मुरादाबाद: कागजों पर सिमट कर रह गई जोन व्यवस्था, पुल पर ध्वस्त हुई योजना, सुबह से लेकर शाम तक जूझते हैं राहगीर
मुरादाबाद के डबल फाटक पुल पर लगातार जाम की समस्या बनी हुई है। पुल से उतरते ही अवैध ई-रिक्शा और ऑटो स्टैंड सड़क घेरकर खड़े हो जाते हैं, जिससे ट्रैफिक रेंगने लगता है। यातायात पुलिस की मौजूदगी के बावजूद स्थिति पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा।
विस्तार
डबल फाटक पुल पर जाम की समस्या सिर्फ पुल की चौड़ाई और ट्रैफिक दबाव तक सीमित नहीं है बल्कि प्रशासन की लापरवाही भी जाम लगने का सबसे अहम कारण है। पुल से उतरते ही अवैध रूप से संचालित हो रहे ई-रिक्शा और ऑटो स्टैंड जाम लगने का सबसे बड़ी वजह हैं।
ई-रिक्शा और ऑटो चालक सवारी के इंतजार में सड़क घेरकर खड़े हो जाते हैं जिससे सड़क और भी तंग हो जाती है और ट्रैफिक रेंगने लगता है। सुबह और शाम के समय यह स्थिति बद से बदतर हो जाती है। यातायात विभाग के सिपाहियों की मौजूदगी के बावजूद इस अव्यवस्था पर लगाम नहीं लग पा रही है।
कई बार पुलिस इन्हें हटाती है लेकिन कुछ देर बाद फिर से वही हालात बन जाते हैं। परिणाम यह है कि डबल फाटक पुल का जाम अब रोज का दर्द बन चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले वर्ष यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए शहर में ई-रिक्शा के के संचालन के लिए पांच जोन निर्धारित किए गए थे।
निर्णय के तहत जिस ई-रिक्शा का पंजीकरण जिस पते पर होगा उसी जोन में वह ई-रिक्शा चल सकता है। यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई थी ताकि शहर के मुख्य मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव कम हो और जाम की समस्या से कुछ हद तक राहत मिले।
जोनवार रोस्टर के अनुसार डबल फाटक क्षेत्र जोन-पांच में आता है। यहां इसी जोन के ई-रिक्शे संचालित होने चाहिए लेकिन हकीकत इसके उलट है। पुल पर किसी भी जोन के ई-रिक्शे फर्राटा लगाते हुए मिल जाएंगे।
यातायात विभाग के सिपाही पूरे दिन यहां तैनात रहते हैं लेकिन व्यवस्था लागू करा पाने में वह भी नाकाम साबित हुए हैं। नतीजतन पुल पर हर रोज काफी लंबा जाम लग रहा है जिससे हजारों की आबादी रोजाना परेशान हो रही है।
पंजीकरण से ज्यादा दौड़ रहे ई-रिक्शे
शहर में करीब 16 हजार के आसपास की संख्या में ई-रिक्शा पंजीकृत हैं जबकि सड़कों पर 20 हजार के करीब ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। यानी करीब चार से पांच हजार ई-रिक्शा बगैर पंजीकरण के ही सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
ग्रामीण और दूसरे शहर के भी ई-रिक्शा धड़ल्ले से शहर में फर्राटा भर रहे हैं। कई ई-रिक्शा व ऑटो चालकों को जोनवार व्यवस्था के बारे में ही नहीं मालूम है।
ई-रिक्शा चालक शोभित, आदिल और हारून समेत अधिकतर ई-रिक्शा चालकों को यह तक पता नहीं कि जोनवार व्यवस्था लागू है। उनका कहना है कि वह तो जहां सवारी मिलती है वहीं रुकते हैं। किस जोन में चलना है ये कभी बताया ही नहीं गया है।
क्या बोले पीड़ित
पुल से उतरते ही ई-रिक्शा वाले लाइन बनाकर खड़े रहते हैं यह सबसे बड़ी समस्या है। इससे सड़क आधी रह जाती है और जाम लगना तय हो जाता है। पुलिस हटाती है तो पांच मिनट में ही फिर से वही हाल हो जाता है। अगर यहां स्टैंड न लगे तो आधा जाम खत्म हो जाएगा। - विपिन पंडित, लाइनपार
रिक्शा चालकों को कोई डर नहीं है। कहीं भी रोक लेते हैं। बीच पुल पर ही वह रुक जाते हैं। जोनवार व्यवस्था बनी है तो उसे लागू भी कराना चाहिए। जाम लगने से सभी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। - अब्दुल रशीद अंसारी, पाकबड़ा
स्कूल की छुट्टी का समय हो या फिर दफ्तरों की छुट्टी का वक्त। पुल पार करना सबसे मुश्किल होता है। ई-रिक्शा वाले बच्चों को देखकर वहीं रुक जाते हैं। ट्रैफिक आगे बढ़ता ही नहीं। स्कूल छूटने पर अतिरिक्त यातायात सिपाहियों की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए ताकि व्यवस्था कुछ बेहतर हो। - नबी हसन, धनपुरा
क्यों जाम का शिकार होते हैं राहगीर
- पुल से उतरते ही ई-रिक्शा चालक सवारी के इंतजार में लेन को घेर लेते हैं।
- इससे वाहन आगे नहीं बढ़ पाते और जाम की लंबी लाइन लग जाती है।
- स्टेशन और बस अड्डा जाने का ट्रैफिक पहले से भारी रहता है।
- पुराने शहर की ओर जाने वाले वाहन भी यहीं से गुजरते हैं।
- गलत दिशा से आकर घुसने वाले वाहन स्थिति को और बिगाड़ देते हैं।
इससे जाम पर पाया जा सकता है काबू
- ई-रिक्शा जोन व्यवस्था लागू हो।
- पुल से उतरते ही ऑटो-ई-रिक्शा स्टैंड पूरी तरह प्रतिबंधित हो।
- सड़क किनारे सख्ती से चालान और जब्ती अभियान चले।
- पीक आवर में अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस तैनात हों।
- अवैध और बाहरी ई-रिक्शा को शहर सीमा में रोका जाए।
ई-रिक्शा के संचालन के लिए बनाई गई जोन व्यवस्था
जोन एक: लाइनपार, मानसरोवर कॉलोनी, प्रकाश नगर, रामलीला मैदान, कुंदनपुर, विकास नगर, हनुमान नगर, चाऊ की बस्ती, एकता कॉलोनी, ढक्का, पैपटपुरा, जयंतीपुर, पीर का बाजार, करूला, पुतली घर रोड, चौहानों वाली मिलक।
जोन दो: बुद्धि विहार, कांशीराम नगर, मिलन विहार, खुशहालपुर, बुद्धा पार्क, शाहपुर तिगरी, सम्राट अशोक नगर, प्रीत विहार, चंद्र नगर, आवास विकास पीलीकोठी, रेलवे कॉलोनी, केंद्रीय विद्यालय, आदर्श कॉलोनी, हिमगिरी कॉलोनी, हरथला, रेलवे हरथला कॉलोनी, मोरा की मिलक।
जोन तीन: पुलिस अकादमी, पुलिस लाइन, जिगर कॉलोनी, बंगलागांव, दौलत बाग, चक्कर की मिलक, पुराना आरटीओ ऑफिस, कचहरी, नवीन नगर, रामगंगा विहार, आशियाना कॉलोनी, मौरा, साईं मंदिर, वेव सिटी, टीडीआई सिटी, दीनदयाल नगर।
जोन चार: इंपीरियल तिराहा, बुधबाजार, मानपुर, कटरा नाज, अमरोहा गेट, मंडी चौक, संभली गेट, हैलेट रोड, बाजार गंज, टाउन हाल, बर्तन बाजार, सराफा बाजार, पारकर रोड, कंजरी सराय, गुहरट्टी चौराहा, जेल रोड, जैन मंदिर रोड, कंपनी बाग, बरादरी, मंडी चौक, दीवान का बाजार, लाल बाग, तहसील स्कूल, एस कुमार, रेती स्ट्रीट, फैज गंज, पीरगैब, जीआईसी चौराहा, जामा मस्जिद चौराहा, ताजपुर माफी, किसरौल, कानून गोयन, नवाबपुरा।
जोन पांच: बरवालान, गुलाबबाड़ी, अटल घाट, कटघर रेलवे स्टेशन, मकबरा, लाजपत नगर नगर, संभल चौराहा, गांधी नगर, पीरजादा, ईदगाह,, असालतपुरा, प्रिंस रोड, इंद्रा चौक, लंगड़े की पुलिया, भूड़े का चौराहा ।