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Moradabad News: कई स्वास्थ्य उपकेंद्रों की ही सेहत खराब, कैसे मिले इलाज
Sat, 26 Jul 2025 02:29 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Sat, 26 Jul 2025 02:29 AM IST
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बिलारी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिलारी के अधीन संचालित 48 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में से अधिकतर पर ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं । कई उपकेंद्रों के भवन जर्जर हैं तो कई पर पर्याप्त उपकरण और दवाएं नहीं हैं। एएनएम विहीन स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर व्यवस्थाएं आधी अधूरी हैं। ग्रामीणों की मांग के बावजूद स्वास्थ्य विभाग उपकेंद्रों से ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं करा पा रहा है।
ब्लॉक बिलारी की 98 ग्राम पंचायतों में चार पीएचसी स्योंडारा, जरगांव, नवैनी गददी और मोहम्मद इब्राहीमपुर, 48 स्वास्थ्य उपकेंद्र तथा 32 आयुष्मान आरोग्य केंद्र हैं। देहात के लोग बीमार होने पर सबसे पहले निकट के स्वास्थ्य उपकेंद्र पर इस उम्मीद से जाते हैं कि उन्हें तत्काल बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल जाएंगी। ग्रामीण गर्भवती महिलाओं को भी गर्भावस्था के दौरान जांच कराने और स्वास्थ्य सलाह लेने के लिए स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर ही जाना पड़ता है।
जनता की उम्मीद के हिसाब से अलग अलग वजह के चलते उपकेंद्रों से तत्काल बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पाती हैं।अधिकतर उपकेंद्रों के भवन आबादी के किनारे जंगल में बने हुए हैं। रात्रि में उपकेंद्रों पर रोशनी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से एएनएम रात को उपकेंद्रों पर नहीं रुकती हैं। उपकेंद्र भवनों से कई बार असामाजिक तत्व उपकरण और अन्य कीमती सामान ले जाते हैं। एएनएम के सहयोग के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा आशा वर्कर को लगाया गया है लेकिन वह भी कभी कभार ही स्वास्थ्य उपकेंद्र पर जाती हैं। उपकेंद्र भवनों की नियमित सफाई की कोई व्यवस्था न होने से उपकेंद्र परिसरों में घास खड़ी है।
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बृहस्पतिवार को अहलादपुर करार के उपकेंद्र भवन में एक सांप के निकल आने से स्वास्थ्य कर्मी ने भागकर जान बचाई थी। जिन उपकेंद्रों के अपने भवन नहीं है और जिन उपकेंद्रों के भवन जर्जर हैं ऐसे सभी उपकेंद्रों पर तैनात एएनएम प्रधान की चौपाल या दूसरे भवनों पर बैठकर विभागीय कार्य पूरे करने की औपचारिकता निभाती हैं।
सीएचसी बिलारी के अधीन 18 स्वास्थ्य उपकेंद्र ऐसे हैं जिन पर स्थायी एएनएम तैनात नहीं है। इन उपकेंद्रों में ग्वारखेडा, स्योंडारा, सहसपुर नई बस्ती, ढकिया नरू, रामनगर गंगपुर, खानपुर, जरगांव द्वितीय, अकरोली द्वितीय, बेहटा सरथल, चिड़िया भवन, नारायणपुर देवा, अल्लीपुर ज्योंडेरा, उमरारा, मोहम्मद इब्राहीमपुर,मंगूपुरा, पीपली, बनियाठेर और अलारामपुर शामिल हैं। एएनएम के तैनात न होने से इन उपकेंद्रों से जुड़े ग्रामों के लोगों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं लेने के लिए काफी दिक्कत हो रही है।
सीएचसी बिलारी में आने वाले ग्यारह स्वास्थ्य उपकेंद्र ऐसे हैं जिनके भवन जर्जर हैं। सीएचसी से मिली जानकारी के अनुसार चिड़िया भवन,थांवला, सफीलपुर, रूस्तमपुर,धर्मपुर कलां,बीरमपुर,मनकूला, स्योंडारा, अलारामपुर, नई बस्ती सहसपुर, ढकिया नरू स्वास्थ्य उपकेंद्र के भवन जर्जर हैं। बिलारी के दस स्वास्थ्य उपकेंद्र ऐसे हैं जिनके अपने भवन ही नहीं हैं। सीएचसी के रिकॉर्ड के अनुसार कमालपुर चंदौरा, अकरोली द्वितीय, पहाड़पुर, भिड़वारी, चांदपुर गनेश, खानुपर, मल्लपुर जन्नू,अकबरपुर और फतेहपुर नत्था के नाम से स्वास्थ्य उपकेंद्र तो स्वीकृत हैं लेकिन अभी तक उनके भवन नहीं बन पाए हैं।
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ब्लॉक बिलारी की 98 ग्राम पंचायतों में चार पीएचसी स्योंडारा, जरगांव, नवैनी गददी और मोहम्मद इब्राहीमपुर, 48 स्वास्थ्य उपकेंद्र तथा 32 आयुष्मान आरोग्य केंद्र हैं। देहात के लोग बीमार होने पर सबसे पहले निकट के स्वास्थ्य उपकेंद्र पर इस उम्मीद से जाते हैं कि उन्हें तत्काल बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल जाएंगी। ग्रामीण गर्भवती महिलाओं को भी गर्भावस्था के दौरान जांच कराने और स्वास्थ्य सलाह लेने के लिए स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर ही जाना पड़ता है।
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जनता की उम्मीद के हिसाब से अलग अलग वजह के चलते उपकेंद्रों से तत्काल बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पाती हैं।अधिकतर उपकेंद्रों के भवन आबादी के किनारे जंगल में बने हुए हैं। रात्रि में उपकेंद्रों पर रोशनी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से एएनएम रात को उपकेंद्रों पर नहीं रुकती हैं। उपकेंद्र भवनों से कई बार असामाजिक तत्व उपकरण और अन्य कीमती सामान ले जाते हैं। एएनएम के सहयोग के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा आशा वर्कर को लगाया गया है लेकिन वह भी कभी कभार ही स्वास्थ्य उपकेंद्र पर जाती हैं। उपकेंद्र भवनों की नियमित सफाई की कोई व्यवस्था न होने से उपकेंद्र परिसरों में घास खड़ी है।
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बृहस्पतिवार को अहलादपुर करार के उपकेंद्र भवन में एक सांप के निकल आने से स्वास्थ्य कर्मी ने भागकर जान बचाई थी। जिन उपकेंद्रों के अपने भवन नहीं है और जिन उपकेंद्रों के भवन जर्जर हैं ऐसे सभी उपकेंद्रों पर तैनात एएनएम प्रधान की चौपाल या दूसरे भवनों पर बैठकर विभागीय कार्य पूरे करने की औपचारिकता निभाती हैं।
सीएचसी बिलारी के अधीन 18 स्वास्थ्य उपकेंद्र ऐसे हैं जिन पर स्थायी एएनएम तैनात नहीं है। इन उपकेंद्रों में ग्वारखेडा, स्योंडारा, सहसपुर नई बस्ती, ढकिया नरू, रामनगर गंगपुर, खानपुर, जरगांव द्वितीय, अकरोली द्वितीय, बेहटा सरथल, चिड़िया भवन, नारायणपुर देवा, अल्लीपुर ज्योंडेरा, उमरारा, मोहम्मद इब्राहीमपुर,मंगूपुरा, पीपली, बनियाठेर और अलारामपुर शामिल हैं। एएनएम के तैनात न होने से इन उपकेंद्रों से जुड़े ग्रामों के लोगों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं लेने के लिए काफी दिक्कत हो रही है।
सीएचसी बिलारी में आने वाले ग्यारह स्वास्थ्य उपकेंद्र ऐसे हैं जिनके भवन जर्जर हैं। सीएचसी से मिली जानकारी के अनुसार चिड़िया भवन,थांवला, सफीलपुर, रूस्तमपुर,धर्मपुर कलां,बीरमपुर,मनकूला, स्योंडारा, अलारामपुर, नई बस्ती सहसपुर, ढकिया नरू स्वास्थ्य उपकेंद्र के भवन जर्जर हैं। बिलारी के दस स्वास्थ्य उपकेंद्र ऐसे हैं जिनके अपने भवन ही नहीं हैं। सीएचसी के रिकॉर्ड के अनुसार कमालपुर चंदौरा, अकरोली द्वितीय, पहाड़पुर, भिड़वारी, चांदपुर गनेश, खानुपर, मल्लपुर जन्नू,अकबरपुर और फतेहपुर नत्था के नाम से स्वास्थ्य उपकेंद्र तो स्वीकृत हैं लेकिन अभी तक उनके भवन नहीं बन पाए हैं।