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%अचानक झटका लगा, लाशें ऊपर आ पड़ीं%

Tue, 22 Aug 2017 12:43 AM IST
Updated Tue, 22 Aug 2017 12:43 AM IST
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%अचानक झटका लगा, लाशें ऊपर आ पड़ीं%
हवा में उछली थी बोगियां, यात्री एक-दूसरे पर गिरे
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मुजफ्फरनगर। स्वामी कल्याणदेव जिला चिकित्सालय में भर्ती रेल हादसे में घायल यात्री उस मंजर को याद कर फफक पड़ते हैं। घायलों की जुबानी हादसे की भयावहता बयां कर रही है। उत्कल एक्सप्रेस का हादसा इतना भयावह था कि कई यात्रियों का जिस्म पलभर में बेजान हो गया। झटके के साथ कई फुट हवा में लहराकर कोच मकानों, जमीन में लगे, तो महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे बेहोश गए। घायलों ने हादसे के वक्त की जो तस्वीर बताई, वह रौंगटे खड़े करती है। एस-1, एस-2 कोच में अचानक झटका लगा और डिब्बे पलटते ही लाशें ऊपर गिरने लगीं।

शहर की साकेत कॉलोनी निवासी विशाल पुत्र अनिल मेरठ में मजदूरी करता है। रोजाना ट्रेनों से आवाजाही होती है। शनिवार को जल्द काम खत्म कर घर लौट रहा था, लेकिन क्या मालूम था कि अगले ही पल मौत से सामना हो जाएगा। वह हादसे का मंजर याद कर फफक पड़ता है। बोला, एक पल लगा था कि अब उसकी भी जान नहीं बचेगी। इंजन के तीसरे डिब्बे में सवार था। हादसे के बाद काफी देर तक बचाने के लिए चिल्लाता रहा। आधे घंटे बाद युवकों के रूप में फरिश्ते पहुंचे, जिन्होंने एंबुलेंस का भी इंतजार नहीं किया। उसे एक रेहड़े में डालकर अस्पताल पहुंचा दिया। बगल में दूसरे बेड पर लेटे सिसौली का मोहम्मद इंतजार भी मेरठ से पत्थर काटने की मशीन ला रहा था। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि पलभर में सबकुछ खत्म हो गया। कोच में भीड़ के नीचे दबकर बेहोश हुए इंतजार को पांच घंटे बाद अस्पताल में होश आया। बड़े भाई नसीम ने बताया कि खुदा का शुक्र है कि भाई की जान बच गई। परिवार में हादसे के बाद से ही परेशान थे, इंतजार के मिलने के बाद दिल को तसल्ली हुई। ग्वालियर के परशुराम अपनी पत्नी बालाणी के साथ हरिद्वार में गंगा स्नान करने जा रहे थे। स्लीपर डिब्बे में सवार थे। परशुराम कहते हैं कि दिनभर बैठे रहने के बाद थकान सी हुई तो नींद आ गई। अचानक ट्रेन में कई झटके लगे और कोच में सवार कई लोग उनके ऊपर आ गिरे। चीखपुकार मची तो कुछ लोगों ने उन्हें भी कोच से बाहर निकाला। बालाणी ने कहा कि जीवन में कभी इतना बड़ा हादसा नहीं देखा, अब कभी ट्रेन की सवारी नहीं करेंगे। सूचना पाकर उनके पांच बेटे सनोम, कंचा सिंह, करण, कैलाश कुमार, सुरेंद्र सिंह अस्पताल पहुंचे। माता-पिता को सलामत पाकर भगवान को शुक्रिया अदा किया। यहीं पर भर्ती बागपत के अमीनगर निवासी मुबारिक अली छपार के भारत मेडिकल कालेज में बीएएमएस में द्वितीय वर्ष का छात्र है। वह एस-वन कोच में सवार था। हादसे के बारे में पूछा तो ऊपर वाले का शुक्र किया। उसने बताया कि कोच एक-दूसरे से भिड़े तो कुछ व्यक्ति तो तुरंत मर गए, जबकि महिलाएं और बुजुर्ग बेहोश हो गए, जो उसके ऊपर गिर गए। करीब आधा घंटे तक जिंदगी बचाने के लिए जद्दोजहद की, उस वक्त जिस्म बेजान हो गया और लगा कि मौत सामने है। रेलवे की बड़ी लापरवाही से कई घरों के लाल चले गए, ऊपर वाला कभी गुनहगारों को माफ नहीं करेगा। परिजन बोले, रब की मेहरबानी से उनका लाल सलामत मिला है। दूसरे वार्ड में भर्ती मुजफ्फरनगर जीआरपी में तैनात सिपाही रणवीर सिंह ने बताया कि खतौली में वह ट्रेन के पेंट्री डिब्बे में थे, लेकिन गारद करते हुए आगे बढ़ गए। सिग्नल से निकलते ही ट्रेन हादसे का शिकार हो गई। वह कहते हैं कि जीवन के करियर में हादसे काफी देखे हैं, लेकिन इतना खतरनाक हादसा पहली बार देखा है। एक पल तो लगा कि अब बचना मुश्किल है, लेकिन भगवान ने जान बचा ली।
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