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अचनाहा गर्भपात की दवा खाकर अपनी जान जोखिम में डाल रही महिलाएं

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jul 2020 01:21 AM IST
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women putting their lives at risk by eating abortion medicin
मुरादाबाद। लॉकडाउन अवधि में परिवार नियोजन की दवाओं की उपलब्धता नहीं होने से इससे जुड़े दुष्परिणाम भी सामने आने लगे हैं। गर्भपात के केस बढ़ गए हैं। बाजार में प्रेगनेंसी जांच किट और गर्भपात की दवाओं की 20 फीसदी तक बढ़ी है। महिलाएं बिना चिकित्सक की सलाह के दवाएं खाकर गर्भपात कर रही हैं। दो से तीन महीने के भ्रूण का गर्भपात करने से महिलाओं की जान भी जोखिम में पड़ रही है। सरकारी और निजी अस्पतालों में गर्भपात की दवाएं खाकर कॉम्प्लिकेटेड केसों की संख्या भी दोगुनी हो गई है। स्त्री रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बिना चिकित्सक की सलाह के मेडिकल स्टोरों से दवा खाकर महिलाएं अपनी जान से खिलवाड़ कर रही हैं।
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लॉकडउन की अवधि में प्रशासन ने गिनती के मेडिकल स्टोरों को होम डिलीवरी की अनुमति दी थी। इसमें भी लोगों को जीवन रक्षक दवाओं तक के लिए जूझना पड़ा। परिवार नियोजन से संबंधित दवाओं के आर्डर नहीं हुए। जिन्होंने आर्डर बुक भी कराए दवाओं की उपलब्धता नहीं हुई। इसका असर अब दिखने लगा है। बाजार में प्रेगनेंसी जांच और गर्भपात कराने वाली दवाओं की 20 फीसदी तक खपत बढ़ी है। 12 हफ्ते से अधिक भ्रूण का गर्भपात कराना कानूनन अपराध है। लेकिन महिलाएं खुद ही गर्भपात की दवाएं खा रही हैं। कई महिलाएं झोलाछाप की शरण में जा रही हैं। हालत बिगड़ने पर अस्पताल पहुंच रही हैं।
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मुरादाबाद ऑब्स गायनी सोसायटी की अध्यक्ष डा. निधि ठाकुर बताती हैं महिलाएं अपने आप गर्भपात की दवाएं खा रही हैं। इससे सुरक्षित गर्भपात नहीं हो रहा है। दवाओं की ओवर डोज से उनकी हालत बिगड़ रही है। अप्रशिक्षित चिकित्सक (झोलाछाप) से भ्रूण की सफाई (डीएनसी) करवा रही हैं। कॉम्प्लिकेटेड होकर अस्पताल पहुंच रही हैं। गर्भपात कराने वाली दवाओं की सफलता का प्रतिशत 86 है। अनचाहा भ्रूण का गर्भपात कराने से ब्लीडिंग से एनीमिया का शिकार होकर अस्पताल पहुंच रही हैं। सामान्य दिनों की तुलना में आजकल ऐसे केस दोगुने हो गए हैं।
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स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. रिचा गांगल के मुताबिक लॉकडाउन में प्रजनन दर बढ़ी है। इस अवधि में दंपती को परिवार नियोजन संबंधित दवाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। महिलाएं अब मेडिकल स्टोर से गर्भपात की दवा लेकर खा रही हैं। प्रतिदिन अस्पताल में एक-दो बिगड़े केस आ रहे हैं। महिला अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डा. कल्पना सिंह का कहना है कि उनके यहां भी केस बढ़े हैं। महिलाओं को बिना चिकित्सक की सलाह के कोई भी दवा नहीं खानी चाहिए। इससे उनको जिंदगी भर का दर्द सहना पड़ सकता है।
- मुरादाबाद जिले में दो हजार से अधिक मेडिकल स्टोर और पांच सौ होलसेल डीलर हैं। लॉकडाउन की अवधि में मेडिकल स्टोर बंद रहे। प्रशासन से अधिकृत मेडिकल स्टोरों ने लोगों को जीवन रक्षक दवाओं की होम डिलीवरी दी। इस अवधि में लोगों ने भी परिवार नियोजन से संबंधित दवाओं को प्राथमिकता नहीं दी। जिन्होंने आर्डर भी बुक कराए, उन्हें होम डिलीवरी नहीं पहुंची। अनलॉक के बाद से प्रेगनेंसी जांच किट और गर्भनिरोधक दवाओं की 15 से 20 फीसदी तक खपत बढ़ी है। होलसेल डीलरों के पास मेडिकल स्टोर के आर्डर बुक हो रहे हैं।

- साहित्य रस्तोगी, अध्यक्ष केमिस्ट ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन
- बिना चिकित्सक की सलाह के गर्भपात की दवाएं खाकर दो से तीन महीने का भ्रूण गिराने से ब्लीडिंग और इंफेक्शन की शिकायत लेकर कई महिलाएं अस्पताल पहुंच रही हैं। उनका अल्ट्रासाउंड और इलाज किया जा रहा है। तीन महीने से अधिक का गर्भपात कराने भी आ रही हैं। ऐसे केस वापस किए जा रहे हैं। तीन महीने से अधिक का गर्भपात कराना कानूनन अपराध है।
- डा. कल्पना सिंह, चिकित्सा अधीक्षक।
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