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यातायात पुलिस की ‘तीसरी आंख’ बंद, कैसे दिखे भ्रष्टाचार
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मुरादाबाद। यातायात पुलिस के दरोगा और सिपाहियों के कंधे से बॉडीवार्म कैमरे गायब हो गए हैं। इन कैमरों के जरिये ही यातायात पुलिस को भ्रष्टाचार मुक्त करने के दावे किए गए थे। खास बात है कि अफसर भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिस कारण विभाग की तीसरी आंख बंद होने से भ्रष्टाचार दिखाई नहीं दे रहा है।
पूर्व एसएसपी ने आदेश दिया था कि यातायात पुलिस कर्मी बॉडीवार्म कैमरे का इस्तेमाल करेंगे। चेकिंग के दौरान यातायात पुलिसकर्मियों की वसूली को रोकने के लिए इस तरकीब और तकनीक का प्रयोग करने का फैसला लिया गया था। कुछ दिन तक कैमरों को इस्तेमाल भी हुआ, लेकिन धीरे धीरे कैमरे दरोगा और सिपाहियों के कंधे से गायब हो गए हैं। अब बिना कैमरे के ही चेकिंग चल रही है।
दरोगा और सिपाहियों ने कैमरे तो हटा दिए हैं। साथ ही अफसरों की ओर से भी इन पर कोई सख्त नजर नहीं रखी जा रही है। सोमवार को अमर उजाला टीम की पड़ताल में दिल्ली रोड पर मानसरोवर कालोनी तिराहा, फव्वारा चौक, पीलीकोठी चौराहा, कांठ रोड पर पीएसी तिराहा और कांठ रोड पर अकबर किले के पास वाहन चेकिंग की जा रही थी, लेकिन यहां पुलिस कर्मियों ने बॉडी वार्म कैमरा नहीं लगा रखा था।
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इसलिए लिया था फैसला
28 जून 2021 को मझोला थानाक्षेत्र में हाईवे पर हादसा हो गया था। यहां पिकअप वाहन में बस ने टक्कर मार दी थी। इस हादसे में यातायात पुलिस के सिपाही समेत चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 19 लोग घायल हो गए थे। पुलिस जांच में सामने आया था कि हादसा यातायात पुलिस के इंस्पेक्टर धर्मेंद्र सिंह राठौर और उनकी टीम के कारण हुआ था। टीम ने पिकअप वाहन को वसूली के लिए रोका था और इसी दौरान बस आ गई थी। इस हादसे के बाद यातायात विभाग की काफी फजीहत हुई थी। इस मामले में टीआई धर्मेंद्र सिंह राठौर, तीन सिपाही और दो होमगार्ड के खिलाफ गैर इरादतन हत्या, अवैध वसूूूली की धाराओं में केस दर्ज किया गया था। पुलिस ने आरोपियों को जेल भेज दिया है। जमानत पर रिहा होने के बाद टीआई को बहाल कर दिया गया। एसपी यातायात अशोक कुमार ने बताया कि टीआई धर्मेंद्र सिंह राठौर का तबादला लखनऊ हो गया है। वह यहां से रवानगी कराकर चला गया है। इस हादसे के अलावा भी यातायात पुलिस पर आरोप लगते थे कि चेकिंग के नाम पर लोगों से अवैध वसूली और अभद्रता की जाती है।
यातायात पुलिस में अधिकारी व कर्मचारियों की तैनाती
- एसपी- एक
- सीओ- एक
- टीआई- दो
- टीएसआई- ग्यारह
- हेड कांस्टेबल- 28
- सिपाही- 55
- पीआरडी- 50
- होमगार्ड- 150
यातायात पुलिस के पास दस बॉडी वार्म कैमरे
मुरादाबाद। एसपी यातायात अशोक कुमार ने बताया कि पुलिस के पास दस बॉडी वार्म कैमरे हैं। करीब चार साल से ये कैमरे हैं। उन्होंने बताया कि पांच कैमरे कुंभ मेले की ओर से मुरादाबाद पुलिस को दिए गए थे। एक कैमरा यातायात मुख्यालय से भेजा गया था। जबकि चार कैमरे मुरादाबाद यातायात पुलिस की ओर से खरीदे गए हैं। वाहन चेकिंग के दौरान इस कैमरों का इस्तेताल किया जाता है। अगर कहीं लापरवाही की जा रही है तो चेकिंग कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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पूर्व एसएसपी ने आदेश दिया था कि यातायात पुलिस कर्मी बॉडीवार्म कैमरे का इस्तेमाल करेंगे। चेकिंग के दौरान यातायात पुलिसकर्मियों की वसूली को रोकने के लिए इस तरकीब और तकनीक का प्रयोग करने का फैसला लिया गया था। कुछ दिन तक कैमरों को इस्तेमाल भी हुआ, लेकिन धीरे धीरे कैमरे दरोगा और सिपाहियों के कंधे से गायब हो गए हैं। अब बिना कैमरे के ही चेकिंग चल रही है।
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दरोगा और सिपाहियों ने कैमरे तो हटा दिए हैं। साथ ही अफसरों की ओर से भी इन पर कोई सख्त नजर नहीं रखी जा रही है। सोमवार को अमर उजाला टीम की पड़ताल में दिल्ली रोड पर मानसरोवर कालोनी तिराहा, फव्वारा चौक, पीलीकोठी चौराहा, कांठ रोड पर पीएसी तिराहा और कांठ रोड पर अकबर किले के पास वाहन चेकिंग की जा रही थी, लेकिन यहां पुलिस कर्मियों ने बॉडी वार्म कैमरा नहीं लगा रखा था।
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इसलिए लिया था फैसला
28 जून 2021 को मझोला थानाक्षेत्र में हाईवे पर हादसा हो गया था। यहां पिकअप वाहन में बस ने टक्कर मार दी थी। इस हादसे में यातायात पुलिस के सिपाही समेत चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 19 लोग घायल हो गए थे। पुलिस जांच में सामने आया था कि हादसा यातायात पुलिस के इंस्पेक्टर धर्मेंद्र सिंह राठौर और उनकी टीम के कारण हुआ था। टीम ने पिकअप वाहन को वसूली के लिए रोका था और इसी दौरान बस आ गई थी। इस हादसे के बाद यातायात विभाग की काफी फजीहत हुई थी। इस मामले में टीआई धर्मेंद्र सिंह राठौर, तीन सिपाही और दो होमगार्ड के खिलाफ गैर इरादतन हत्या, अवैध वसूूूली की धाराओं में केस दर्ज किया गया था। पुलिस ने आरोपियों को जेल भेज दिया है। जमानत पर रिहा होने के बाद टीआई को बहाल कर दिया गया। एसपी यातायात अशोक कुमार ने बताया कि टीआई धर्मेंद्र सिंह राठौर का तबादला लखनऊ हो गया है। वह यहां से रवानगी कराकर चला गया है। इस हादसे के अलावा भी यातायात पुलिस पर आरोप लगते थे कि चेकिंग के नाम पर लोगों से अवैध वसूली और अभद्रता की जाती है।
यातायात पुलिस में अधिकारी व कर्मचारियों की तैनाती
- एसपी- एक
- सीओ- एक
- टीआई- दो
- टीएसआई- ग्यारह
- हेड कांस्टेबल- 28
- सिपाही- 55
- पीआरडी- 50
- होमगार्ड- 150
यातायात पुलिस के पास दस बॉडी वार्म कैमरे
मुरादाबाद। एसपी यातायात अशोक कुमार ने बताया कि पुलिस के पास दस बॉडी वार्म कैमरे हैं। करीब चार साल से ये कैमरे हैं। उन्होंने बताया कि पांच कैमरे कुंभ मेले की ओर से मुरादाबाद पुलिस को दिए गए थे। एक कैमरा यातायात मुख्यालय से भेजा गया था। जबकि चार कैमरे मुरादाबाद यातायात पुलिस की ओर से खरीदे गए हैं। वाहन चेकिंग के दौरान इस कैमरों का इस्तेताल किया जाता है। अगर कहीं लापरवाही की जा रही है तो चेकिंग कराकर कार्रवाई की जाएगी।