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Moradabad News: पीतलनगरी पहुंचा पाकिस्तान को धूल चटाने वाला टैंक टी-55
Mon, 17 Mar 2025 01:53 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Mon, 17 Mar 2025 01:53 AM IST
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मुरादाबाद। भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक टैंक टी-55 अब पीतलनगरी की शोभा बढ़ाएगा। नगर निगम के प्रयास से पुणे स्थित सेना के कार्यालय से इसे मुरादाबाद ले आया गया है। रविवार को इसे लाने वाले वाहन से कड़ी मशक्कत के बाद उतार कर चहारदीवारी से घिरे युद्ध स्मारक स्थल परिसर में फिलहाल रख दिया गया है। अप्रैल के अंत तक युद्ध स्मारक स्थल का निर्माण काम पूरा होने के बाद इसे रंग रोगन करके स्थापित कर दिया जाएगा।
बड़े ट्राले पर रख कर लाया गया यह टैंक 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध में अपनी ताकत दिखा चुका है। नगर निगम द्वारा बुद्धि विहार में आवास विकास के कार्यालय पास बनाए जा रहे युद्ध स्मारक स्थल पर इसे स्थापित किया जाएगा। जिससे आने वाली पीढ़ी भारतीय सेना की वीरता को करीब से देख सकेगी। युद्ध स्मारक स्थल में इसके लिए बाकायदा एक फाउंडेशन बनाया जा रहा है। जहां इसे सम्मानपूर्वक रखा जाएगा। यह टैंक भारतीय सेना की सेवा से शुरू होने के बाद विशेष अनुमति से मुरादाबाद लाया गया है। नगर आयुक्त ने इसकी लिखापढ़ी कर लाने के लिए अधिकारियों को पुणे भेजा था। नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल ने बताया कि युद्ध स्मारक में टैंक टी-55 की मौजूदगी न केवल इतिहास की गवाही देगी बल्कि शहरवासियों को गर्व और प्रेरणा का अहसास भी कराएगा। युवाओं में देशभक्ति की भावना को जागृत करेगा और उन्हें भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का कार्य करेगा।
टैंक उतारने के लिए लाई गई सुपरक्रेन स्मारक स्थल पर फंसी
शनिवार रात टैंक के मुरादाबाद पहुंच जाने के बाद इसे सुबह उतार कर युद्ध स्मारक परिसर में रखने की व्यवस्था निर्माण एजेंसी द्वारा की गई थी। इसके लिए सुपर क्रेन मंगाई गई थी। लेकिन यह भारी भरकम क्रेन युद्ध स्मारक परिसर में भरी ताजी मिट्टी में इसे उतारने से पहले ही फंस गई। बुलडोजर के सहारे उसे निकालने का काफी प्रयास किया गया, लेकिन दोपहर तक नहीं निकल सकी। जिसके बाद पांच बड़ी क्रेनों को मंगाया गया। उनकी सहायता से कड़ी मशक्कत के बाद टैंक को ट्राले से उतार कर युद्ध स्मारक परिसर में रखा जा सका। इस कार्य में करीब सात घंटे लगे।
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पांच दिन लगे इसे लाने में
टैंक टी-55 पुणे स्थित सेना कार्यालय से 10 मार्च को काफी बड़े ट्राले पर लाद कर रवाना किया गया। ट्राले के चालक मुकेश ने बताया कि वहां से चालक ईश्वर ट्राले पर टैंक को लाद कर चला। नासिक में एक दिन रास्ते में रुका। 13 मार्च को वह राजस्थान पहुंचा था। वहां से चालक ईश्वर को वापस भेज दिया गया। राजस्थान से वह स्वयं उसे चलाकर लाया है। इस दौरान कई स्थानों पर रुक कर आराम भी करना पड़ा।
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बड़े ट्राले पर रख कर लाया गया यह टैंक 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध में अपनी ताकत दिखा चुका है। नगर निगम द्वारा बुद्धि विहार में आवास विकास के कार्यालय पास बनाए जा रहे युद्ध स्मारक स्थल पर इसे स्थापित किया जाएगा। जिससे आने वाली पीढ़ी भारतीय सेना की वीरता को करीब से देख सकेगी। युद्ध स्मारक स्थल में इसके लिए बाकायदा एक फाउंडेशन बनाया जा रहा है। जहां इसे सम्मानपूर्वक रखा जाएगा। यह टैंक भारतीय सेना की सेवा से शुरू होने के बाद विशेष अनुमति से मुरादाबाद लाया गया है। नगर आयुक्त ने इसकी लिखापढ़ी कर लाने के लिए अधिकारियों को पुणे भेजा था। नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल ने बताया कि युद्ध स्मारक में टैंक टी-55 की मौजूदगी न केवल इतिहास की गवाही देगी बल्कि शहरवासियों को गर्व और प्रेरणा का अहसास भी कराएगा। युवाओं में देशभक्ति की भावना को जागृत करेगा और उन्हें भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का कार्य करेगा।
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टैंक उतारने के लिए लाई गई सुपरक्रेन स्मारक स्थल पर फंसी
शनिवार रात टैंक के मुरादाबाद पहुंच जाने के बाद इसे सुबह उतार कर युद्ध स्मारक परिसर में रखने की व्यवस्था निर्माण एजेंसी द्वारा की गई थी। इसके लिए सुपर क्रेन मंगाई गई थी। लेकिन यह भारी भरकम क्रेन युद्ध स्मारक परिसर में भरी ताजी मिट्टी में इसे उतारने से पहले ही फंस गई। बुलडोजर के सहारे उसे निकालने का काफी प्रयास किया गया, लेकिन दोपहर तक नहीं निकल सकी। जिसके बाद पांच बड़ी क्रेनों को मंगाया गया। उनकी सहायता से कड़ी मशक्कत के बाद टैंक को ट्राले से उतार कर युद्ध स्मारक परिसर में रखा जा सका। इस कार्य में करीब सात घंटे लगे।
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पांच दिन लगे इसे लाने में
टैंक टी-55 पुणे स्थित सेना कार्यालय से 10 मार्च को काफी बड़े ट्राले पर लाद कर रवाना किया गया। ट्राले के चालक मुकेश ने बताया कि वहां से चालक ईश्वर ट्राले पर टैंक को लाद कर चला। नासिक में एक दिन रास्ते में रुका। 13 मार्च को वह राजस्थान पहुंचा था। वहां से चालक ईश्वर को वापस भेज दिया गया। राजस्थान से वह स्वयं उसे चलाकर लाया है। इस दौरान कई स्थानों पर रुक कर आराम भी करना पड़ा।
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