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Moradabad News: निमोनिया से होने वाली मौतों से बचाव के लिए वैक्सीन जरूरी
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मुरादाबाद। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की मुरादाबाद शाखा ने न्यूमोकोकल वैक्सीन पर एक सीएमई का आयोजन किया। इसमें मुख्य वक्ता दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के नवजात रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. पंकज गर्ग रहे। उन्होंने कहा कि भारत में हर साल नवजातों की मौत के 5.6 लाख मामलों में 1.05 लाख के लिए न्यूमोकोकल वायरस जिम्मेदार है।
यह सामान्य निमोनिया से कई गुना ज्यादा खतरनाक होता है। इससे बचाव के लिए वैक्सीन बेहद जरूरी है, जोकि अब सरकारी अस्पतालों में भी लगाई जा रही है। डॉ. पंकज ने आंकड़ा रखा कि दुनिया भर में न्यूमोकोकल रोग से होने वाली पांच साल से कम उम्र के बच्चों की कुल मौतों में लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी भारत की है। हर साल देश में न्यूमोकोकल निमोनिया के करीब 5.6 लाख मामले सामने आते हैं, जिनमें से लगभग 1.05 लाख बच्चों की जान चली जाती है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के मुताबिक स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया पांच साल से कम उम्र के बच्चों में होने वाले दिमागी बुखार का सबसे बड़ा कारण है। बच्चों में दिमागी बुखार के 82.9 प्रतिशत मामलों के लिए यही बैक्टीरिया जिम्मेदार है। जागरूकता और टीकाकरण के जरिए ही बच्चों की जान बचाई जा सकती है और अंडर-5 मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है।
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मुख्य वक्ता ने दिल्ली, चंडीगढ़. केरल, तमिलनाडु आदि राज्यों का मॉडल बताते हुए शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उपाय बताए। उन्होंने एनआईसीयू, एसएनसीयू, कंगारू मदक केयर और मदर मिल्क बैंक के बारे में जानकारी दी। सीएमई में आईएपी के अध्यक्ष डॉ. सुनील खट्टर, डॉ. बीके दत्त, डॉ. शलभ अग्रवाल, डॉ. केजी गुप्ता, डॉ. अनिल महेश, डॉ. रवि गंगल, डॉ. सुशांत श्रीधर, डॉ. गिरिश अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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यह सामान्य निमोनिया से कई गुना ज्यादा खतरनाक होता है। इससे बचाव के लिए वैक्सीन बेहद जरूरी है, जोकि अब सरकारी अस्पतालों में भी लगाई जा रही है। डॉ. पंकज ने आंकड़ा रखा कि दुनिया भर में न्यूमोकोकल रोग से होने वाली पांच साल से कम उम्र के बच्चों की कुल मौतों में लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी भारत की है। हर साल देश में न्यूमोकोकल निमोनिया के करीब 5.6 लाख मामले सामने आते हैं, जिनमें से लगभग 1.05 लाख बच्चों की जान चली जाती है।
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भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के मुताबिक स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया पांच साल से कम उम्र के बच्चों में होने वाले दिमागी बुखार का सबसे बड़ा कारण है। बच्चों में दिमागी बुखार के 82.9 प्रतिशत मामलों के लिए यही बैक्टीरिया जिम्मेदार है। जागरूकता और टीकाकरण के जरिए ही बच्चों की जान बचाई जा सकती है और अंडर-5 मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है।
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मुख्य वक्ता ने दिल्ली, चंडीगढ़. केरल, तमिलनाडु आदि राज्यों का मॉडल बताते हुए शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उपाय बताए। उन्होंने एनआईसीयू, एसएनसीयू, कंगारू मदक केयर और मदर मिल्क बैंक के बारे में जानकारी दी। सीएमई में आईएपी के अध्यक्ष डॉ. सुनील खट्टर, डॉ. बीके दत्त, डॉ. शलभ अग्रवाल, डॉ. केजी गुप्ता, डॉ. अनिल महेश, डॉ. रवि गंगल, डॉ. सुशांत श्रीधर, डॉ. गिरिश अग्रवाल आदि मौजूद रहे।