूप खंड में जेई के रूप में कार्य करने वाले दो सगे भाइयों की ड्यूटी में ही फर्क कर दिया गया। एक भाई को सेक्टर मजिस्ट्रेट और दूसरे भाई को उसी के ऊपर सब जोनल मजिस्ट्रेट बना दिया। इनके साथ ड्यूटी करने वाले अफसर भी यह देखकर हैरान दिखाई दिए।
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कुछ गलत नहीं हुआ: एडीएम
मुजफ्फरनगर। एडीएम प्रशासन हरीश चंद्र का कहना है कि कांवड़ ड्यूटी में कोई गलती नहीं हुई है। विकास भवन के जिला स्तरीय अधिकारी सभी कमीशन से आते हैं, सब बराबर हैं। इसमें बड़े-छोटे का कोई चक्कर नहीं है। जिला आबकारी निरीक्षक का नाम कैसे आ गया, पता नहीं।
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मुजफ्फरनगर। कांवड़ यात्रा के दौरान भोलेनाथ की कृपा कहें या सरकारी चूक, जिले के सीनियर अफसरों को अपने जूनियरों को सलाम ठोकना पड़ा। कांवड़ ड्यूटी में क्लास-1 अफसर जोनल और क्लास-2 के अफसर सुपर जोनल मजिस्ट्रेट बन गए। नौ सुपर जोनल में एक आबकारी निरीक्षक भी यह पद पाने में सफल रहे। हालांकि जब इनके अफसरों ने इन्हें सलाम ठोका तो ये शरमा गए।
कांवड़ यात्रा के दौरान अफसरों की ड्यूटी में प्रोटोकॉल गायब हो गया। जिले में कांवड़ यात्रा को नौ सुपर जोन, 18 जोन, 47 सबजोन और 83 सेक्टरों में बांटा गया था। जोनल मजिस्ट्रेट में क्लास-1 और क्लास-2 के सीनियर अफसरों को तैनात किया गया था। व्यवस्था के अनुसार अफसरों के पद को देखकर ही उनकी ड्यूटी लगनी थी। जोनल मजिस्ट्रेट के साथ एक इंस्पेक्टर और सुपर जोनल मजिस्ट्रेट के साथ एक सीओ की ड्यूटी लगी थी। कांवड़ के दौरान उस समय अजीब स्थिति हो गई, जब जोनल मजिस्ट्रेट का कार्य देख रहे डीडीओ मोतीलाल व्यास अपने सुपर जोनल मजिस्ट्रेट की गाड़ी को देखकर खड़े हो गए। गाड़ी में जब अपने मातहत तीन माह पहले ही नौकरी पर आए डीपीआरओ पवन कुमार को देखा, तो अचंभित हो गए। जूनियर अफसर सीनियर के सेल्यूट करने से खुद ही शरमा गए। कमाल तब हुआ जब जोनल मजिस्ट्रेट परियोजना निदेशक विक्रम सिंह से कहा गया कि आओ आपको सुपर जोनल मजिस्ट्रेट से मिलवाते हैं। जब वह सुपर जोनल मजिस्ट्रेट से मिलने पहुंचे, तो अपनी जूनियर अफसर जिला कार्यक्रम अधिकारी माला सोनकर को देखकर हैरान रह गए। सोनकर पीडी को देखकर खड़ी हो गईं और बोली, सर मेरा कोई दोष नहीं है। जोनल मजिस्ट्रेट बीएसए चंद्रकेश यादव अपने जोनल मजिस्ट्रेट के आने पर खड़े हुए, तो हाल ही में नौकरी ज्वाइन करने वाले जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी भरत लाल को सामने देख हतप्रभ रह गए। सुपर जोनल बनाए गए आबकारी निरीक्षक त्रिभुवन सिंह को उनके सीनियर अफसरों ने सलाम ठोका। एक तरफ जहां पीसीएस अधिकारी बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी को जोनल बनाया गया, वहीं उनके मातहत काम करने वाले तहसीलदार कमलेश कुमार और अमित कुमार को सुपर जोनल बना दिया गया। इसके अलावा अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग देवेश शर्मा, जल निगम के परियोजना प्रबंधक राजीव त्यागी, अधिशासी अभियंता रामहेत सिंह, एआर कॉपरेटिव प्रदीप सिंह, डीएसओ मदन यादव, उप प्रभागीय वन अधिकारी संजीव कुमार, एआरटीओ अरुण कुमार को सुपर जोनल मजिस्ट्रेट बनाया गया। भोले की कृपा कहें या अफसरों की नासमझी से सीनियरों ने इन्हें जमकर सलाम ठोकी।
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पंचायत सचिव को भी लगे सेल्यूट
मुजफ्फरनगर। प्रशासन ने सेक्टर मजिस्ट्रेट में जो ड्यूटी लगाई, उसमें लगभग 20 ग्राम पंचायत सचिव भी शामिल रहे। जीप में बैठकर ग्राम पंचायत सचिव सेक्टर मजिस्ट्रेट के रूप में कांवड़ यात्रा की देखरेख को निकले तो समान वेतन वाले पुलिसकर्मियों ने उन्हें सेल्यूट किया। ड्यूटी देने के बाद अपने अफसरों को यह बताते हुए सभी ग्राम पंचायत सचिवों ने गर्व का महसूस किया।
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समान पद के भाइयों में ही कर दिया फर्क
मुजफ्फरनगर। नलकूप खंड में जेई के रूप में कार्य करने वाले दो सगे भाइयों की ड्यूटी में ही फर्क कर दिया गया। एक भाई को सेक्टर मजिस्ट्रेट और दूसरे भाई को उसी के ऊपर सब जोनल मजिस्ट्रेट बना दिया। इनके साथ ड्यूटी करने वाले अफसर भी यह देखकर हैरान दिखाई दिए।
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कुछ गलत नहीं हुआ: एडीएम
मुजफ्फरनगर। एडीएम प्रशासन हरीश चंद्र का कहना है कि कांवड़ ड्यूटी में कोई गलती नहीं हुई है। विकास भवन के जिला स्तरीय अधिकारी सभी कमीशन से आते हैं, सब बराबर हैं। इसमें बड़े-छोटे का कोई चक्कर नहीं है। जिला आबकारी निरीक्षक का नाम कैसे आ गया, पता नहीं।