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Moradabad News: सर्किल रेट से किराया निर्धारण का व्यापारियों ने किया विरोध

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 13 Sep 2025 02:29 AM IST
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Traders opposed the fixation of rent based on circle rate
मुरादाबाद। नगर निगम की दुकानों का किराया निर्धारण एक बार फिर विवादों में है। निगम की ओर से सर्किल रेट के आधार पर किराया तय करने के प्रस्ताव को व्यापारियों ने सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि इस फार्मूले से मौजूदा किराया असामान्य रूप से बढ़ जाएगा और दशकों से दुकान चला रहे छोटे-बड़े व्यापारी बुरी तरह प्रभावित होंगे। व्यापारी संगठनों ने शुक्रवार को बैठक कर महापौर और कमिश्नर से मिलकर आपत्ति दर्ज कराने का निर्णय लिया है।बृहस्पतिवार को अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह की अध्यक्षता में किराया निर्धारण करने वाली समिति की पहली बैठक हुई थी। इसमें प्रस्ताव रखा गया कि दुकानों का नया किराया वर्ष 2025-26 के सर्किल रेट के आधार पर तय किया जाए। अधिकारियों का कहना था कि इससे निगम की आय में इजाफा होगा और पारदर्शिता भी आएगी। लेकिन बैठक में मौजूद पार्षदों ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया था। अब व्यापारियों ने भी इसका विरोध किया है।
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व्यापारी सुरक्षा फोरम के मंडल अध्यक्ष विजय मदान ने कहा कि सर्किल रेट से किराया निर्धारण का कोई औचित्य नहीं है। अभी जिन दुकानों का किराया 300, 400 या 500 रुपये मासिक है वह 50 गुना तक बढ़कर दस से 12 हजार रुपये हो जाएगा। यह कहां से जायज है। व्यापारियों ने प्रस्ताव दिया था कि अगर लंबे समय से किराया नहीं बढ़ा है तो उसे तार्किक ढंग से बढ़ाया जाए। लेकिन सर्किल रेट पर किराया तय करना किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस संदर्भ में संगठन महापौर से मिलकर अपना पक्ष रखेगा।
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संगठन के महामंत्री नितिन राज का कहना है कि व्यापारियों को इस प्रस्ताव पर गंभीर आपत्ति है। संगठन कमिश्नर से मिलकर अपना पक्ष रखेगा। निगम को समझना चाहिए कि मौजूदा परिस्थितियों में कारोबार पहले से ही मुश्किल दौर से गुजर रहा है। ऐसे में अचानक 50 गुना किराया बढ़ा देना व्यापार को प्रभावित करेगा। वहीं व्यापारी नेता योगेश आनंद ने कहा कि सर्किल रेट लागू होने से किराया इतना बढ़ जाएगा कि व्यापारी वर्ग इसे किसी भी हालत में वहन नहीं कर पाएगा। सभी दुकानदार 40-50 साल पुराने हैं। हर तरह के व्यापारी इन दुकानों से अपना गुजर-बसर कर रहे हैं। किराये में दस साल के अंतराल पर महज साढ़े 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी होनी चाहिए। निगम को अपनी आय बढ़ाने के लिए अन्य विकल्प तलाशने चाहिए।
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