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Moradabad News: सुन्नी वक्फ बोर्ड की मुरादाबाद में दस हजार से ज्यादा संपत्तियां
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मुरादाबाद।
वक्फ बोर्ड एक्ट के संशोधन से मुरादाबाद में भी बड़ा असर देखने को मिल सकता है। यूपी में सुन्नी वक्फ बोर्ड की सबसे ज्यादा 10386 संपत्तियां मुरादाबाद में हैं जबकि यहां शिया वक्फ बोर्ड की 3603 संपत्तियां हैं। एक्ट में संशोधन के बाद इन संपत्तियों पर सरकार का सीधा दखल हो जाएगा। इससे लेकर जिला स्तर पर भी अधिकारियों से तैयारियां शुरू कर दी हैं। कुछ संपत्तियां पर विवाद चल रहा है। जिनके निस्तारण के लिए अधिकारी जुट गए हैं।
मुरादाबाद में संपत्तियां सुन्नी और शिया बोर्ड में बंटी हैं। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक यह संपत्तियां हैं। इनमें कृषि भूमि, आवास, दुकान, स्कूल और मदरसे संचालित हो रहे हैं। इनके अलावा कई जगह कब्रिस्तान में भी वक्फ की जमीन हैं। मस्जिद के लिए भी जमीन दी गई है। इन संपत्तियों से होने वाले लाभ को दीनी शिक्षा और जन कल्याण में खर्च किया जाता है। इसकी निगरानी वक्फ बोर्ड के पदाधिकारी की करते हैं लेकिन संशोधन के बाद सरकार सभी संपत्तियां का ऑडिट भी करा सकेगी। मुरादाबाद में कुछ संपत्तियां ऐसी भी हैं, जिन पर विवाद चल रहा है। इनकी सुनवाई वक्फ बोर्ड में चल रही है। एक्ट में संशोधन के बाद सभी संपत्तियां सरकारी की निगरानी में आ जाएगी।
वक्फ की जमीन को लेकर कई बार हो चुके हैं विवाद
मुरादाबाद। शहर में वक्फ की संपत्ति को लेकर कई बार मुरादाबाद में विवाद हो चुके हैं। कुछ दिन पहले ही गलशहीद क्षेत्र में असालतपुरा में एक जमीन पर कब्जे को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ था। पुलिस की जांच पड़ताल में सामने आया था कि वक्फ की जमीन को लेकर दो पक्ष भिड़े हैं। इसके पहले मुगलपुरा, नागफनी और कटघर में भी वक्फ की जमीन को लेकर मारपीट और फायरिंग की घटनाएं भी हुई थीं।
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- पहले वक्फ बोर्ड किसी भी प्रॉपर्टी को अपनी कहकर उस पर कब्जा कर लेता था लेकिन अब धारा 29 और 30 में संशोधन के बाद साबित करना होगा कि प्रॉपर्टी बोर्ड की है। वक्फ बोर्ड की मनमानी पर लगाम लगेगी और जानता को फायदा होगा।
मुमताज हुसैन, एडवोकेट।
सरकार ने अगर एक्ट में फैसले करने का निर्णय लिया है तो अच्छा ही होगा लेकिन कई मस्जिदों का खर्चा वक्फ की दुकानों के किराये से भी पूरा नहीं होता है। लोग दान करते हैं तब खर्चा पूरा हो पाता है। सरकार को इस ओर भी देखना चाहिए।
हाजी नूरुल अरेफिन शम्सी
- लोग कौम, दीनी शिक्षा व जन कल्याण के लिए अपनी जमीन वक्फ बोर्ड में देते हैं। सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। सरकार का मकसद एक समाज को दबाने का कहा है। सरकार उसी मंशा से इस एक्ट में बदलाव करना चाहती है। वक्फ बोर्ड एक्ट में किसी संशोधन की जरूरत नहीं थी। इससे मुस्लिम समाज के लोगों को नुकसान होगा।
मौलाना सैय्यद काब रशीदी, कानूनी सलाहकार, जमीयत उलेमा ए हिंद उत्तर प्रदेश
- मुरादाबाद में शिया वक्फ बोर्ड और सुन्नी वक्फ बोर्ड की संपत्तियां है। सरकार के पास सभी संपत्तियों का डाटा है। संपत्तियाें पर पूरी निगरानी की जाती है। कई किसी संपत्ति पर विवाद की बात सामने आती है तो उसका निस्तारण कराया जाता है।
दिलीप कुमार, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी
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वक्फ बोर्ड एक्ट के संशोधन से मुरादाबाद में भी बड़ा असर देखने को मिल सकता है। यूपी में सुन्नी वक्फ बोर्ड की सबसे ज्यादा 10386 संपत्तियां मुरादाबाद में हैं जबकि यहां शिया वक्फ बोर्ड की 3603 संपत्तियां हैं। एक्ट में संशोधन के बाद इन संपत्तियों पर सरकार का सीधा दखल हो जाएगा। इससे लेकर जिला स्तर पर भी अधिकारियों से तैयारियां शुरू कर दी हैं। कुछ संपत्तियां पर विवाद चल रहा है। जिनके निस्तारण के लिए अधिकारी जुट गए हैं।
मुरादाबाद में संपत्तियां सुन्नी और शिया बोर्ड में बंटी हैं। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक यह संपत्तियां हैं। इनमें कृषि भूमि, आवास, दुकान, स्कूल और मदरसे संचालित हो रहे हैं। इनके अलावा कई जगह कब्रिस्तान में भी वक्फ की जमीन हैं। मस्जिद के लिए भी जमीन दी गई है। इन संपत्तियों से होने वाले लाभ को दीनी शिक्षा और जन कल्याण में खर्च किया जाता है। इसकी निगरानी वक्फ बोर्ड के पदाधिकारी की करते हैं लेकिन संशोधन के बाद सरकार सभी संपत्तियां का ऑडिट भी करा सकेगी। मुरादाबाद में कुछ संपत्तियां ऐसी भी हैं, जिन पर विवाद चल रहा है। इनकी सुनवाई वक्फ बोर्ड में चल रही है। एक्ट में संशोधन के बाद सभी संपत्तियां सरकारी की निगरानी में आ जाएगी।
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वक्फ की जमीन को लेकर कई बार हो चुके हैं विवाद
मुरादाबाद। शहर में वक्फ की संपत्ति को लेकर कई बार मुरादाबाद में विवाद हो चुके हैं। कुछ दिन पहले ही गलशहीद क्षेत्र में असालतपुरा में एक जमीन पर कब्जे को लेकर दो पक्षों में विवाद हुआ था। पुलिस की जांच पड़ताल में सामने आया था कि वक्फ की जमीन को लेकर दो पक्ष भिड़े हैं। इसके पहले मुगलपुरा, नागफनी और कटघर में भी वक्फ की जमीन को लेकर मारपीट और फायरिंग की घटनाएं भी हुई थीं।
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- पहले वक्फ बोर्ड किसी भी प्रॉपर्टी को अपनी कहकर उस पर कब्जा कर लेता था लेकिन अब धारा 29 और 30 में संशोधन के बाद साबित करना होगा कि प्रॉपर्टी बोर्ड की है। वक्फ बोर्ड की मनमानी पर लगाम लगेगी और जानता को फायदा होगा।
मुमताज हुसैन, एडवोकेट।
सरकार ने अगर एक्ट में फैसले करने का निर्णय लिया है तो अच्छा ही होगा लेकिन कई मस्जिदों का खर्चा वक्फ की दुकानों के किराये से भी पूरा नहीं होता है। लोग दान करते हैं तब खर्चा पूरा हो पाता है। सरकार को इस ओर भी देखना चाहिए।
हाजी नूरुल अरेफिन शम्सी
- लोग कौम, दीनी शिक्षा व जन कल्याण के लिए अपनी जमीन वक्फ बोर्ड में देते हैं। सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। सरकार का मकसद एक समाज को दबाने का कहा है। सरकार उसी मंशा से इस एक्ट में बदलाव करना चाहती है। वक्फ बोर्ड एक्ट में किसी संशोधन की जरूरत नहीं थी। इससे मुस्लिम समाज के लोगों को नुकसान होगा।
मौलाना सैय्यद काब रशीदी, कानूनी सलाहकार, जमीयत उलेमा ए हिंद उत्तर प्रदेश
- मुरादाबाद में शिया वक्फ बोर्ड और सुन्नी वक्फ बोर्ड की संपत्तियां है। सरकार के पास सभी संपत्तियों का डाटा है। संपत्तियाें पर पूरी निगरानी की जाती है। कई किसी संपत्ति पर विवाद की बात सामने आती है तो उसका निस्तारण कराया जाता है।
दिलीप कुमार, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी