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Moradabad News: जिले में 10 फीसदी घट गई पशुओं की संख्या

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 02 Jan 2026 12:52 AM IST
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The number of livestock in the district has decreased by 10 percent.
अमरोहा। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार भले की गई योजनाओं का क्रियान्वयन कर रही हो, लेकिन इसके बाद भी किसानों का मोह पशुपालन की और नहीं हो रहा है। 21वीं पशु गणना के आंकड़े तो यही कह रहे हैं। इसके अनुसार जिले में पशुओं की संख्या में करीब 10.74 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। इसके तहत गोवंशीय पशुओं की संख्या में 86557 ताे महिषवंशीय पशुओं की संख्या में 21094 की कमी पिछली पशुगणना के सापेक्ष दर्ज हुई है।
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पशुओं की स्थिति जानने के लिए सरकार समय-समय पर पशु गणना कराती है। पिछली बार साल 2019 में पशु गणना कराई गई थी। गोवंश बढ़ाने और उसके संरक्षण के लिए सरकार नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत मुख्यमंत्री स्वदेशी गो संवर्धन योजना, गोशाला संचालकों के लिए अनुदान योजना और गोवंश सहभागिता जैसी विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। बावजूद इसके पशुपालन से लोग मुंह मोड़ रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक 20वीं पशुगणना में जिले में गोवंशों की संख्या 244056 थी, जबकि 21वीं पशुगणना में यह संख्या 157499 पर पहुंच गई है। इसी तरह महिषवंशीय पशुओं की संख्या 20वीं पशु गणना में 508490 थी, जोकि 21वीं पशु गणना में 487396 पर आ गई है।
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जिले में होता है 25 गोशालाओं का संचालन, दो का निर्माण अंतिम चरण में
गोवंशीय पशुओं के संरक्षण के लिए पशुपालन विभाग द्वारा जिले में 25 गोशालाओं का संचालन किया जा रहा है। जिसमें 5106 गोवंशीय पशु संरक्षित किए गए हैं। इसके अलावा बरखेड़ा राजपूत समेत दो अन्य गोशालाओं का निर्माण भी अंतिम चरण में है। सीवीओ ने बताया कि सहभागिता योजना के तहत कई किसानों को गोवंशीय पशु दिए भी गए हैं।
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69295 है बकरियों की संख्या
पशुगणना के अनुसार जिले में बकरियों की संख्या 69295 है। जोकि 20वीं पशुगणना में 73993 थी। इसके अलावा सूकरों की संख्या 1914, घोड़े 691, व भेड़ों की संख्या 1030 दर्ज की गई है।
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क्या कहते हैं किसान
पशुओं के लिए चारे का संकट उनको पालने में आड़े आ रहा है। खेतों में छुट्टा पशु फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। जिससे चारे की समस्या बनी रहती है। इससे पशु पालने के लिए पशुपालकों का रुझान कुछ कम हो रहा है।
- सुधा, पशुपालक, पपसरा बंगर
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चारे के अलावा पशु आहार भी महंगा हो रहा है। खर्च तो बढ़ रहा है, लेकिन दूध के दाम अपेक्षित नहीं मिल पाते। इससे पशुपालकों का रुझान पशुओं की ओर से कम होता जा रहा है। - कुलदीप सिंह, कमेलपुर


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पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पशुओं की गणना के लिए अभियान चलाया गया था। जिसमें पशुओं की कमी होना निश्चित ही चिंता का विषय है। 21वीं पशुगणना में गोवंश और महिषवंश की संख्या घटी है। सूचना शासन को भेज दी गई है। लोगों को जागरूक करते हुए पशुपालन से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
- डॉ. आभा दत्त, सीवीओ
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