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दर्ज एफआईआर के खिलाफ तीन ग्राम पंचायत सचिव पहुंचे हाईकोर्ट
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मुरादाबाद। प्रशासकों के कार्यकाल में हुए घोटाले के मामले में दर्ज कराई गई एफआईआर को तीन पंचायत सचिवों ने हाईकोर्ट इलाहाबाद में चुनौती दी है। इन तीनों सचिवों के खिलाफ विकास खंड भगतपुर टांडा की तीन ग्राम पंचायतों में प्रशासकों के कार्यकाल विकास कार्य में अनियमितता बरतने व गबन आदि के आरोप में डीपीआरओ द्वारा एफआईआर दर्ज कराई गई है। दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होगी।
विकास खंड भगतपुर टांडा की ग्राम पंचायत देवापुर मुस्तकम, चांदपुर व बहेड़ी के तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव विनय आशीष, ग्राम पंचायत लालूवाला के तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव पुष्पेंद्र तथा ग्राम पंचायत बुढ़नपुर की तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव तरन्नुम आरा और तत्कालीन सहायक विकास अधिकारी पंचायत चंद्रपाल सिंह के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। यह रिपोर्ट डीएम के आदेश पर की गई जांच आख्या में टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने, शासकीय धन का गबन करने के आरोप में डीपीआरओ आलोक कुमार प्रियदर्शी ने थाना भोजपुर में दर्ज कराई थी। इस एफआईआर को विनय आशीष व दो अन्य ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर विधि विरुद्ध बताते हुए चुनौती दी है। जिस पर शुक्रवार को हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ सुनवाई करेगी।
इससे पहले ब्लॉक कुंदरकी के थाना मैनाठेर और कुंदरकी में भी तत्कालीन प्रशासकों के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, लेकिन यह दोनों ही याचिकाएं खारिज हो गईं।
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विकास खंड भगतपुर टांडा की ग्राम पंचायत देवापुर मुस्तकम, चांदपुर व बहेड़ी के तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव विनय आशीष, ग्राम पंचायत लालूवाला के तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव पुष्पेंद्र तथा ग्राम पंचायत बुढ़नपुर की तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव तरन्नुम आरा और तत्कालीन सहायक विकास अधिकारी पंचायत चंद्रपाल सिंह के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। यह रिपोर्ट डीएम के आदेश पर की गई जांच आख्या में टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने, शासकीय धन का गबन करने के आरोप में डीपीआरओ आलोक कुमार प्रियदर्शी ने थाना भोजपुर में दर्ज कराई थी। इस एफआईआर को विनय आशीष व दो अन्य ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर विधि विरुद्ध बताते हुए चुनौती दी है। जिस पर शुक्रवार को हाईकोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ सुनवाई करेगी।
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इससे पहले ब्लॉक कुंदरकी के थाना मैनाठेर और कुंदरकी में भी तत्कालीन प्रशासकों के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, लेकिन यह दोनों ही याचिकाएं खारिज हो गईं।
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