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विश्व एड्स दिवस: नशे को साझा की गई सुई एड्स की वजह हुई
Sun, 01 Dec 2019 02:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा
निशांत खनी, मुरादाबाद
निशांत खनी, मुरादाबाद
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 01 Dec 2019 02:38 AM IST
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एचआईवी एड्स
- फोटो : सोशल मीडिया
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एड्स के लिए अमूमन असुरक्षित यौन संबंधों को ही बड़ी वजह माना जाता है। लेकिन एआरटी सेंटर में आए कई मामले चौंकाने वाला खुलासा कर रहे हैं। नशे की लत के शिकार कुछ युवाओं ने नशा करने के लिए सिरिंज साझा की और एचआईवी के शिकार हो गए।
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पिछले कुछ दिनों में एचआईवी के शिकार लोगों में से बड़ी तादाद ऐसे ही लोगों की है जो नशे के लिए सिरिंज साझा करते थे। ऐसे में सिरिंज की शेयरिंग एचआईवी की बड़ी वजह बनकर उभरी है। एआरटी सेंटर पहुंचने वाले पीड़ितों से इसका खुलासा हुआ है। मंडल में पिछले 11 महीने में 615 एचआईवी पाजिटिव चिन्हित किए जा चुके हैं।
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जिला अस्पताल में मंडल स्तरीय एआरटी सेंटर बना है। इसमें पीड़ितों को एंट्री रैट्रो वायरल थैरेपी दी जाती है। पीड़ितों का इलाज होता है। कई पीड़ितों के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से इलाज के दौरान ही मौत तक हो जाती है।
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जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. राजेंद्र कुमार बताते हैं, एचआईवी संक्रमण की सबसे बड़ी वजह सिरिंज शेयरिंग बन रहा है। युवाओं का एक बड़ा वर्ग नशे की चपेट में है। दर्द निवारक, हार्ट और किडनी जैसी बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन लोग नशे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
डा. राजेंद्र कुमार के मुताबिक एआरटी सेंटर के अलावा ओएसटी सेंटर खोला गया है। इसमें सिरिंज से नशा करने वालों को चिह्नित कर मुंह से नशे की दवाएं दी जाती हैं। धीरे धीरे दवाओं की डोज कम की जाती है।
एआरटी सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक मंडल में इस बार 615 एचआईवी पाजिटिव 30 नवंबर तक चिन्हित किए जा चुके हैं। जबकि इस वर्ष का एक महीना अभी बाकी है। चिकित्साधीक्षक का कहना है कि यह आंकड़ा पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है।
एचआईवी संक्रमण की मुख्य वजह
- सिरिंज की शेयरिंग
- ब्लड ट्रांसफ्यूजन
- असुरक्षित यौन संबंध
- एचआईवी पीड़ित मां से बच्चे को संक्रमण
वर्षवार एचआईवी चिह्नित रोगी
- 2014 में 633 रोगी
- 2015 में 371 रोगी
- 2016 में 342 रोगी
- 2017 में 320 रोगी
- 2018 में 602 रोगी
- 2019 में 615 रोगी