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Moradabad News: किसानों के लिए वरदान थी कोसी... अब पानी को तरस रही

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jun 2026 01:58 AM IST
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The Kosi was a boon for farmers... now, it is starved of water.
मुरादाबाद। उत्तराखंड में कुमाऊं क्षेत्र की वादियों से निकलकर कोसी नदी मुरादाबाद जिले में लगभग 16 किलोमीटर की यात्रा तय करके करीब 1.5 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित करती है। बीते करीब तीन दशकों से यह नदी भारी अतिक्रमण की चपेट में है। खासकर मूंढापांडे और भोजपुर के करीब 25 से अधिक गांवों के लिए वरदान कही जाने वाली इस नदी में अब मूंढापांडे क्षेत्र में ही कहीं-कहीं पानी दिखता है।
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कोसी रामगंगा की सहायक नदी है, जो बरसात के मौसम में कभी-कभी बाढ़ का कारण भी बन जाती है। चार साल पहले भी बाढ़ की स्थिति बनी थी। एक बड़ा भूभाग जलमग्न हो गया था, गांवों को खतरा उत्पन्न हो गया था। बाढ़ खंड की ओर नदी में कई स्थानों पर पत्थरों व अन्य संसाधनों से पिचिंग का कार्य भी किया जाता है। बाढ़ राहत कार्यों में इस नदी को भी जिला प्रशासन अपनी कार्य योजना में शामिल करता है लेकिन अन्य नदियों की भांति यह नदी विलुप्त नदियों की ही श्रेणी में शामिल हो गई है।
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सिर्फ बारिश में ही यह उफान पर आती है, शेष दिनों में सूखी रहती है या फिर पानी बहुत कम रहता है। आसपास के लोग यहां खेती करने लग गए हैं। जिससे नदी की धारा ही टूट गई है। बाढ़ खंड को सिर्फ बाढ़ के दौरान ही इसकी याद आती है। राजस्व विभाग को इस पर अतिक्रमण देखने की फुर्सत नहीं है, सिंचाई विभाग भी इस पर ध्यान नहीं देता है।
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जैतपुर बिसाहट के जोगराज सिंह बताते हैं कि मूंढापांडे क्षेत्र में खबड़िया भूड़ तक कई गांवों के आसपास से गुजरती हुई यह नदी रामपुर जिले के शाहबाद की ओर जाती है। पहले तो इसकी चौड़ाई सौ मीटर से भी अधिक हुआ करती थी लेकिन अब कहीं-कहीं तो 10 मीटर से भी कम रह गई है। भैया नगला गांव के सर्वेश कुमार सिंह ने बताया कि यह नदी विशेषकर मूंढापांडे और भोजपुर ब्लॉक के पास से बहती है।
भारी बारिश और जलस्तर बढ़ने पर कई बार नदी उफान पर आ जाती है। जिससे कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं। कोसी नदी के कारण बाढ़ से रनियाढेर, हीरापुर, गद्दीखेड़ा, हरपाल नगर, और खाईखेरा जैसे दर्जनों गांव प्रभावित होते हैं। नदी का पानी खेतों में घुसने से किसानों की धान व अन्य फसलें बर्बाद हो जाती हैं। जलस्तर बढ़ने के कारण कई संपर्क मार्ग भी पहले टूट चुके हैं। कभी-कभी पानी लखनऊ-मुरादाबाद नेशनल हाईवे पर गणेशपुर घाट तक भी आ जाता है लेकिन नदी पर भारी अतिक्रमण है।
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कौसानी से निकलकर शाहबाद में यात्रा पूरी करती है कोसी
उत्तराखंड की वादियों में कौसानी के निकट धारापानी धारा से निकलकर कोसी दक्षिण दिशा की ओर बढ़ती है। सोमेश्वर, अल्मोड़ा होते हुए ख्वारब पहुंचती है। जहां सुयाल नदी को अपने में समाहित करके रुख पश्चिमी दिशा की ओर करती है। खैरना, गरमपानी और कैंची और ढिकुली होते हुए रामनगर से यह मैदानी क्षेत्रों का रुख करती है। यहां से सुल्तानपुर जाकर उत्तर प्रदेश में आती है। इसके बाद रामपुर जिले की बाईं ओर से निकलकर मुरादाबाद जिले में मूंढापांडे क्षेत्र में प्रवेश करती है। यहां से फिर रामपुर के शाहबाद क्षेत्र में चमरौल गांव के रामगंगा में मिलकर अपनी यात्रा को विराम देती है।

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कोसी नदी खासकर मूंढापांडे क्षेत्र में बहती है। बाढ़ के दौरान यहां पिचिंग होती है। बारिश के दिनों में ही इसमें पानी आता है। बाढ़ खंड कोसी के साथ-साथ रामगंगा व अन्य नदियों में भी बाढ़ की स्थिति पर नजर रखता है।
राजेश कुमार गंगवार, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड
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