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Moradabad News: बिना प्रयोगशाला विज्ञान का ज्ञान, छात्र परेशान
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मुरादाबाद। यूपी बोर्ड की प्रयोगात्मक परीक्षाएं एक फरवरी से शुरू होंगी लेकिन राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रयोगात्मक कक्षाओं के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। स्कूल की प्रयोगशालाओं में संसाधनों का अभाव है। प्रधानाचार्यों का कहना है कि या तो विद्यार्थियों को हाईस्कूल की प्रयोगशाला में शिफ्ट के हिसाब से प्रयोगात्मक कार्य कराया जाता है या फिर स्कूल की गैलरी में कक्षा संचालित की जाती है। वहीं, डीआईओएस का कहना है कि प्रयोगात्मक कक्षाओं का संचालन करवाया जा रहा है।
माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से यूपी बोर्ड परीक्षा 2024 की प्रयोगात्मक परीक्षा कराने के लिए तारीख का एलान कर दिया है। मुरादाबाद में एक फरवरी से आठ फरवरी के बीच प्रयोगात्मक परीक्षाएं कराई जाएंगी। इसका आयोजन सीसीटीवी की निगरानी में होना है और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जानी है। इसके अलावा विद्यालय स्तर पर कक्षा 12 की प्री-बोर्ड प्रयोगात्मक परीक्षाएं चार जनवरी से दस जनवरी तक प्रधानाचार्यों द्वारा आयोजित करवाई जाएंगी लेकिन इससे पहले नियमित प्रयोगात्मक कक्षाओं का संचालन न होने की वजह से विद्यार्थी और शिक्षक दोनों ही परेशान हैं।
जिले में 50 राजकीय विद्यालय हैं। इनमें 25 हाईस्कूल और 25 इंटरमीडिएट के विद्यालय हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इंटर कॉलेजों में छह ऐसे विद्यालय हैं, जहां पर अभी प्रयोगशालाएं नहीं होने की वजह से प्रोजेक्ट अलंकार के तहत निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। इस वर्ष मिले 12 राजकीय विद्यालयों में से भी चार ऐसे इंटर कॉलेज हैं, जहां पर उपकरण आदि नहीं हैं।
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पैक रखा प्रयोगशाला का सामान
राजकीय इंटर कॉलेज थांवला में एमएसडीपी योजना के तहत राजकीय इंटर कॉलेज को मंजूरी मिली थी। वर्ष 2018 में विभाग को हैंडओवर हो गया। विद्यालय में वर्तमान में कक्षा नौ में 35 और कक्षा दस में 25 बच्चे हैं। प्रयोगशाला में अभी तक जो सामान आया है, वह बॉक्स में बंद रखा है। प्रयोगशाला में धूल भरी हुई है। विभागीय मानक के हिसाब से नौ प्रवक्ता होने चाहिए। विद्यालय में दो शिक्षक कार्यरत हैं। प्रभारी प्रधानाचार्य फकरूल इस्लाम ने बताया कि विज्ञान वर्ग में शिक्षक नहीं हैं। शिक्षक आ जाएंगे तो प्रयोगात्मक कक्षाएं संचालित होने लगेंगी। हमारे स्तर से जो भी प्रयास संभव हैं, हम करते हैं।
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बैठने तक की नहीं है व्यवस्था
राजकीय इंटर कॉलेज मूंढापांडे की स्थापना 1984 में हुई थी। शिक्षकों ने बताया कि भूमि के अभाव में कमरों की भी कमी है। इसकी वजह से विद्यार्थियों को बैठने तक में परेशानी होती है। प्रार्थनासभा भी कई बार रास्ते पर होती है। विद्यालय में छात्र संख्या 715 है। कक्षा 12 में 140 छात्र हैं। भौतिक विज्ञान की परीक्षा तो विद्यार्थी गैलरी में खड़े होकर कर लेते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी रसायन विज्ञान और बायोलॉजी में होती है। प्रयोगात्मक कार्य के लिए पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में प्रयोगात्मक कक्षाएं व्यवस्थित नहीं हो पा रही हैं। प्रधानाचार्य बलवीर सिंह ने बताया कि बच्चे आधे-अधूरे प्रैक्टिकल ही कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भी 80 छात्रों का दाखिला हुआ है लेकिन जमीन की कमी सबसे बड़ी परेशानी है।
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हाईस्कूल की लैब में इंटर की प्रयोगात्मक कक्षाएं
राजकीय इंटर काॅलेज मुरादाबाद में हाईस्कूल की लैब में ही इंटर के तीनों विषय भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और वनस्पति विज्ञान के प्रैक्टिकल का सामान रखा है। शिक्षकों का कहना है कि व्यवस्थित लैब नहीं होने की वजह से प्रयोगात्मक कार्य करवाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं प्रधानाचार्य श्यामा कुमार ने बताया कि स्कूल की नई बिल्डिंग बन गई है। उम्मीद है कि इसी सप्ताह वह बिल्डिंग हमें मिल जाएगी। इसके बाद एक महीने में बच्चों को समुचित तरीके से प्रैक्टिकल करवाए जाएंगे।
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जहां पर प्रयोगशालाएं नहीं हैं, वहां प्रोजेक्ट अलंकार के तहत निर्माण कार्य चल रहा है। विद्यालयों में प्रयोगात्मक कक्षाएं भी संचालित की जा रही हैं। - सर्वेश कुमार, डीआईओएस
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माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से यूपी बोर्ड परीक्षा 2024 की प्रयोगात्मक परीक्षा कराने के लिए तारीख का एलान कर दिया है। मुरादाबाद में एक फरवरी से आठ फरवरी के बीच प्रयोगात्मक परीक्षाएं कराई जाएंगी। इसका आयोजन सीसीटीवी की निगरानी में होना है और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जानी है। इसके अलावा विद्यालय स्तर पर कक्षा 12 की प्री-बोर्ड प्रयोगात्मक परीक्षाएं चार जनवरी से दस जनवरी तक प्रधानाचार्यों द्वारा आयोजित करवाई जाएंगी लेकिन इससे पहले नियमित प्रयोगात्मक कक्षाओं का संचालन न होने की वजह से विद्यार्थी और शिक्षक दोनों ही परेशान हैं।
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जिले में 50 राजकीय विद्यालय हैं। इनमें 25 हाईस्कूल और 25 इंटरमीडिएट के विद्यालय हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इंटर कॉलेजों में छह ऐसे विद्यालय हैं, जहां पर अभी प्रयोगशालाएं नहीं होने की वजह से प्रोजेक्ट अलंकार के तहत निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। इस वर्ष मिले 12 राजकीय विद्यालयों में से भी चार ऐसे इंटर कॉलेज हैं, जहां पर उपकरण आदि नहीं हैं।
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पैक रखा प्रयोगशाला का सामान
राजकीय इंटर कॉलेज थांवला में एमएसडीपी योजना के तहत राजकीय इंटर कॉलेज को मंजूरी मिली थी। वर्ष 2018 में विभाग को हैंडओवर हो गया। विद्यालय में वर्तमान में कक्षा नौ में 35 और कक्षा दस में 25 बच्चे हैं। प्रयोगशाला में अभी तक जो सामान आया है, वह बॉक्स में बंद रखा है। प्रयोगशाला में धूल भरी हुई है। विभागीय मानक के हिसाब से नौ प्रवक्ता होने चाहिए। विद्यालय में दो शिक्षक कार्यरत हैं। प्रभारी प्रधानाचार्य फकरूल इस्लाम ने बताया कि विज्ञान वर्ग में शिक्षक नहीं हैं। शिक्षक आ जाएंगे तो प्रयोगात्मक कक्षाएं संचालित होने लगेंगी। हमारे स्तर से जो भी प्रयास संभव हैं, हम करते हैं।
बैठने तक की नहीं है व्यवस्था
राजकीय इंटर कॉलेज मूंढापांडे की स्थापना 1984 में हुई थी। शिक्षकों ने बताया कि भूमि के अभाव में कमरों की भी कमी है। इसकी वजह से विद्यार्थियों को बैठने तक में परेशानी होती है। प्रार्थनासभा भी कई बार रास्ते पर होती है। विद्यालय में छात्र संख्या 715 है। कक्षा 12 में 140 छात्र हैं। भौतिक विज्ञान की परीक्षा तो विद्यार्थी गैलरी में खड़े होकर कर लेते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी रसायन विज्ञान और बायोलॉजी में होती है। प्रयोगात्मक कार्य के लिए पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में प्रयोगात्मक कक्षाएं व्यवस्थित नहीं हो पा रही हैं। प्रधानाचार्य बलवीर सिंह ने बताया कि बच्चे आधे-अधूरे प्रैक्टिकल ही कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भी 80 छात्रों का दाखिला हुआ है लेकिन जमीन की कमी सबसे बड़ी परेशानी है।
हाईस्कूल की लैब में इंटर की प्रयोगात्मक कक्षाएं
राजकीय इंटर काॅलेज मुरादाबाद में हाईस्कूल की लैब में ही इंटर के तीनों विषय भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और वनस्पति विज्ञान के प्रैक्टिकल का सामान रखा है। शिक्षकों का कहना है कि व्यवस्थित लैब नहीं होने की वजह से प्रयोगात्मक कार्य करवाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं प्रधानाचार्य श्यामा कुमार ने बताया कि स्कूल की नई बिल्डिंग बन गई है। उम्मीद है कि इसी सप्ताह वह बिल्डिंग हमें मिल जाएगी। इसके बाद एक महीने में बच्चों को समुचित तरीके से प्रैक्टिकल करवाए जाएंगे।
जहां पर प्रयोगशालाएं नहीं हैं, वहां प्रोजेक्ट अलंकार के तहत निर्माण कार्य चल रहा है। विद्यालयों में प्रयोगात्मक कक्षाएं भी संचालित की जा रही हैं। - सर्वेश कुमार, डीआईओएस