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किसान पाठशाला में कृषकों को दी जानकारी
Updated Sun, 16 Dec 2018 12:21 AM IST
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किसानों को उद्यान के बारे में जानकारी दी
रतनपुरी। गांव बड़सू में आयोजित द मिलियन फॉमर्स स्कूल किसान पाठशाला के अंतिम दिन कृषि अधिकारियों ने किसानों को उद्यान एवं पशुपालन विभाग की योजनाओं और मत्स्य, रेशम उत्पादन एवं जैव ऊर्जा के विषय में बताया। पशुधन प्रसार अधिकारी डा. हुकुम सिंह ने किसानों को पशुपालन एवं उद्यान विभाग की योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि बागवानी कृषि क्षेत्र में आर्थिक एवं पोषणीयता के साथ किसानों की आय को दोगुना करने हेतु एक सक्षम विकल्प है। एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत फल, फूल और मसालों की खेती के लिए 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। पशुपालन से न केवल दुग्ध उत्पाद प्राप्त होते हैं, बल्कि उनके गोबर आदि अन्य अवशेषों का कृषि में उपयोग करके कृषि को लाभप्रद और गुणवत्तापरक बनाया जा सकता है। पशुपालन के लिए सरकार द्वारा कम ब्याज दर पर ऋण की सुविधा भी उपलब्ध है। कृषि तकनीकी सहायक आदेश कुमार ने किसानों को गन्ना, मत्स्य, रेशम उत्पादन एवं जैव ऊर्जा के विषय में जानकारी दी। उन्होंने किसानों से गन्ने की उन्नतशील किस्मों का ही प्रयोग करने की अपील की। इसके साथ साथ उन्होंने किसानों को रेशम उत्पादन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। पाठशाला में मौजूद किसानों ने कहा कि किसान पाठशाला में कृषि एवं पशुपालन संबंधी विभिन्न लाभदायक जानकारियां प्राप्त की, जिनका वे भविष्य में अवश्य लाभ उठाएंगे। इस अवसर पर ग्राम प्रधान डा. संदीप सैनी, पूरण सिंह, मुकेश कुमार, रणधीर सिंह, सूरजपाल सिंह, दिनेश सैनी, मास्टर अरविंद सैनी, राजकुमार सैनी, कपिल कुमार, सुनील सैनी, सुखपाल सिंह, शिवकुमार, संदीप कुमार, सुशील कुमार, प्रेम सिंह सैनी, मांगेराम, राकेश कुमार आदि किसान मौजूद रहे।
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रतनपुरी। गांव बड़सू में आयोजित द मिलियन फॉमर्स स्कूल किसान पाठशाला के अंतिम दिन कृषि अधिकारियों ने किसानों को उद्यान एवं पशुपालन विभाग की योजनाओं और मत्स्य, रेशम उत्पादन एवं जैव ऊर्जा के विषय में बताया। पशुधन प्रसार अधिकारी डा. हुकुम सिंह ने किसानों को पशुपालन एवं उद्यान विभाग की योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि बागवानी कृषि क्षेत्र में आर्थिक एवं पोषणीयता के साथ किसानों की आय को दोगुना करने हेतु एक सक्षम विकल्प है। एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत फल, फूल और मसालों की खेती के लिए 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। पशुपालन से न केवल दुग्ध उत्पाद प्राप्त होते हैं, बल्कि उनके गोबर आदि अन्य अवशेषों का कृषि में उपयोग करके कृषि को लाभप्रद और गुणवत्तापरक बनाया जा सकता है। पशुपालन के लिए सरकार द्वारा कम ब्याज दर पर ऋण की सुविधा भी उपलब्ध है। कृषि तकनीकी सहायक आदेश कुमार ने किसानों को गन्ना, मत्स्य, रेशम उत्पादन एवं जैव ऊर्जा के विषय में जानकारी दी। उन्होंने किसानों से गन्ने की उन्नतशील किस्मों का ही प्रयोग करने की अपील की। इसके साथ साथ उन्होंने किसानों को रेशम उत्पादन की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। पाठशाला में मौजूद किसानों ने कहा कि किसान पाठशाला में कृषि एवं पशुपालन संबंधी विभिन्न लाभदायक जानकारियां प्राप्त की, जिनका वे भविष्य में अवश्य लाभ उठाएंगे। इस अवसर पर ग्राम प्रधान डा. संदीप सैनी, पूरण सिंह, मुकेश कुमार, रणधीर सिंह, सूरजपाल सिंह, दिनेश सैनी, मास्टर अरविंद सैनी, राजकुमार सैनी, कपिल कुमार, सुनील सैनी, सुखपाल सिंह, शिवकुमार, संदीप कुमार, सुशील कुमार, प्रेम सिंह सैनी, मांगेराम, राकेश कुमार आदि किसान मौजूद रहे।
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