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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   UP Politics: BJP Searches for Strategy to Counter SP on 7 Moradabad Division Seats, Awaits Long-Pending Wins

UP: यूपी की इन सात सीटों पर सपा की काट ढूंढ रही भाजपा, लंबे समय से है फूल खिलने का इंतजार; जिताऊ चेहरे की तलाश

Sat, 22 Aug 2026 02:55 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: Sharukh Khan Updated Sat, 22 Aug 2026 02:55 PM IST
सार

यूपी में भाजपा मुरादाबाद मंडल की सात सीटों पर जीत के लिए समाजवादी पार्टी की काट तलाश करने में लगी है। सात सीटों का पार्टी सर्वे करा रही है। पार्टी इन सीटों पर जिताऊ चेहरे तलाश रही है। मुस्लिम बहुल सीटों पर सहयोगी दलों की नब्ज टटोली जा रही है।

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UP Politics: BJP Searches for Strategy to Counter SP on 7 Moradabad Division Seats, Awaits Long-Pending Wins
UP Politics - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भाजपा और सपा के लिए मुरादाबाद मंडल अहम है। सपा को अपना गढ़ बचाने और भाजपा को यहां भगवा फहराने की चुनाैती है। मंडल की सात सीटों पर भाजपा को लंबे समय से जीत का इंतजार है। इन सीटों पर पार्टी सपा की काट ढूंढ रही है। इसके लिए पार्टी सर्वे करा रही है। जिताऊ चेहरा तलाश रही है। साथ ही इन सीटों पर गठबंधन के सहयोगी दलों की भी नब्ज टटोली जा रही है।
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मुरादाबाद मंडल को सपा का गढ़ कहा जाता है। विधानसभा चुनावों के परिणाम भी यही बताते हैं। 2017 के चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला था। इस चुनाव में सपा को 47 सीटें मिली थीं। इसमें 12 सीटें मुरादाबाद मंडल की थी। जबकि भाजपा ने 15 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं 2022 में सपा ने 17 और भाजपा ने 10 सीटें जीतीं थीं।
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हार जीत के ये आंकड़े दोनों दलों के लिए मुरादाबाद मंडल अहम बना देता है। मंडल में सात ऐसी सीटें (रामपुर और कुंदरकी उपचुनाव के परिणाम छोड़कर) हैं जहां भाजपा को लंबे समय से जीत नहीं मिली है। किसी सीट पर पार्टी को 31 साल से जीत नहीं मिली तो कोई सीट 29 साल से हारती आ रही है।
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रामपुर सीट पर तो पार्टी को पहली बार उपचुनाव (2022) में ही जीत मिली है। वहीं कुंदरकी उपचुनाव जीतकर रामवीर सिंह ने भाजपा का 33 साल का वनवास खत्म किया था। जबकि मुरादाबाद देहात, अमरोहा, संभल, बिजनौर जिले की नगीना और नजीबाबाद सीट पर अभी भी पार्टी को जीत का इंतजार है। इन सीटों पर जीत के लिए भाजपा सपा की काट तलाश रही है।
 

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व इस पर मंथन कर रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक यूपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष रह चुके बासित अली का कद बढ़ाकर मोर्चे का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। वहीं मुस्लिम बहुल सीटों पर सहयोगी दलों की भागीदारी बढ़ाने पर भी पार्टी के भीतर मंथन चल रहा है।

मुरादाबाद मंडल की कुछ सीटों पर पार्टी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाती है। वरिष्ठ नेताओं के पास इसकी फीडबैक रहती है। पार्टी ऐसी सीटों का सर्वे कराती है। जीत का फार्मूला तलाशती है। रणनीति तैयार की जाएगी। गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ भी मंथन चल रहा है। - हरिओम शर्मा, क्षेत्रीय अध्यक्ष, भाजपा

मुरादाबाद देहात सीट को लेकर पार्टी पदाधिकारियों के साथ रणनीति पर मंथन चल रहा है। यहां मुस्लिम मतदाता अधिक हैं। इसको ध्यान में रखकर रणनीति बनाई जा रही है। - गिरीश भंडूला, भाजपा महानगर अध्यक्ष

इन सीटों पर जीत का इंतजार

विधानसभा सीट आखिरी जीत
मुरादाबाद देहात 1993
अमरोहा 1996
संभल 1993
नगीना 1991
नजीबाबाद 1991
कुंदरकी 1993
रामपुर 2022 (पहली जीत)

नोट : कुंदरकी और रामपुर सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा को जीत मिली थी।
 

तारिक मंसूर और बासित अली के जरिये मुस्लिम वोटरों को रिझाने की कोशिश
नितिन नवीन की राष्ट्रीय टीम में दो मुस्लिम चेहरों का कद बढ़ा है। इसमें अलीगढ़ विवि के पूर्व वीसी तारिक मंसूर को मंत्री से उपाध्यक्ष बनाया गया है। जबकि बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। इन दोनों को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल कर पार्टी ने मुस्लिम कार्ड खेला है।
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