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Moradabad News: मनरेगा को खत्म करने के मंसूबे को पूरा नहीं होने देगी मजदूर यूनियन
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मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन का तीन दिवसीय सम्मेलन सिविल लाइंस स्थित आंबेडकर पार्क में शनिवार से शुरू हुआ जिसमें केंद्र व प्रदेश सरकार की नीतियों की जमकर आलोचनाएं की गईं। वक्ताओं ने केंद्र व प्रदेश सरकार को दलित, महिला, आदिवासी और अल्पसंख्यक विरोधी बताया। कहा कि संगठन दोनों ही सरकारों के खिलाफ संगठित होकर संघर्ष करेगा। इस सम्मेलन में प्रदेश के अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में पदाधिकारी शामिल हुए हैं।
सम्मेलन के पहले दिन यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी. वेंकट ने कहा कि यूपीए-प्रथम की सरकार ने वामपंथी दलों के दबाव में ग्रामीण मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए महात्मा गांधी रोजगार गारंटी (मनरेगा) योजना बनाई थी। इसमें भूमिहीन मजदूरों को 200 दिन के काम की मांग के साथ कम से कम 100 दिन के रोजगार की व्यवस्था की गई थी लेकिन वर्तमान सरकार ने इस योजना का मूल स्वरूप खत्म करने के उद्देश्य से इसे बदल दिया है। यह सिर्फ एक धोखा है। उन्होंने कहा कि खेत मजदूर यूनियन सरकार के इस मंसूबे को पूरा नहीं होने देगी।
वेंकट ने कहा कि एकमात्र केरल की सरकार खेत मजदूरों को सीमित संसाधनों के चलते 864 रुपये दैनिक मजदूरी देती है। उन्होंने इसी मॉडल को देशभर में लागू कराने के लिए आवाज उठाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार कार्पोरेट मित्रों को देश की सार्वजनिक संपदा को बेच रही है या मुफ्त में देने की कोशिशें कर रही है। राष्ट्रीय सचिव विक्रम सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में खेत मजदूर, दलित और आदिवासियों की हालत बहुत दयनीय है। दलितों पर सबसे अधिक हमले गुजरात, मध्यप्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में हो रहे हैं जिनके खिलाफ खेत मजदूर, किसान, मजदूर, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यकों का संगठन आंदोलन खड़ा करेगा तब ही ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों की रक्षा हो पाएगी।
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प्रदेश अध्यक्ष सतीश कुमार, महासचिव बृजलाल भारतीय और राजीव शांत ने भी केंद्र व प्रदेश सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। सम्मेलन की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष शाकिर हुसैन ने की जबकि संचालन प्रदेश उपाध्यक्ष थान सिंह ने किया। इस मौके पर किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव चंद्रपाल सिंह भाटी, एआईएलयू के प्रदेश सचिव विक्रम सिंह, सीटू के प्रदेश सचिव डॉ. विकास स्वरूप, जनवादी नौजवान सभा के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी) के राज्य सचिव मंडल के सदस्य अखिल विकल्प समेत कई लोग मौजूद रहे।
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सम्मेलन के पहले दिन यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी. वेंकट ने कहा कि यूपीए-प्रथम की सरकार ने वामपंथी दलों के दबाव में ग्रामीण मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए महात्मा गांधी रोजगार गारंटी (मनरेगा) योजना बनाई थी। इसमें भूमिहीन मजदूरों को 200 दिन के काम की मांग के साथ कम से कम 100 दिन के रोजगार की व्यवस्था की गई थी लेकिन वर्तमान सरकार ने इस योजना का मूल स्वरूप खत्म करने के उद्देश्य से इसे बदल दिया है। यह सिर्फ एक धोखा है। उन्होंने कहा कि खेत मजदूर यूनियन सरकार के इस मंसूबे को पूरा नहीं होने देगी।
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वेंकट ने कहा कि एकमात्र केरल की सरकार खेत मजदूरों को सीमित संसाधनों के चलते 864 रुपये दैनिक मजदूरी देती है। उन्होंने इसी मॉडल को देशभर में लागू कराने के लिए आवाज उठाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार कार्पोरेट मित्रों को देश की सार्वजनिक संपदा को बेच रही है या मुफ्त में देने की कोशिशें कर रही है। राष्ट्रीय सचिव विक्रम सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में खेत मजदूर, दलित और आदिवासियों की हालत बहुत दयनीय है। दलितों पर सबसे अधिक हमले गुजरात, मध्यप्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में हो रहे हैं जिनके खिलाफ खेत मजदूर, किसान, मजदूर, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यकों का संगठन आंदोलन खड़ा करेगा तब ही ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों की रक्षा हो पाएगी।
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प्रदेश अध्यक्ष सतीश कुमार, महासचिव बृजलाल भारतीय और राजीव शांत ने भी केंद्र व प्रदेश सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। सम्मेलन की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष शाकिर हुसैन ने की जबकि संचालन प्रदेश उपाध्यक्ष थान सिंह ने किया। इस मौके पर किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव चंद्रपाल सिंह भाटी, एआईएलयू के प्रदेश सचिव विक्रम सिंह, सीटू के प्रदेश सचिव डॉ. विकास स्वरूप, जनवादी नौजवान सभा के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी) के राज्य सचिव मंडल के सदस्य अखिल विकल्प समेत कई लोग मौजूद रहे।