फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   Ukraine attack: Celebration on the return of five students

यूक्रेन हमला : पांच छात्रों के वतन लौटने पर मना जश्न

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 02 Mar 2022 01:05 AM IST
विज्ञापन
Ukraine attack: Celebration on the return of five students
यूक्रेन के वर्तमान हालातों से चिंतित पांच परिवारों के लिए सोमवार की रात खुशियां लेकर आईं। केंद्र और प्रदेश सरकार की मदद से पांच छात्र अपने घर सकुशल लौटकर आए। परिजन घरों के दरवाजे पर खड़े होकर अपने बच्चों का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। रात एक बजे बच्चों के घर पहुंचते ही परिजन उनसे खुशी से लिपट गए। फूल-मालाएं पहनाकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। मंगलवार दिनभर उनके घरों में त्योहार जैसा जश्न रहा। कोई बहन के साथ समय व्यतीत किया तो कोई अपने दोस्तों के साथ बाहर घूमने चला गया।
विज्ञापन

करुला निवासी औरंगजेब, हिमगिरी निवासी मोहम्मद अरहम, पंडित नगला निवासी मोहम्मद शाकिब, दलपतपुर मोहम्मद फिरोज और मोहम्मद नाजिर नौ फरवरी को एमबीबीएस करने के लिए यूक्रेन के उजग्रोद शहर गए थे। पांचों छात्र प्रथम वर्ष में अध्ययनरत हैं। औरंगजेब ने बताया कि यूक्रेन में उजग्रोद शहर में 24 फरवरी को वह अपने छात्रावास में थे। एंबेसी की ओर से निर्देश जारी किए गए कि यदि रुकना जरूरी न हो तो वह भारत लौट सकते हैं, लेकिन सभी छात्रों को अपने प्रमाण पत्रों का सत्यापन करवाना था, जिसकी वजह से वह रुक गए थे।
विज्ञापन

25 फरवरी को उन्हें यूक्रेन के अधिकारियों ने दूसरे छात्रावास में भेज दिया था। वहां पर बंकर बने हुए थे। इसके बाद रविवार शाम को उन्हें हंगरी बॉर्डर पर पहुंचाया गया। वहां 14 घंटे का समय लगा। बॉर्डर पार करने के बाद बुडापोस्ट ले जाने के लिए भारतीय दूतावास से अधिकारी आए थे। आठ घंटे वहां फ्लाइट का इंतजार किया। सोमवार सुबह छह बजे फ्लाइट में बैठे। शाम पांच बजकर दस मिनट पर दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे। वहां उन्हें यूपी सरकार के अधिकारी लेने आए थे। अधिकारी उन्हें यूपी भवन लेकर गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

छात्रों ने बताया कि बॉर्डर पार करने के बाद से घर आने तक उन्हें खाना, नाश्ता सभी सुविधाएं भारत सरकार ने उपलब्ध कराईं। यहां तक कि फ्लाइट का किराया भी नहीं लिया गया। दिल्ली से प्रदेश सरकार की ओर से कार की व्यवस्था की गई थी। कार द्वारा सभी छात्रों को उनके घर तक छोड़ा गया है। औरंगजेब ने बताया कि रात एक बजे परिजनों के अलावा पड़ोसी भी दरवाजे पर इंतजार करते मिले। फूल-मालाएं पहनाकर स्वागत किया गया। मम्मी-पापा ने खुशी की वजह से गले लगा लिया। उनके सकुशल लौटने के लिए उनकी अम्मी ने शुकराने की नमाज अदा करने की मन्नत मांगी थी।
बहन के हाथों से खाना खाकर मिला सुकून
दलपतपुर के चमरौआ निवासी दो भाई मोहम्मद फिरोज और मोहम्मद नाजिर भी एमबीबीएस करने के लिए यूक्रेन गए थे। फिरोज ने बताया कि चार दिन बहुत दहशत में बिताए हैं, लेकिन अपने घर लौटने की खुशी की शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। अब गुजारिश है कि वहां फंसे अन्य छात्रों को भी जल्द से जल्द देश वापस लाया जाए। घर पर जश्न का माहौल है। दिनभर रिश्तेदार हाल पूछने के लिए आते रहे। शाम को समय मिलते ही वह छोटी बहन सितारा और भतीजी अलशिफा के साथ रामपुर दोराहा निवासी अपनी बहन निकहत परवीन से मिलने आ गए। उनके हाथों का खाना खाकर बहुत सुकून मिला है। ऐसा लग रहा है कि मौत के मुंह से निकल कर आए हैं। अल्लाह का शुक्र है कि हम सुरक्षित हैं। भारत सरकार पर भरोसा था कि वह हमें जरूर ही निकालेगी। हमने जैसा सोचा उससे अच्छी व्यवस्था हमें देश और प्रदेश की सरकार ने दी है।
परेशानी होने पर कॉल करने के लिए अधिकारियों ने दिया था नंबर
पंडित नगला निवासी हाजी मतलूब के पुत्र मोहम्मद शाकिब ने बताया कि यूक्रेन में बहुत डर लग रहा था कि कैसे घर पहुंचेंगे। परिजन भी परेशान थे। एक छात्रा के प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी होने की वजह से बॉर्डर पर 14 घंटे इंतजार किया। हमले की सूचना मिलने के बाद हमने एक सप्ताह का सामान लिया था। जब शुक्रवार सुबह हमें दूसरे छात्रावास में ले जाया गया, तो हमने राशन का सामान वहां के स्थानीय लोगों को दे दिया। सुरक्षित घर तक पहुंचाया। प्रदेश सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई गई कार हमें घर तक छोड़ने आई थी। कमिश्नर ने हमें अपना नंबर भी दिया था, ताकि रास्ते में कोई परेशानी होने पर हम उन्हें कॉल कर सकें।
तीन दिन बाद सोए पूरी नींद
हिमगिरी निवासी अरहम ने बताया कि तीन दिन के मुश्किल सफर की वजह से आंखों से नींद भी गायब हो गई थी। ऐसे में जब सोमवार देर रात घर आए, तो परिजनों को सामने पाकर राहत मिली। तीन दिन के बाद पूरी नींद सो सके। उन्होंने बताया कि पूरा दिन रिश्तेदारों के साथ बिताया और शाम को दोस्तों के साथ घूमने गए।
विजय अंकल की कॉल से मिला हौसला
मिशन कंपाउंड निवासी नेहा लॉयल ने बताया कि वह एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा हैं। 19 जुलाई 2021 को यूक्रेन के पोल्टावा गई थीं। सोमवार को मुरादाबाद के ज्ञानपुर निवासी विजयपाल सिंह ने फोन कर हालातों की जानकारी ली। विजय अंकल की कॉल से मुझे हौसला मिला। उन्होंने कोई भी परेशानी होने पर मदद का आश्वासन दिया और वहां के एजेंट से हमें बॉर्डर भेजने की व्यवस्था करने को कहा। उनके कहने पर यूक्रेन के समयानुसार दोपहर तीन बजे निकलने के लिए बस उपलब्ध करवाई गईं हैं। यहां से हंगरी बॉर्डर तक पहुंचने में 16 घंटे का समय लगेगा। कड़ाके की ठंड से बचने के लिए कंबल रख लिए हैं। एक अटैची में खाने का सामान, पानी की सात बोतल रख ली हैं। क्योंकि पानी की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ेगी।

बेटे के सलामत लौटने का कर रहे इंतजार
लाजपत नगर निवासी डॉ. नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि उनका बेटा कौशल भारद्वाज दिनीप्रो में एमबीबीएस चतुर्थ वर्ष के छात्र हैं। मंगलवार को हंगरी बॉर्डर के लिए 450 छात्रों को लेकर एक साथ नौ बस रवाना हुई हैं। दिन में एजेंट से बात हुई थी, तो उन्होंने बताया कि वह मेरे बेटे के साथ अन्य सभी छात्रों को सुरक्षित बॉर्डर तक लेकर जाएंगे। दिनीप्रो में लगातार सायरन बज रहे हैं। उम्मीद है कि मंगलवार देर रात तक छात्र बॉर्डर पर पहुंच जाएंगे। कौशल को मैंने पानी, सूखे मेवा, नमकीन और गर्म कपड़े रखने के लिए कहा था। अब बेटे के सकुशल लौटने का बेसब्री से इंतजार हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed