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तेंदुए का किसान पर हमला, ग्रामीणों में दहशत फैली
Updated Tue, 23 Oct 2018 11:43 PM IST
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तेंदुए का किसान पर हमला, ग्रामीणों में दहशत फैली
जानसठ। गांव कवाल में खेत पर काम कर रहे एक किसान पर तेंदुए ने हमला कर दिया। किसान ने भागकर नलकूप में घुसकर अपनी जान बचाई। ग्रामीणों का आरोप एक सप्ताह बाद भी प्रशासन व वन विभाग द्वारा तेंदुए को नहीं पकड़ने पर रोष जताया।
गांव कवाल में सोमवार की शाम गांव निवासी किसान बाबू पुत्र घसीटा अपने ट्रैक्टर से खेत की जुताई कर रहा था। इसी दौरान अचानक गन्ने के खेत के अंदर से निकलकर तेंदुए ने उस पर हमला बोल दिया। किसान ने भागकर नजदीक ही नलकूप में घुसकर दरवाजा बंद कर अपनी जान बचाई। किसान ने परिजनों को फोन कर सूचना दी। थोड़ी देर में ग्रामीण लाठी डंडे व लाइसेंसी बंदूक लेकर जंगल की ओर दौड़ पड़े। ग्रामीणों ने जंगल में फायरिंग की तथा तेंदुए की तलाश की, लेकिन तेंदुए का कहीं पता नहीं चल सका। पूर्व प्रधान महेंद्र सैनी, सतीश, नरेश, राजेश, आफताब आदि ने बताया कि एक सप्ताह से तेंदुए की आमद को लेकर ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। लेकिन प्रशासन एवं वन विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। वन विभाग के अधिकारी गांव में आते हैं और घूम कर चले जाते हैं। उन्होंने तेंदुए को पकडऩे के लिए कोई भी योजना नहीं बनाई है। जिसको लेकर ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
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जानसठ। गांव कवाल में खेत पर काम कर रहे एक किसान पर तेंदुए ने हमला कर दिया। किसान ने भागकर नलकूप में घुसकर अपनी जान बचाई। ग्रामीणों का आरोप एक सप्ताह बाद भी प्रशासन व वन विभाग द्वारा तेंदुए को नहीं पकड़ने पर रोष जताया।
गांव कवाल में सोमवार की शाम गांव निवासी किसान बाबू पुत्र घसीटा अपने ट्रैक्टर से खेत की जुताई कर रहा था। इसी दौरान अचानक गन्ने के खेत के अंदर से निकलकर तेंदुए ने उस पर हमला बोल दिया। किसान ने भागकर नजदीक ही नलकूप में घुसकर दरवाजा बंद कर अपनी जान बचाई। किसान ने परिजनों को फोन कर सूचना दी। थोड़ी देर में ग्रामीण लाठी डंडे व लाइसेंसी बंदूक लेकर जंगल की ओर दौड़ पड़े। ग्रामीणों ने जंगल में फायरिंग की तथा तेंदुए की तलाश की, लेकिन तेंदुए का कहीं पता नहीं चल सका। पूर्व प्रधान महेंद्र सैनी, सतीश, नरेश, राजेश, आफताब आदि ने बताया कि एक सप्ताह से तेंदुए की आमद को लेकर ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। लेकिन प्रशासन एवं वन विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। वन विभाग के अधिकारी गांव में आते हैं और घूम कर चले जाते हैं। उन्होंने तेंदुए को पकडऩे के लिए कोई भी योजना नहीं बनाई है। जिसको लेकर ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
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