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निराकार सृष्टि के हर तत्व में विद्यमान हो सकता है : सूर्य प्रकाश
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मुरादाबाद। आर्य समाज स्टेशन रोड पर साप्ताहिक यज्ञ एवं सत्संग के तहत काशी शास्त्रार्थ एक सत्य की विजय विषय पर गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी का शुभारंभ पंडित वीरेंद्र आर्य ने राजेश नारंग और प्रभा नारंग की यजमानी में वैदिक रीति रिवाज से शुरू किया। शिवम आर्य ने महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन से ओतप्रोत भजन प्रस्तुत किया। डॉ. राम मुनि ने महर्षि दयानंद सरस्वती के अमर ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश का पाठ किया।
गोष्ठी में वानप्रस्थी कपिल मुनि ने काशी शास्त्रार्थ के संबंध में बताया। उन्होंने कहा कि काशी के आनंद बाग में वेदों में मूर्ति पूजा पर शास्त्रार्थ हुआ।
काशी के 23 विद्वान वेदों में मूर्ति पूजा है के पक्ष में थे जबकि महर्षि दयानंद सरस्वती अकेले वेदों में मूर्ति पूजा नहीं है, के पक्ष में थे। शास्त्रार्थ कई दिनों तक चलने के बाद भी काशी के विशुद्धानंद, बाल शास्त्री जैसे बड़े-बडे विद्वान यह सिद्ध न कर पाये कि चारों वेदों के अमुख मंत्र में मूर्ति पूजा का वर्णन है। महर्षि दयानंद सरस्वती ने ऋग्वेद, यजुर्वेद आदि चारों वेदों के मंत्रों से सिद्ध किया कि परमपिता परमात्मा अकाय है, निराकार है, अजन्मा है, अनंत है, निर्विकार है, अनादि है, सर्वव्यापक है। आर्य विद्वान सूर्य प्रकाश द्विवेदी ने कहा कि साकार एक स्थान विशेष तक ही सीमित रह सकता है लेकिन निराकार ही सृष्टि के हर तत्व में विद्यमान हो सकता है। इसलिए परमपिता परमात्मा का वेदों में कहीं भी साकार रूप के होने का उल्लेख नहीं है। इस मौके पर प्रधान डॉ. अभय श्रोत्रिय, मंत्री रमेश सिंह, आर्य ज्ञानेंद्र गांधी, डॉ. आलोक कुमार, अरविंद, आर्य बंधु निर्मल, आर्य राकेश कुमार, राजेश नारंग, दिनेश दीक्षित, सतीश मदान आदि मौजूद रहे।
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गोष्ठी में वानप्रस्थी कपिल मुनि ने काशी शास्त्रार्थ के संबंध में बताया। उन्होंने कहा कि काशी के आनंद बाग में वेदों में मूर्ति पूजा पर शास्त्रार्थ हुआ।
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काशी के 23 विद्वान वेदों में मूर्ति पूजा है के पक्ष में थे जबकि महर्षि दयानंद सरस्वती अकेले वेदों में मूर्ति पूजा नहीं है, के पक्ष में थे। शास्त्रार्थ कई दिनों तक चलने के बाद भी काशी के विशुद्धानंद, बाल शास्त्री जैसे बड़े-बडे विद्वान यह सिद्ध न कर पाये कि चारों वेदों के अमुख मंत्र में मूर्ति पूजा का वर्णन है। महर्षि दयानंद सरस्वती ने ऋग्वेद, यजुर्वेद आदि चारों वेदों के मंत्रों से सिद्ध किया कि परमपिता परमात्मा अकाय है, निराकार है, अजन्मा है, अनंत है, निर्विकार है, अनादि है, सर्वव्यापक है। आर्य विद्वान सूर्य प्रकाश द्विवेदी ने कहा कि साकार एक स्थान विशेष तक ही सीमित रह सकता है लेकिन निराकार ही सृष्टि के हर तत्व में विद्यमान हो सकता है। इसलिए परमपिता परमात्मा का वेदों में कहीं भी साकार रूप के होने का उल्लेख नहीं है। इस मौके पर प्रधान डॉ. अभय श्रोत्रिय, मंत्री रमेश सिंह, आर्य ज्ञानेंद्र गांधी, डॉ. आलोक कुमार, अरविंद, आर्य बंधु निर्मल, आर्य राकेश कुमार, राजेश नारंग, दिनेश दीक्षित, सतीश मदान आदि मौजूद रहे।
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