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जांच में आ रही फर्जी शिक्षकों पर आंच
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मुरादाबाद। बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात शिक्षकों की फर्जीवाड़े की परत दर परत खुलने लगी है। पिछले एक हफ्ते में दो शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। दोनों की सेवा समाप्त कर दी गई। साथ ही एफआईआर दर्ज कराई गई। अहम यह है कि एक शिक्षक 11 साल से तो दूसरी शिक्षिका छह साल से नौकरी कर रही थी और विभाग बेखबर बना रहा।
बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी करने के मामले अब सामने आने लगे हैं, लेकिन ये मामले शिकायतों के बाद उजागर हो रहे हैं। जब तक शिकायत नहीं होती, तब तक ये शिक्षक आराम से नौकरी करते हैं। शिकायत होने पर ही ये परतें खुल रही हैं। सामान्य तौर पर नहीं। पिछले एक हफ्ते में जिले में दो ऐसे मामले सामने आए। एक मामला तब खुला जब एक व्यक्ति ने जांच की। दूसरा मामला शासन स्तर कस्तूरबा गांधी स्कूल के स्टाफ के प्रमाण पत्रों की कराई गई जांच में सामने आया। बीएसए योगेंद्र कुमार ने बताया कि हर शिकायत की जांच कराई जाती है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाती है।
केस एक
मुरादाबाद। प्राथमिक विद्यालय नया गांव कासमपुर छजलैट विकास खंड के प्रधानाध्यापक राजेंद्र कुमार मौर्या ने 29 दिसंबर 2001 को प्राथमिक विद्यालय मिलक विकनपुर ब्लाक मूंढापांडे में बतौर सहायक अध्यापक ज्वाइनिंग की थी। वह 11 साल से नौकरी कर रहे थे। कुंदरकी निवासी अफरोज अहमद अंसारी और लखनऊ निवासी तख्ते हुसैन रिजवी की शिकायत पर सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश इलाहाबाद से जांच कराई गई तो हाईस्कूल और इंटरमीडिएट अंकपत्र फर्जी पाए गए। इसके बाद प्रधानाध्यापक राजेंद्र कुमार मौर्या की नियुक्ति, नियुक्ति तिथि से समाप्त कर दी गई।
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केस दो
मुरादाबाद। पूनम पांडेय डींगरपुर कस्तूरबा गांधी विद्यालय में पिछले छह साल से प्रशिक्षक के पद पर तैनात थी। बालिकाओं को वह कंप्यूटर का प्रशिक्षण देती थीं। जून में शासन के आदेश पर कस्तूरबा गांधी में तैनात समस्त स्टाफ के अभिलेखों की जांच कराई गई। पूनम पांडेय के प्रमाणपत्रों को सत्यापन के लिए श्रीधर यूनिवर्सिटी पिलानी, जिला झुंझुनू (राजस्थान) भेजा गया था। श्रीधर यूनिवर्सिटी से भेजी गई जानकारी से पता चला कि इस सत्र में पूनम पांडेय नाम की कोई छात्रा नहीं पढ़ती थी। ऐसे ही बीएड के प्रमाणपत्र भी फर्जी पाए गए। इसके बाद उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।
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बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी करने के मामले अब सामने आने लगे हैं, लेकिन ये मामले शिकायतों के बाद उजागर हो रहे हैं। जब तक शिकायत नहीं होती, तब तक ये शिक्षक आराम से नौकरी करते हैं। शिकायत होने पर ही ये परतें खुल रही हैं। सामान्य तौर पर नहीं। पिछले एक हफ्ते में जिले में दो ऐसे मामले सामने आए। एक मामला तब खुला जब एक व्यक्ति ने जांच की। दूसरा मामला शासन स्तर कस्तूरबा गांधी स्कूल के स्टाफ के प्रमाण पत्रों की कराई गई जांच में सामने आया। बीएसए योगेंद्र कुमार ने बताया कि हर शिकायत की जांच कराई जाती है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाती है।
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केस एक
मुरादाबाद। प्राथमिक विद्यालय नया गांव कासमपुर छजलैट विकास खंड के प्रधानाध्यापक राजेंद्र कुमार मौर्या ने 29 दिसंबर 2001 को प्राथमिक विद्यालय मिलक विकनपुर ब्लाक मूंढापांडे में बतौर सहायक अध्यापक ज्वाइनिंग की थी। वह 11 साल से नौकरी कर रहे थे। कुंदरकी निवासी अफरोज अहमद अंसारी और लखनऊ निवासी तख्ते हुसैन रिजवी की शिकायत पर सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश इलाहाबाद से जांच कराई गई तो हाईस्कूल और इंटरमीडिएट अंकपत्र फर्जी पाए गए। इसके बाद प्रधानाध्यापक राजेंद्र कुमार मौर्या की नियुक्ति, नियुक्ति तिथि से समाप्त कर दी गई।
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केस दो
मुरादाबाद। पूनम पांडेय डींगरपुर कस्तूरबा गांधी विद्यालय में पिछले छह साल से प्रशिक्षक के पद पर तैनात थी। बालिकाओं को वह कंप्यूटर का प्रशिक्षण देती थीं। जून में शासन के आदेश पर कस्तूरबा गांधी में तैनात समस्त स्टाफ के अभिलेखों की जांच कराई गई। पूनम पांडेय के प्रमाणपत्रों को सत्यापन के लिए श्रीधर यूनिवर्सिटी पिलानी, जिला झुंझुनू (राजस्थान) भेजा गया था। श्रीधर यूनिवर्सिटी से भेजी गई जानकारी से पता चला कि इस सत्र में पूनम पांडेय नाम की कोई छात्रा नहीं पढ़ती थी। ऐसे ही बीएड के प्रमाणपत्र भी फर्जी पाए गए। इसके बाद उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।