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Moradabad News: बुखार के साथ विंटर डायरिया, हर दिन तीन भर्ती
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मुरादाबाद। ठंड के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर बुखार, दूसरी ओर विंटर डायरिया। हालात यह हैं कि इस हेल्दी सीजन में भी रोजाना करीब 100 बच्चे इलाज के लिए ओपीडी पहुंच रहे हैं, जबकि हर दिन औसतन तीन बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड में इस समय 14 बच्चे भर्ती हैं। इनमें से 10 बच्चे विंटर डायरिया से पीड़ित हैं। डॉक्टरों के मुताबिक अधिकांश मामलों में बच्चों को तेज बुखार, उल्टी-दस्त और कमजोरी की शिकायत के साथ लाया जा रहा है। छोटे बच्चों में पानी की कमी देखी जा रही है। इसके कारण उन्हें भर्ती कर उपचार करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अवनीश कुमार सिंह का कहना है कि दिन और रात के तापमान में लगातार घटता अंतर, ठंडी हवा और नमी बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर रही है। वायरल संक्रमण और रोटावायरस जनित विंटर डायरिया के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टर लगातार बच्चों की निगरानी में जुटे हैं। डॉक्टरों के अनुसार समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। अगर बच्चे में तेज बुखार, लगातार उल्टी-दस्त, सुस्ती या पेशाब कम होने के लक्षण दिखें तो इसे हल्के में न लें। फौरन डॉक्टर के पास लेकर जाएं।
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डॉक्टरों की सलाह
- बच्चों को उबला और गुनगुना पानी ही पिलाएं
- बाहर का ठंडा और खुला खाना न दें
- दस्त शुरू होते ही ओआरएस देना शुरू करें
- बुखार या बार-बार दस्त होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
- छोटे बच्चों को ठंड से बचाएं, हाथों की साफ-सफाई का ध्यान रखें
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रोटावायरस के कारण विंटर डायरिया के मामले बढ़ गए हैं। हर दिन दो से तीन बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है। अभिभावकों की थोड़ी सी सावधानी से बच्चे इस परेशानी से बच सकते हैं। बच्चों को ठंड में लेकर न निकलें और साफ सफाई का ध्यान रखें।
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- डॉ. अवनीश कुमार सिंह, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड में इस समय 14 बच्चे भर्ती हैं। इनमें से 10 बच्चे विंटर डायरिया से पीड़ित हैं। डॉक्टरों के मुताबिक अधिकांश मामलों में बच्चों को तेज बुखार, उल्टी-दस्त और कमजोरी की शिकायत के साथ लाया जा रहा है। छोटे बच्चों में पानी की कमी देखी जा रही है। इसके कारण उन्हें भर्ती कर उपचार करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अवनीश कुमार सिंह का कहना है कि दिन और रात के तापमान में लगातार घटता अंतर, ठंडी हवा और नमी बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर रही है। वायरल संक्रमण और रोटावायरस जनित विंटर डायरिया के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टर लगातार बच्चों की निगरानी में जुटे हैं। डॉक्टरों के अनुसार समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। अगर बच्चे में तेज बुखार, लगातार उल्टी-दस्त, सुस्ती या पेशाब कम होने के लक्षण दिखें तो इसे हल्के में न लें। फौरन डॉक्टर के पास लेकर जाएं।
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डॉक्टरों की सलाह
- बच्चों को उबला और गुनगुना पानी ही पिलाएं
- बाहर का ठंडा और खुला खाना न दें
- दस्त शुरू होते ही ओआरएस देना शुरू करें
- बुखार या बार-बार दस्त होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
- छोटे बच्चों को ठंड से बचाएं, हाथों की साफ-सफाई का ध्यान रखें
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रोटावायरस के कारण विंटर डायरिया के मामले बढ़ गए हैं। हर दिन दो से तीन बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है। अभिभावकों की थोड़ी सी सावधानी से बच्चे इस परेशानी से बच सकते हैं। बच्चों को ठंड में लेकर न निकलें और साफ सफाई का ध्यान रखें।
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- डॉ. अवनीश कुमार सिंह, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल