जानलेवा गेम की लत: दिमाग पर हावी हो रहे वीडियो गेम के किरदार, 12 साल के बच्चे ने थॉर बन बडे़ भाई को मारा हथौड़ा
मोबाइल पर लगातार गेम खेलने की लत बच्चों को हिंसक बना रही है। शहर में लगातार इस तरह के मामले बढ़ रहे हैं। लोग बच्चों को लेकर मनोचिकित्सक के पास पहुंच रहे हैं। मुरादाबाद में कुछ दिन पहले एक ऐसे ही मामले में छोटे भाई ने बड़े भाई पर हथौड़े से वार कर दिया था। वह एक गेम के किरदार को खुद में देखने लगा था।
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थॉर...नाम तो आपने सुना ही होगा। हॉलीवुड फिल्मों को महानायक जो कि धरती को बचाने के लिए दुश्मनों से लड़ता है। इसी किरदार में डूबे एक 12 साल के बच्चे ने अपने बड़े भाई की पीठ में हथौड़े से वार कर दिया। गनीमत रही कि मामूली चोट ही लगी और रीढ़ की हड्डी बच गई।
माता पिता ने इस घटना के गंभीरता से लिया और बच्चे को मानसिक रोग विशेषज्ञ के पास ले गए। डॉक्टर ने बच्चे की काउंसिलिंग करने के बाद उसे डेलिंक्वेंट विहेवियर (आपराधिक व्यवहार) की समस्या बताई है। माता पिता ने डॉक्टर को बताया कि बच्चा लंबे समय से थॉर फिल्म की सीरीज, कार्टून आदि देखता था।
वह अपने दोस्तों के साथ गत्ते का हथोड़ा लेकर खेलता था, पार्टियों में भी अपने साथ उस खिलौने को लेकर जाता था। माता-पिता ने बचपना समझकर उसे डांटने की बजाय थॉर कहकर बुलाना शुरू कर दिया। उन्होंने यह कभी नहीं सोचा कि इसके घातक परिणाम हो सकते हैं।
बच्चे का पिछले एक माह से इलाज चल रहा है, अब वह काफी हद तक स्वस्थ है। पढ़ाई में उसका प्रदर्शन भी निखरने लगा है। डॉक्टरों का कहना है कि वीडियो गेम या ज्यादा टीवी देखने के कारण बच्चों में इस तरह के मामले सामने आ रहे थे।
केस-1
कांठ रोड निवासी निजी कंपनी के कर्मचारी का 11 साल का बेटा वीडियो गेम की लत के कारण झगड़ालू प्रवृत्ति का हो गया। वह अपने दोस्तों के साथ हर समय लड़ाई करता रहता है, स्कूल से उसकी शिकायतें आने लगीं तो माता-पिता ने वीडियो गेम बंद करा दिया। लेकिन वह वीडियो गेम खेलने की जिद करने लगा। बच्चे ने अपने हाथ की नस काटने की कोशिश की। उसका इलाज मानसिक रोग विशेषज्ञ से चल रहा है।
केस-2
सिविल लाइंस निवासी स्पेयर पार्ट्स कारोबारी का 12 साल का बेटा रात में माता-पिता से छिपकर मोबाइल में वीडियो गेम खेलता है। इसके कारण अक्सर दिन भर सोता रहता है। उसे स्कूल जाने में बहुत परेशानी होती है। वीडियो गेम की तरह घर में चीखने लगता है। परेशान होकर पिता ने उसे मानसिक रोग विशेषज्ञ को दिखाया। दो हफ्ते से बच्चे की लगातार काउंसिलिंग चल रही है। उसे दूसरे गेम खेलने की सलाह दी गई है।
डॉक्टरों की सलाह
- बच्चे को मोबाइल व वीडियो गेम का सीमित प्रयोग करने दें
- नजर रखें कि आपका बच्चा कौन सा गेम खेलता है
- कार्टून, फिल्म या गेम से उसकी पढ़ाई या व्यवहार प्रभावित हुआ है तो गंभीरता से लें
- बच्चे पर अचानक प्रतिबंध न लगाएं उस समझाने की कोशिश करें
- सकारात्मक किरदारों वाले वीडियो गेम खिला सकते हैं
- धीरे-धीरे गेम की लत खत्म कराएं और बाहर खेलने को कहें