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...तो घर में ही रहेगी सियासत की विरासत!
मुरादाबाद/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 13 Mar 2016 04:03 AM IST
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हाजी इरफान के परिवार काो सांत्वना देने पहुंचे सीएम अखिलेश यादव।
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश में विधानसभाओं के पुनर्गठन के बाद बनी बिलारी विधानसभा सीट का पहला और बेहद मकबूल विधायक होने का गौरव प्राप्त करने वाले हाजी इरफान की सियासी विरासत के घर में ही रहने के आसार हैं। हालांकि इस प्रतिष्ठित सीट पर कई राजनीतिक दिग्गजों की निगाहें गड़ी हैं।
हादसे के शिकार हुए हाजी इरफान के घर दिलासा देने गए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने साफ इशारा किया कि बिलारी विधानसभा की सियासत की धुरी मरहूम विधायक के घर के ही इर्द-गिर्द घूमेगी। उन्होंने बेटे फहीम और छोटे भाई मोहम्मद उस्मान को लखनऊ बुलाया है।
उल्लेखनीय है कि 2017 के चुनावी समर से पहले ही तकनीकी कारणों से छह माह के भीतर बिलारी विधानसभा में उपचुनाव भी कराने होंगे। समाजवादी पार्टी की परंपराओं के अनुसार वैसे भी सिटिंग विधायक के निधन की सूरत में अमूमन घर वालों को ही टिकट दिया जाता है।
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मरहूम हाजी इरफान के मामले में तो घर वालों का दावा और भी ज्यादा पुख्ता हो जाता है। हाजी इरफान की बेदाग छवि, सपा के प्रति उनकी निष्ठा और उनके आकस्मिक निधन से उपजी सहानुभूति लहर को देखते हुए पार्टी शायद ही किसी और उम्मीदवार पर दांव लगाना पसंद करे।
इस लिहाज से हाजी इरफान का परिवार का दावा सबसे मजबूत है। अलबत्ता, विधायक की सियासी विरासत कौन अपने कंधे पर ढोएगा इसका फैसला पार्टी हाईकमान करेगा। इस मामले में विधायक के दूसरे नंबर के बेटे मोहम्मद फहीम और छोटे भाई मोहम्मद उस्मान में से एक सपा उम्मीदवार हो सकता है।
हाल में ही हुए चुनाव में हाजी इरफान ने बेटे फहीम को भारी बहुमत से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जितवाकर उनसे भविष्य में सियासत में बड़ी पारी खेलने का संकेत दे दिया था। वहीं छोटे भाई मोहम्मद उस्मान पहले से ही सियासत में सक्रिय हैं। वह प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
फिलहाल गमजदा माहौल में विधायक के परिवार का कोई भी शख्स सियासत या चुनानी संभावना पर बात करने को तैयार नहीं है लेकिन यह भी तय है कि पार्टी आला कमान इन्हीं दो में से किसी एक के कंधे पर विधायक की सियासी विरासत सौंपेगा। इस मामले में सहानुभूति लहर किसके पक्ष में ज्यादा होगी इसका भी गुणाभाग पार्टी जरूर करेगी।
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हादसे के शिकार हुए हाजी इरफान के घर दिलासा देने गए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने साफ इशारा किया कि बिलारी विधानसभा की सियासत की धुरी मरहूम विधायक के घर के ही इर्द-गिर्द घूमेगी। उन्होंने बेटे फहीम और छोटे भाई मोहम्मद उस्मान को लखनऊ बुलाया है।
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उल्लेखनीय है कि 2017 के चुनावी समर से पहले ही तकनीकी कारणों से छह माह के भीतर बिलारी विधानसभा में उपचुनाव भी कराने होंगे। समाजवादी पार्टी की परंपराओं के अनुसार वैसे भी सिटिंग विधायक के निधन की सूरत में अमूमन घर वालों को ही टिकट दिया जाता है।
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मरहूम हाजी इरफान के मामले में तो घर वालों का दावा और भी ज्यादा पुख्ता हो जाता है। हाजी इरफान की बेदाग छवि, सपा के प्रति उनकी निष्ठा और उनके आकस्मिक निधन से उपजी सहानुभूति लहर को देखते हुए पार्टी शायद ही किसी और उम्मीदवार पर दांव लगाना पसंद करे।
इस लिहाज से हाजी इरफान का परिवार का दावा सबसे मजबूत है। अलबत्ता, विधायक की सियासी विरासत कौन अपने कंधे पर ढोएगा इसका फैसला पार्टी हाईकमान करेगा। इस मामले में विधायक के दूसरे नंबर के बेटे मोहम्मद फहीम और छोटे भाई मोहम्मद उस्मान में से एक सपा उम्मीदवार हो सकता है।
हाल में ही हुए चुनाव में हाजी इरफान ने बेटे फहीम को भारी बहुमत से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जितवाकर उनसे भविष्य में सियासत में बड़ी पारी खेलने का संकेत दे दिया था। वहीं छोटे भाई मोहम्मद उस्मान पहले से ही सियासत में सक्रिय हैं। वह प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
फिलहाल गमजदा माहौल में विधायक के परिवार का कोई भी शख्स सियासत या चुनानी संभावना पर बात करने को तैयार नहीं है लेकिन यह भी तय है कि पार्टी आला कमान इन्हीं दो में से किसी एक के कंधे पर विधायक की सियासी विरासत सौंपेगा। इस मामले में सहानुभूति लहर किसके पक्ष में ज्यादा होगी इसका भी गुणाभाग पार्टी जरूर करेगी।