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सीएम ग्रिड योजना का हाल: विकास की धूल में उड़ रहा कारोबार, व्यापारी लाचार
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मुरादाबाद। सीएम ग्रिड योजना के तहत चौधरी चरण सिंह चौक से लेकर कैल्टन स्कूल तक बन रही सड़क पर कई स्तर की लापरवाहियां बरती जा रही हैं। इससे पूरे दिन सड़कों पर धूल का गुबार उड़ता है जिससे व्यापारियों को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही जगह-जगह खोदे गए गड्ढों की वजह से आमजन को भी काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। 25 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह सड़क भविष्य में भले ही आधुनिक सुविधाओं से लैस हो लेकिन मौजूदा समय में यहां आमजन से लेकर व्यापारियों तक को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता दिग्विजय पाठक का कहना है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले इस सड़क की चौड़ाई 17-17 मीटर रखी गई थी। लेकिन जब निर्माण शुरू हुआ तो कई स्थानों पर 17 मीटर से अधिक की जगह को खोद दिया गया है। निर्माण कार्य के साथ जहां खोदाई हुई है वहां पानी का छिड़काव भी कराया जाना चाहिए लेकिन सुबह और शाम के समय नाममात्र का पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। दिन भर उड़ती धूल से न सिर्फ आम लोग बल्कि दुकानदार भी परेशान हैं। कई दुकानों के बिल्कुल सामने खोदाई करके छोड़ दिया गया है लेकिन वहां बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड या सुरक्षा घेरे नहीं लगाए गए हैं। इससे हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है। दो दिन पहले ही एक गोवंश इन्हीं गड्ढे में गिर गया था जिसे काफी मशक्कत के बाद निकाला गया है।
दुकानदार पिंटू और मोहन सैनी का कहना है कि ग्राहक अब बाजार में आने से कतराने लगे हैं। उड़ती धूल के कारण कपड़े, मिठाई, मेडिकल और खाने-पीने की दुकानों पर असर साफ दिखाई दे रहा है। जबसे निर्माण कार्य शुरू हुआ है हर दुकान की बिक्री 40-50 फीसदी तक गिर चुकी है। प्रकाशनगर चौराहे पर रहने वाले मृत्युंजय और आकाश का कहना है कि लोग खुद ही अपनी-अपनी दुकान या घरों के सामने हर घंटे पानी का छिड़काव कर रहे हैं। सड़क पर पांच मिनट के लिए भी गाड़ी खड़ी करने पर वह धूल से सन जाती है। सबसे ज्यादा मुश्किल बुजुर्गों के लिए हैं खासतौर पर उन्हें जिन्हें सांस संबंधी बीमारियां हैं।
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- दुकानों के सामने खोद दिए गए गड्ढे
निर्माण कार्य के दौरान कई दुकानों के बाहर बड़े व गहरे गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं। दुकानदारों का कहना है कि जेसीबी से खोदाई करने के बाद रास्तों को भी ठीक नहीं किया गया। लोग खुद ही फावड़े की मदद से अपना रास्ता बनाने को मजबूर होते हैं। गायत्रीनगर और प्रकाशनगर चौराहे के पास कई गड्ढे खुले छोड़ दिए गए हैं जिससे हादसों का भी खतरा बना हुआ है।
- मार्च तक पूरा होना है सड़क का काम
सीएम ग्रिड परियोजना के तहत इस सड़क का निर्माण कार्य जनवरी के महीने में शुरू हुआ था। सड़क को तैयार करने के लिए 15 महीने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। योजना के तहत मार्च-2026 तक सड़क का निर्माण कार्य पूरा हो जाना चाहिए लेकिन अभी तक भूमिगत नाली व ड्रेनेज का ही काम चल रहा है। इससे तय समय पर काम पूरा होने का भी अंदेशा बना हुआ है। 34 मीटर चौड़ी बनने वाली इस सड़क को विदेशों की तर्ज पर ग्रीन रोड मॉडल में विकसित किया जाना है। योजना के तहत सड़क पर ग्रीन कवर, भूमिगत सर्विस लाइन, एक समान लेन, स्ट्रीट वेंडिंग जोन, सार्वजनिक शौचालय, एटीएम, वॉटर एटीएम, ई-कियोस्क और स्ट्रीट फर्नीचर जैसी सुविधाएं विकसित होनी हैं।
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- क्या बोले पीड़ित
- घर के सामने ही खोदाई की गई है जबकि यहां एक पेड़ भी मौजूद है। खोदाई के कारण पेड़ घर पर गिरने की कगार पर है जिससे तीन घरों पर संकट बना हुआ है। लोगों की सुरक्षा का ध्यान ही नहीं रखा जा रहा है। वन विभाग और नगर निगम दोनों विभागों के चक्कर काट चुका हूं। अबतक कोई समाधान नहीं मिला। - पूणेंद्र पाठक
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- दुकानों का व्यापार लगभग ठप पड़ा हुआ है। उड़ती धूल की वजह से ग्राहक इस मार्ग पर आने के बजाय दूसरे बाजारों का रुख कर रहे हैं। पूरे मार्ग पर खोदाई कर दी गई है। सिस्टम से काम किया जाए तो इतनी दिक्कत का सामना न करना पड़े और लोगों के व्यापार भी प्रभावित न हों। - पाथेंद्र पाठक
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- निर्माणाधीन सड़क पर दिनभर धूल उड़ती रहती है। इस वजह से सांस लेने में दिक्कत होती है। बिना मुंह बांधे लोगों का निकलना भी मुश्किल है। पानी का छिड़काव लगातार कराया जाना चाहिए और गड्ढों पर ढक्कन या बैरिकेडिंग जरूर लगाई जानी चाहिए। - प्रेम प्रकाश यादव
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- लोगों ने अपने घर की खिड़कियां तक खोलनी बंद कर दी है। सड़क का धूल घरों तक जा रहा है जिससे बच्चों और बुज़ुर्गों को काफी परेशानी हो रही है। रात के समय यह गड्ढे नजर भी नहीं आते हैं। ग्रीन रोड अच्छी योजना है लेकिन जनता की परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। - दिग्विजय पाठक
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मंडी के गेट के पास डिवाइडर बनाए जाने का काम चल रहा है। यहां स्थित एक स्कूल की जब छुट्टी होती है तो बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई जगह गड्ढे भी खुले हैं जिनमें जानवरों के गिरने का खतरा बना रहता है। - संजीव कुमार सैनी
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- खोदाई के बाद मिट्टी सड़क तक फैली रहती है। लोग खुद फावड़े की मदद से रास्तों को सही करते हैं। गड्ढे खोदने के बाद काम दूसरी जगह लगा दिया जाता है। लोगों की सुरक्षा का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। उड़ती धूल को रोकने के लिए पानी का छिड़काव भी हर घंटे कराया जाना चाहिए। - वीरेंद्र गुप्ता
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सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता दिग्विजय पाठक का कहना है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले इस सड़क की चौड़ाई 17-17 मीटर रखी गई थी। लेकिन जब निर्माण शुरू हुआ तो कई स्थानों पर 17 मीटर से अधिक की जगह को खोद दिया गया है। निर्माण कार्य के साथ जहां खोदाई हुई है वहां पानी का छिड़काव भी कराया जाना चाहिए लेकिन सुबह और शाम के समय नाममात्र का पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। दिन भर उड़ती धूल से न सिर्फ आम लोग बल्कि दुकानदार भी परेशान हैं। कई दुकानों के बिल्कुल सामने खोदाई करके छोड़ दिया गया है लेकिन वहां बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड या सुरक्षा घेरे नहीं लगाए गए हैं। इससे हमेशा दुर्घटना का खतरा बना रहता है। दो दिन पहले ही एक गोवंश इन्हीं गड्ढे में गिर गया था जिसे काफी मशक्कत के बाद निकाला गया है।
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दुकानदार पिंटू और मोहन सैनी का कहना है कि ग्राहक अब बाजार में आने से कतराने लगे हैं। उड़ती धूल के कारण कपड़े, मिठाई, मेडिकल और खाने-पीने की दुकानों पर असर साफ दिखाई दे रहा है। जबसे निर्माण कार्य शुरू हुआ है हर दुकान की बिक्री 40-50 फीसदी तक गिर चुकी है। प्रकाशनगर चौराहे पर रहने वाले मृत्युंजय और आकाश का कहना है कि लोग खुद ही अपनी-अपनी दुकान या घरों के सामने हर घंटे पानी का छिड़काव कर रहे हैं। सड़क पर पांच मिनट के लिए भी गाड़ी खड़ी करने पर वह धूल से सन जाती है। सबसे ज्यादा मुश्किल बुजुर्गों के लिए हैं खासतौर पर उन्हें जिन्हें सांस संबंधी बीमारियां हैं।
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- दुकानों के सामने खोद दिए गए गड्ढे
निर्माण कार्य के दौरान कई दुकानों के बाहर बड़े व गहरे गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं। दुकानदारों का कहना है कि जेसीबी से खोदाई करने के बाद रास्तों को भी ठीक नहीं किया गया। लोग खुद ही फावड़े की मदद से अपना रास्ता बनाने को मजबूर होते हैं। गायत्रीनगर और प्रकाशनगर चौराहे के पास कई गड्ढे खुले छोड़ दिए गए हैं जिससे हादसों का भी खतरा बना हुआ है।
- मार्च तक पूरा होना है सड़क का काम
सीएम ग्रिड परियोजना के तहत इस सड़क का निर्माण कार्य जनवरी के महीने में शुरू हुआ था। सड़क को तैयार करने के लिए 15 महीने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। योजना के तहत मार्च-2026 तक सड़क का निर्माण कार्य पूरा हो जाना चाहिए लेकिन अभी तक भूमिगत नाली व ड्रेनेज का ही काम चल रहा है। इससे तय समय पर काम पूरा होने का भी अंदेशा बना हुआ है। 34 मीटर चौड़ी बनने वाली इस सड़क को विदेशों की तर्ज पर ग्रीन रोड मॉडल में विकसित किया जाना है। योजना के तहत सड़क पर ग्रीन कवर, भूमिगत सर्विस लाइन, एक समान लेन, स्ट्रीट वेंडिंग जोन, सार्वजनिक शौचालय, एटीएम, वॉटर एटीएम, ई-कियोस्क और स्ट्रीट फर्नीचर जैसी सुविधाएं विकसित होनी हैं।
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- क्या बोले पीड़ित
- घर के सामने ही खोदाई की गई है जबकि यहां एक पेड़ भी मौजूद है। खोदाई के कारण पेड़ घर पर गिरने की कगार पर है जिससे तीन घरों पर संकट बना हुआ है। लोगों की सुरक्षा का ध्यान ही नहीं रखा जा रहा है। वन विभाग और नगर निगम दोनों विभागों के चक्कर काट चुका हूं। अबतक कोई समाधान नहीं मिला। - पूणेंद्र पाठक
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- दुकानों का व्यापार लगभग ठप पड़ा हुआ है। उड़ती धूल की वजह से ग्राहक इस मार्ग पर आने के बजाय दूसरे बाजारों का रुख कर रहे हैं। पूरे मार्ग पर खोदाई कर दी गई है। सिस्टम से काम किया जाए तो इतनी दिक्कत का सामना न करना पड़े और लोगों के व्यापार भी प्रभावित न हों। - पाथेंद्र पाठक
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- निर्माणाधीन सड़क पर दिनभर धूल उड़ती रहती है। इस वजह से सांस लेने में दिक्कत होती है। बिना मुंह बांधे लोगों का निकलना भी मुश्किल है। पानी का छिड़काव लगातार कराया जाना चाहिए और गड्ढों पर ढक्कन या बैरिकेडिंग जरूर लगाई जानी चाहिए। - प्रेम प्रकाश यादव
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- लोगों ने अपने घर की खिड़कियां तक खोलनी बंद कर दी है। सड़क का धूल घरों तक जा रहा है जिससे बच्चों और बुज़ुर्गों को काफी परेशानी हो रही है। रात के समय यह गड्ढे नजर भी नहीं आते हैं। ग्रीन रोड अच्छी योजना है लेकिन जनता की परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। - दिग्विजय पाठक
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मंडी के गेट के पास डिवाइडर बनाए जाने का काम चल रहा है। यहां स्थित एक स्कूल की जब छुट्टी होती है तो बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई जगह गड्ढे भी खुले हैं जिनमें जानवरों के गिरने का खतरा बना रहता है। - संजीव कुमार सैनी
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- खोदाई के बाद मिट्टी सड़क तक फैली रहती है। लोग खुद फावड़े की मदद से रास्तों को सही करते हैं। गड्ढे खोदने के बाद काम दूसरी जगह लगा दिया जाता है। लोगों की सुरक्षा का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। उड़ती धूल को रोकने के लिए पानी का छिड़काव भी हर घंटे कराया जाना चाहिए। - वीरेंद्र गुप्ता