{"_id":"22b391b2cdb97e2652f52fddfe08d803","slug":"welldone-pragati-we-salute-you-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शाबाश प्रगति तुम्हारे हौसले को सलाम ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शाबाश प्रगति तुम्हारे हौसले को सलाम
ब्यूरो/अमर उजाला मुरादाबाद
Updated Thu, 25 Feb 2016 01:55 AM IST
विज्ञापन
प्रगति परीक्षा में कम नंबर आने पर अनुचित कदम उठाने वाले या जीवन से हार मान जाने वालाें के लिए मिसाल है। एक दुर्घटना में उसने दोनों हाथ गंवा दिए और जीवन अंधकारमय हो गया। लेकिन उसने हार नहीं मानी और अपनी जिद से जिंदगी को गुलजार करने की ठानी। बोर्ड परीक्षा में उसके साथ परीक्षा दे रहे साथी जब उसे कोहनियों के बीच पेन फंसाकर लिखते हुए देखते हैं तो आश्चर्यचकित हो जाते हैं।
पांच साल की उम्र में प्रगति छत पर खेलते समय बिजली के तारों की चपेट में आ गई थी। जान बचाने के लिए डाक्टरों को कोहनी से हाथ काटने पड़े। पिता आटो चलाकर परिवार को पालन पोषण करत हैं। ऐसे में उसने किसी पर बोझ नहीं बनने की ठानी। कोहनी से ही लिखना शुरू किया। दो साल पहले 85 प्रतिशत अंकों के साथ इंटरमीडिएट किया और इस साल इंटरमीडिएट की परीक्षा दे रही है। साइंस ग्रुप में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कर रही है।
विज्ञापन
पांच साल की उम्र में प्रगति छत पर खेलते समय बिजली के तारों की चपेट में आ गई थी। जान बचाने के लिए डाक्टरों को कोहनी से हाथ काटने पड़े। पिता आटो चलाकर परिवार को पालन पोषण करत हैं। ऐसे में उसने किसी पर बोझ नहीं बनने की ठानी। कोहनी से ही लिखना शुरू किया। दो साल पहले 85 प्रतिशत अंकों के साथ इंटरमीडिएट किया और इस साल इंटरमीडिएट की परीक्षा दे रही है। साइंस ग्रुप में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कर रही है।
विज्ञापन