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UP: मुठभेड़ की पुलिसिया कहानी कोर्ट में ढेर...आरोपी रिहा; कोर्ट ने कहा- पूरी काल्पनिक कथावस्तु तैयार कर फंसाया

Thu, 30 Jan 2025 02:28 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 30 Jan 2025 02:28 PM IST
सार

यूपी पुलिस का एनकाउंटर फर्जी निकला। कोर्ट ने आरोपी सुरेंद्र उर्फ सुरेश की घटना स्थल पर मौजूदगी को गलत पाया। कोर्ट ने सैदनगली इंस्पेक्टर और विवेचक पर कार्रवाई के लिए डीजीपी व एसपी को पत्र लिखा है। 

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UP encounter court wrote a letter to DGP and SP for action against Saidangali inspector and investigator
UP encounter court - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमरोहा में गोकशी करने जा रहे आरोपियों के साथ हुई पुलिस मुठभेड़ के दौरान मौजूदगी दिखाकर गिरफ्तार किए गए एक आरोपी की कोर्ट ने पुलिस रिमांड निरस्त कर दी। साथ ही उसे रिहा कर दिया। कोर्ट ने पुलिस की केस डायरी में विश्वसनीय एवं प्रामाणिक साक्ष्य नहीं होने की बात कही और गिरफ्तारी को पुलिस की मनमानी माना। 
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कोर्ट ने सैदनगली इंस्पेक्टर दिनेश कुमार शर्मा और दरोगा सतवीर सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए डीजीपी और एसपी को भी पत्र लिखा। मामला सैदनगली थाने से जुड़ा है। 
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पुलिस के अनुसार, 25 जनवरी को सैदनगली इंस्पेक्टर दिनेश कुमार शर्मा, दरोगा अरुण कुमार, हरपत सिंह अन्य पुलिसकर्मियों के साथ सगश्त कर रहे थे। तभी उन्हें हसनपुर रोड स्थित किसान कोल्ड स्टोर के पास जंगल में गोकशी  किए जाने की सूचना मिली। सूचना पर पुलिसकर्मियों ने मौके पर छापा मार दिया।
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इस दौरान दरोगा सतवीर कुमार को भी बुला लिया। इस दौरान एक गोवंशीय पशु आम के पेड़ के नीचे खड़ा मिला। आरोपियों ने गोकशी करने के लिए उसके पैर बांध रखे थे और वध करने की तैयारी कर रहे थे। पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने की कोशिश की तो फायरिंग शुरू कर दी। 

बाद में कंट्रोल रूम को सूचना देकर अन्य पुलिस फोर्स को भी मौके पर बुला लिया गया। मुठभेड़ में पुलिस की गोली लगने से सैदनगली निवासी दानिश घायल हो गया था। चार आरोपी मौके से भाग निकले। 

 

जानलेवा हमला करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया
इस मामले में पुलिस ने सैदनगली के मोहल्ला कुरैशियान निवासी दानिश को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया था। साथ ही मोहल्ला कुरैशियान निवासी जीशान, दाऊद उर्फ शानू, मोहल्ला मदीना मस्जिद के रहने वाले सलीम और सकतपुर गांव के रहने वाले सुरेंद्र उर्फ सुरेश वाल्मीकि के खिलाफ गोहत्या निवारण अधिनियम व पुलिस पर जानलेवा हमला करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था। 

इस मामले में पुलिस ने 27 जनवरी को आरोपी सुरेंद्र उर्फ सुरेश को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया और मुकदमे की विवेचना कर रहे विवेचक सतवीर सिंह ने आरोपी की रिमांड मांगी। 28 जनवरी को मुठभेड़ के मामले में हसनपुर इंस्पेक्टर रविंद्र प्रताप सिंह ने सुरेंद्र की रिमांड मांगी। मुकदमे की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ओमपाल सिंह ने की। 

 

कठोर कार्रवाई करने के लिए डीजीपी और एसपी के पत्र लिखा
कोर्ट ने पुलिस की सुरेंद्र उर्फ सुरेश की घटना स्थल पर मौजूदगी को गलत पाया। कोर्ट ने सुरेंद्र को 20 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहा कर दिया। साथ ही मुकदमा के वादी इंस्पेक्टर  दिनेश कुमार शर्मा और दरोगा सतवीर सिंह के खिलाफ दो माह में जांच कराकर कठोर कार्रवाई करने के लिए डीजीपी और एसपी के पत्र लिखा। 

 

बेटी की शादी के कार्ड बांटने चंडीगढ़ गए थे सुरेंद्र 
मुकदमे में आरोपी बनाए गए सुरेंद्र उर्फ सुरेश घटना के दिन अपनी बेटी की शादी के कार्ड बांटने चाचा के साथ चंडीगढ़ गए थे। सुरेंद्र 23 जनवरी को चंडीगढ़ के लिए निकले थे। 24 जनवरी को पहुंचे और 25 जनवरी को रिश्तेदारों को कार्ड बांटे थे। वह 26 जनवरी को सुबह छह बजे घर लौटे और घर आकर सो गए। 

करीब नौ बजे सैदनगली पुलिस पहुंची और गोकशी व मुठभेड़ में शामिल होने के आरोप में सुरेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया। न्यायालय ने माना कि आरोपी सुरेंद्र सिंह के घटना में शामिल होने का कोई विश्वसनीय प्रमाण केस डायरी में उपलब्ध नहीं है। उनका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है। 

 

न्यायालय की टिप्पणी
न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पूरे प्रकरण का विश्लेषण करते हुए यह स्पष्ट हो रहा है कि किसी अज्ञात उद्देश्य के लिए सैदनगली थानाध्यक्ष दिनेश कुमार शर्मा और दरोगा सतवीर सिंह के द्वारा पूरी काल्पनिक कथावस्तु तैयार करके सुरेंद्र सिंह उर्फ सुरेश को फंसाया और गिरफ्तार किया गया है। न्यायालय ने कहा कि प्रकरण की निष्पक्ष एवं गंभीर जांच किया जाना आवश्यक है। 

सुरेंद्र सिंह के विरुद्ध कोई विश्वसनीय एवं प्रामाणिक साक्ष्य केस डायरी में उपलब्ध नहीं है। इसलिए उसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता एवं गरिमामय जीवन जीने के अधिकार से पुलिस की मनमानी तथा अविधिपूर्ण कार्रवाई के कारण वंचित नहीं किया जा सकता। आरोपी की डिमांड स्वीकार किए जाने का कोई विधि आधार नहीं बनता है।
 
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