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श्रद्धालुओं ने महागौरी की पूजा कर व्रत खोला
Updated Fri, 29 Sep 2017 12:59 AM IST
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श्रद्धालुओं ने महागौरी की पूजा कर व्रत खोला
मुजफ्फरनगर। शारदीय नवरात्र के आठवें दिन दुर्गा अष्टमी पर श्रद्धालुओं ने सौभाग्य और धन संपदा की अधिष्ठात्री देवी महागौरी का पूजन कर व्रत खोला। मंदिरों में पूजा-अर्चना की गई। हवन के अलावा कन्याओं को भोजन का प्रसाद भी खिलाया गया।
बृहस्पतिवार को दुर्गा अष्टमी मनाई गई। नवरात्र में श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के आठवें स्वरूप देवी महागौरी का पूजन किया। सुबह से ही शहर के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। शहर के पंजाबी सत्संग मंदिर मल्हूपुरा, वैष्णो देवी मंदिर गांधी कॉलोनी, दुर्गा मंदिर सनातन धर्मशाला, संकीर्तन भवन नईमंडी, बोहरों का मंदिर अंसारी रोड, माता का मंदिर अलमासपुर, शिव दुर्गा मंदिर लक्ष्मण विहार, बावन जी मंदिर, मां शतचंडी मंदिर गोशाला नदी रोड और काली देवी मंदिर में पूजा अर्चना की गई। मां की कथाओं का गुणगान किया गया। 18 गुणों की प्रतीक महागौरी अष्टांग योग की अधिष्ठात्री है। सुबह श्रद्धालुओं ने हवन किया। इसके बाद कन्या पूजन कराया गया। धर्म ग्रंथों में तीन वर्ष से लेकर नौ वर्ष की कन्याएं साक्षात शक्ति का स्वरूप मानी जाती है। दुर्गा सप्तशती में दुर्गा पूजन से पहले कन्या का पूजन जरूरी बताया गया है। घरों में कथाओं और मां के संकीर्तनों का आयोजन भी किया गया। शुक्रवार को नवमी पर्व मनाया जाएगा।
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मुजफ्फरनगर। शारदीय नवरात्र के आठवें दिन दुर्गा अष्टमी पर श्रद्धालुओं ने सौभाग्य और धन संपदा की अधिष्ठात्री देवी महागौरी का पूजन कर व्रत खोला। मंदिरों में पूजा-अर्चना की गई। हवन के अलावा कन्याओं को भोजन का प्रसाद भी खिलाया गया।
बृहस्पतिवार को दुर्गा अष्टमी मनाई गई। नवरात्र में श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के आठवें स्वरूप देवी महागौरी का पूजन किया। सुबह से ही शहर के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। शहर के पंजाबी सत्संग मंदिर मल्हूपुरा, वैष्णो देवी मंदिर गांधी कॉलोनी, दुर्गा मंदिर सनातन धर्मशाला, संकीर्तन भवन नईमंडी, बोहरों का मंदिर अंसारी रोड, माता का मंदिर अलमासपुर, शिव दुर्गा मंदिर लक्ष्मण विहार, बावन जी मंदिर, मां शतचंडी मंदिर गोशाला नदी रोड और काली देवी मंदिर में पूजा अर्चना की गई। मां की कथाओं का गुणगान किया गया। 18 गुणों की प्रतीक महागौरी अष्टांग योग की अधिष्ठात्री है। सुबह श्रद्धालुओं ने हवन किया। इसके बाद कन्या पूजन कराया गया। धर्म ग्रंथों में तीन वर्ष से लेकर नौ वर्ष की कन्याएं साक्षात शक्ति का स्वरूप मानी जाती है। दुर्गा सप्तशती में दुर्गा पूजन से पहले कन्या का पूजन जरूरी बताया गया है। घरों में कथाओं और मां के संकीर्तनों का आयोजन भी किया गया। शुक्रवार को नवमी पर्व मनाया जाएगा।
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