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Moradabad News: सड़क पर दम तोड़ गया बाप-बेटे का खाकी का साझा ख्वाब

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 15 Mar 2026 01:56 AM IST
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The father-son's shared dream of wearing khaki uniform died on the road.
मैनाठेर (मुरादाबाद)। दरोगा बनने का जुनून युवाओं पर कितना हावी है, इसका अंदाजा शनिवार को परीक्षा केंद्रों पर जुटे नौजवानों की तादाद से लग गया। इसी सपने को लेकर बदायूं स्थित परीक्षा केंद्र के सफर पर निकला 22 वर्षीय कौसर इम्तिहान में शामिल होने से पहले ही हादसे में दम तोड़ गया। उसके ख्वाब में साझीदार और परीक्षा केंद्र तक के सफर में दोस्त की तरह उसके हमसफर बने पिता इसरार (45) की जान भी इसी हादसे में चली गई। ग्रामीणों ने बताया कि बीएससी पास कौसर करीब पांच साल से दरोगा बनने की तैयारी कर रहा था। पिता का भी ख्वाब था कि बेटे के तन पर खाकी सजे।
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दुखों से भरी यह कहानी है मैनाठेर थाना क्षेत्र के महमूदपुर माफी गांव में रहने वाले एक परिवार की। कारपेंटर के रूप में दिन-रात मेहनत करके बच्चों को पढ़ाने वाले इसरार इसी गांव के रहने वाले थे। ग्रामीणों ने बताया कि उनके बड़े बेटे कौसर का ख्वाब था कि उसके तन पर भी खाकी वर्दी और सितारे चमकें। इसी नीयत से उसने किताबी पढ़ाई के साथ शारीरिक चुस्ती के लिए भी पांच साल पहले से अभ्यास शुरू कर दिया था। बेटे का सपना अपना मानते हुए पिता इसरार ने उसे तैयारी की पूरी छूट दी। अपने पारिवारिक पेशे की ओर कदम नहीं बढ़ाने दिए। जबकि उनका छोटा बेटा शाहरुख दिल्ली में कारपेंटर का ही काम करने लगा।
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ग्रामीणों के मुताबिक दरोगा भर्ती की परीक्षा के लिए प्रवेशपत्र आया तो पिता-पुत्र दोनों इतने उत्साह में नजर आए थे, जैसे ज्वाइनिंग लेटर आ गया हो। इसी जोश के साथ बदायूं स्थित परीक्षा केंद्र के लिए शनिवार भोर में चार बजे बाइक से दोनों ने सफर की शुरुआत की। बाइक पिता इसरार चला रहे थे, ताकि बेटे पर ड्राइविंग का दबाव न पड़े। पुलिस ने बताया कि बिसौली (बदायूं) थाने से करीब एक किलोमीटर पहले किसी अज्ञात वाहन ने बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि कौसर और इसरार बाइक से दूर जा गिरे। लहूलुहान हालत में पुलिस ने दोनों को अस्पताल पहुंचवाया लेकिन उनकी जिंदगी नहीं बचाई जा सकी। मुरादाबाद के एसपी देहात कुंवर आकाश सिंह ने बताया कि हादसा बदायूं में हुआ था, जबकि दम तोड़ने वाले पिता-पुत्र मैनाठेर क्षेत्र के रहने वाले थे।
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... थम नहीं रहे अफसरी के आंसू



ग्रामीणों ने बताया कि खाकी पहनने की कौसर की ललक में उसके पिता इसरार के साथ उसकी मां अफसरी भी शरीक थीं। परिवार का साझा सपना था कि वह दरोगा बने। रमजान के मुकद्दस महीने में परीक्षा का बुलावा परिवार के हर सदस्य की उम्मीदों को और बढ़ा रहा था। पिता-पुत्र बाइक से परीक्षा केंद्र के लिए निकले तो अफसरी बेटे की कामयाबी की दुआ के साथ इबादत में लग गईं। घर में इन दिनों ईद की तैयारी की हलचल भी शुरू हो चुकी थी। कुछ घंटे बाद घर आई खबर ने अफसरी और घर में साथ मौजूद उनकी बेटी को आंसुओं में डुबो दिया। एक झटके में बेटे और पति तो खो देने से अफसरी के आंसू थम नहीं रहे हैं।
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