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...हमने दोस्तों के आंगन में गुलाब उगाए
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मुरादाबाद। साहित्यिक संस्था अक्षरा की ओर से वसंत पंचमी पर नवीन नगर में वसंत-राग (काव्य एवं संगीत-संध्या) का आयोजन किया गया। संगीतज्ञ बालसुंदरी तिवारी, संगीतज्ञ सरिता शर्मा, तबला वादक राधेश्याम एवं संगीत छात्राओं कृतिका, सिमरन, लिपिका, प्रगति, आद्या ने प्रस्तुतियां दीं। डॉ.पूनम बंसल द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से आरंभ हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता हास्य व्यंग्य कवि डॉ. मक्खन मुरादाबादी ने की।
मुख्य अतिथि डॉ. चंद्रभान सिंह यादव तथा विशिष्ट अतिथि ग़जलकार डॉ. कृष्णकुमार नाज रहे। गीतकार डॉ. माहेश्वर तिवारी ने सुनाया कि वसंत गीत हमसे दुनिया जहान की बातें क्या हुईं फूल पान की बातें, भूख पत्ते चबा रही है, यहां मत करो आसमान की बातें। हास्य-व्यंग्य कवि डॉ. मक्खन मुरादाबादी ने सुनाया कि आजकल बड़ी अजीब सी जिंदगी जी रहे हैं हम, हमने दोस्तों के आंगन में गुलाब उगाए, लेकिन उनके कांटे हमारे ही कपड़े फाड़ने के काम आए, कुछ करने के नाम पर उन्हीं को सीं रहे हैं।
श्रेष्ठ वर्मा ने सुनाया कि बहुत कुछ नया सा है अब मगर, फिर भी सबकुछ वही है कहानी किस्से नए हैं अब, मगर लोग पुराने सब वही हैं कविता प्रस्तुत की। विशाखा तिवारी ने पेड़ों को नव पल्लवों से सजाने वाले मन में होरी ठुमरी की मिठास घोलने वाले ऋतुराज तुम कहां विलय हो गए कविता सुनाई।
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योगेंद्र वर्मा ने खुश हो कहा वसंत ने देख धरा का रूप, ठिठुरन के दिन जा चुके जिओ गुनगुनी धूप, महकी धरती देखकर पहने अर्थ तमाम पीली सरसों ने लिखा खत वसंत के नाम दोहा सुनाए। इस दौरान जिया जमीर, राजीव, प्रखर,, डॉ. मनोज रस्तोगी, समीर तिवारी, आशा तिवारी आदि मौजूद रहीं।
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मुख्य अतिथि डॉ. चंद्रभान सिंह यादव तथा विशिष्ट अतिथि ग़जलकार डॉ. कृष्णकुमार नाज रहे। गीतकार डॉ. माहेश्वर तिवारी ने सुनाया कि वसंत गीत हमसे दुनिया जहान की बातें क्या हुईं फूल पान की बातें, भूख पत्ते चबा रही है, यहां मत करो आसमान की बातें। हास्य-व्यंग्य कवि डॉ. मक्खन मुरादाबादी ने सुनाया कि आजकल बड़ी अजीब सी जिंदगी जी रहे हैं हम, हमने दोस्तों के आंगन में गुलाब उगाए, लेकिन उनके कांटे हमारे ही कपड़े फाड़ने के काम आए, कुछ करने के नाम पर उन्हीं को सीं रहे हैं।
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श्रेष्ठ वर्मा ने सुनाया कि बहुत कुछ नया सा है अब मगर, फिर भी सबकुछ वही है कहानी किस्से नए हैं अब, मगर लोग पुराने सब वही हैं कविता प्रस्तुत की। विशाखा तिवारी ने पेड़ों को नव पल्लवों से सजाने वाले मन में होरी ठुमरी की मिठास घोलने वाले ऋतुराज तुम कहां विलय हो गए कविता सुनाई।
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योगेंद्र वर्मा ने खुश हो कहा वसंत ने देख धरा का रूप, ठिठुरन के दिन जा चुके जिओ गुनगुनी धूप, महकी धरती देखकर पहने अर्थ तमाम पीली सरसों ने लिखा खत वसंत के नाम दोहा सुनाए। इस दौरान जिया जमीर, राजीव, प्रखर,, डॉ. मनोज रस्तोगी, समीर तिवारी, आशा तिवारी आदि मौजूद रहीं।