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पत्नी व दिव्यांग बेटे के इलाज को बैंक से ऋण लेने के लिए कर्ज से जुटाई थी रिश्वत की रकम

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 02 Dec 2021 01:33 AM IST
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The amount of bribe was raised from the loan to take loan from the bank for the treatment of wife and disabled son
मुरादाबाद(जितेंद्र कुमार)। बढ़ती उम्र के दबाव और दिव्यांगता की मार से जूझ रहे किसान खैराती को पत्नी और दिव्यांग बेटे के इलाज की चुनौती ने तोड़ दिया था। बार-बार बिगड़ते मौसम से प्रभावित हुई फसलों ने 30 बीघा जमीन होने के बावजूद इतनी आर्थिक मदद नहीं दी, जितनी धनराशि की जरूरत पत्नी व दिव्यांग बेटे के इलाज के लिए थी। बेबस होकर खैराती ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से ऋण लेने का इरादा बनाया लेकिन सिस्टम में लगे भ्रष्टाचार के घुन ने इस सपने को भी तोड़ दिया। रिश्वत के सहारे केसीसी का सफर पूरा करने के लिए खैराती को गांव में 10 हजार रुपये का कर्ज लेना पड़ा। ऐसे हालात से टूट कर ही खैराती ने रिश्वत देते समय सीबीआई को भी भरोसे में लिया और इस कदम से बैंक प्रबंधक और दलाल गिरफ्त में आ गए।
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मूंढापांडे थानाक्षेत्र के ग्राम वीरपुर बरियार उर्फ खड़ग निवासी खैराती ने बताया कि चार बेटों में सबसे छोटा फैसल (05) करीब एक साल पहले खेत से घर लौटते समय बैलगाड़ी से गिर गया था। इस हादसे में फैसल के पैर की हड्डी टूट गई थी। इलाज पर बड़ी रकम खर्च हुई लेकिन बेटे का पैर ठीक नहीं हो पाया। बेटे को पूरी तरह पैरों पर खड़ा करने के लिए दिल्ली में उसका ऑपरेशन कराना ही इकलौता विकल्प है।
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इसके अलावा खैराती की पत्नी नूरजहां आंतों की बीमारी से जूझ रही हैं। खैराती के मुताबिक बिना ऑपरेशन नूरजहां का इलाज संभव नहीं है। दोनों के ऑपरेशन के बड़े खर्च के दबाव के कारण केसीसी से ऋण लेने का रास्ता पकड़ा लेकिन बैंक प्रबंधन ने नौ माह चक्कर लगवा कर भी केसीसी जारी नहीं किया।
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केसीसी के आवेदन के समय लालाटीकर गांव स्थित प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक शाखा से कोरोना कॉल और लॉकडाउन का बहाना बना कर लौटाया गया। खैराती का कहना है कि इस शाखा में जून 2021 में गिरीश चंद्र मैनेजर बनकर आए, जिन्होंने केसीसी के लिए ग्राम रौड़ा निवासी कयूम मास्टर से संपर्क करने के लिए कहा। जब मास्टर से संपर्क किया, तो उसने दस हजार रुपये की मांग की। आरोप है कि जब मैनेजर को यह जानकारी दी तो उन्होंने अपने लिए आठ हजार रुपये और दो हजार रुपये कयूम के लिए देने का हिसाब समझा दिया। केसीसी की जरूरत पूरी करने के लिए यह 10 हजार रुपये की रकम गांव में ही कर्ज लेकर जुटाई। इस बीच किसी से मिली सलाह पर सीबीआई को सूचना दे दी और टीम ने बैंक मैनेजर गिरीश चंद्र और कयूम मास्टर को रंगे हाथों पकड़ लिया।
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