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बैंड-बाजा बारात के लिए 7 नवंबर से शुभ मुहूर्त
Updated Mon, 30 Oct 2017 01:38 AM IST
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बारात के लिए सात नवंबर से शुभ मुहूर्त
मुजफ्फरनगर (मुजफ्फरनगर)। इस बार सात नवंबर से बाबुल के घर में शहनाई गूंजना शुरू हो जाएंगी। 31 अक्तूबर को देव उठान एकादशी के बाद शादी-विवाह के लिए शुभ मुहूर्त प्रारंभ होंगे। विशेष शुभ मुहूर्त 19 नवंबर के बाद प्रारंभ माने गए हैं। शादी के लिए 12 दिसंबर तक कई शुभ दिन हैं, जिनमें तीन दिसंबर सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। इस बार बैंड-बाजा, बारात की मस्ती पर फूड सेफ्टी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी नजर रखेगा।
हिंदू धर्म में देव उठान एकादशी के बाद सहालग शुरू होते हैं। तुलसी और शालीग्राम के विवाह के बाद शुभ मुहूर्त प्रारंभ होते हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित बालकृष्ण शर्मा के मुताबिक 31 अक्तूबर से देव उठान एकादशी होगी। एकादशी, द्वियोदशी, त्रियोदशी, चतुर्दशी, दूज, और सात नवंबर को तीज के बाद शुभ मुहूर्त, लगन के दिन शुरू होंगे। इस बार 7 नवंबर के साथ 16, 19 नवंबर से विवाह-लगन के शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। ज्योतिषाचार्य बाल कृष्ण शर्मा ने बताया कि 19, 20, 24, 28, 29 और 30 नवंबर को शुभ मुहूर्त है, जबकि 3, 4, 6 से 12 दिसंबर तक विवाह के लिए शुभ घड़ियां रहेगी। इनमें सबसे खास तीन दिसंबर को माना गया है, इस रोज सबसे अधिक लगन, शुभ घड़ी है। विशेष रूप से 19 नवंबर को सहालग की शुुरुआत होगी। जिसमें सात फेरों के लिए नौ दिन शुभ मुहूर्त है।
मंडप के तड़के पर होगी कड़ी निगाह
मुजफ्फरनगर। इस बार शुभ मुहूर्त में मंडप में गूंजने वाली शहनाईयों पर खाद्य सुरक्षा विभाग भी कड़ी निगाह रखेगा। मंडप में बनने वाले भोजन, तड़के की जांच होगी। जिस मंडप में बारात ठहरेगी, वहां बनने वाले भोजन, बनाने वाले कैटरिंग आदि की जांच-पड़ताल की जाएगी। डीओ विनीत कुमार ने बताया कि कैटरिंग के लाइसेंस, उसके खाना बनाने के तरीकों, मसालों के प्रयोग आदि की जांच-पड़ताल की जाएगी। इसके लिए जिलेभर के मंडपों की सूची तैयार की गई है। मंडप वालों से भी कैटरिंग का कार्य करने वालों की डिटेल मांगी गई है।
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आसान नहीं होगा नाचना-कूदना
मुजफ्फरनगर। विवाह का सीजन और नाच-गाना न हो, यह मुमकिन नहीं हो सकता है। इस बार नाचने-गाने पर नजर रहेगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उन रास्तों, क्षेत्रों पर बैंड-बाजा और बारात के ध्वनि प्रदूषण की गहनता से जांच करेगा. जहां ध्वनि प्रदूषण प्रतिबंधित है। प्रतिबंधित क्षेत्रों, रास्तों पर पड़ने वाले मंडपों की सूची तैयार की गई है। यहां तेज आवाज में गाने बजाने की अनुमति नहीं रहेगी।
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मुजफ्फरनगर (मुजफ्फरनगर)। इस बार सात नवंबर से बाबुल के घर में शहनाई गूंजना शुरू हो जाएंगी। 31 अक्तूबर को देव उठान एकादशी के बाद शादी-विवाह के लिए शुभ मुहूर्त प्रारंभ होंगे। विशेष शुभ मुहूर्त 19 नवंबर के बाद प्रारंभ माने गए हैं। शादी के लिए 12 दिसंबर तक कई शुभ दिन हैं, जिनमें तीन दिसंबर सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। इस बार बैंड-बाजा, बारात की मस्ती पर फूड सेफ्टी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी नजर रखेगा।
हिंदू धर्म में देव उठान एकादशी के बाद सहालग शुरू होते हैं। तुलसी और शालीग्राम के विवाह के बाद शुभ मुहूर्त प्रारंभ होते हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित बालकृष्ण शर्मा के मुताबिक 31 अक्तूबर से देव उठान एकादशी होगी। एकादशी, द्वियोदशी, त्रियोदशी, चतुर्दशी, दूज, और सात नवंबर को तीज के बाद शुभ मुहूर्त, लगन के दिन शुरू होंगे। इस बार 7 नवंबर के साथ 16, 19 नवंबर से विवाह-लगन के शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। ज्योतिषाचार्य बाल कृष्ण शर्मा ने बताया कि 19, 20, 24, 28, 29 और 30 नवंबर को शुभ मुहूर्त है, जबकि 3, 4, 6 से 12 दिसंबर तक विवाह के लिए शुभ घड़ियां रहेगी। इनमें सबसे खास तीन दिसंबर को माना गया है, इस रोज सबसे अधिक लगन, शुभ घड़ी है। विशेष रूप से 19 नवंबर को सहालग की शुुरुआत होगी। जिसमें सात फेरों के लिए नौ दिन शुभ मुहूर्त है।
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मंडप के तड़के पर होगी कड़ी निगाह
मुजफ्फरनगर। इस बार शुभ मुहूर्त में मंडप में गूंजने वाली शहनाईयों पर खाद्य सुरक्षा विभाग भी कड़ी निगाह रखेगा। मंडप में बनने वाले भोजन, तड़के की जांच होगी। जिस मंडप में बारात ठहरेगी, वहां बनने वाले भोजन, बनाने वाले कैटरिंग आदि की जांच-पड़ताल की जाएगी। डीओ विनीत कुमार ने बताया कि कैटरिंग के लाइसेंस, उसके खाना बनाने के तरीकों, मसालों के प्रयोग आदि की जांच-पड़ताल की जाएगी। इसके लिए जिलेभर के मंडपों की सूची तैयार की गई है। मंडप वालों से भी कैटरिंग का कार्य करने वालों की डिटेल मांगी गई है।
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आसान नहीं होगा नाचना-कूदना
मुजफ्फरनगर। विवाह का सीजन और नाच-गाना न हो, यह मुमकिन नहीं हो सकता है। इस बार नाचने-गाने पर नजर रहेगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उन रास्तों, क्षेत्रों पर बैंड-बाजा और बारात के ध्वनि प्रदूषण की गहनता से जांच करेगा. जहां ध्वनि प्रदूषण प्रतिबंधित है। प्रतिबंधित क्षेत्रों, रास्तों पर पड़ने वाले मंडपों की सूची तैयार की गई है। यहां तेज आवाज में गाने बजाने की अनुमति नहीं रहेगी।