सॉरी..मम्मी-पापा: मैं आपकी अच्छी बेटी नहीं बन सकी, छोटी को खूब पढ़ाना; लिखकर करुणा ने दुनिया को कहा अलविदा
टीएमयू से बीटेक करने वाली छात्रा करुणा विश्वकर्मा ने शुक्रवार को परीक्षा तो दी लेकिन वह जिंदगी के इम्तिहान में फेल हो गई। इंजीनियरिंग कॉलेज की पांचवीं मंजिल से छलांग लगाने से पहले उसने कई लोगों से फोन पर लंबी बात की थी। छात्रा के साथियों ने बताया कि उन्हें आभास तक नहीं हुआ कि करुणा इस तरह का कदम उठा सकती है।
विस्तार
करुणा विश्वकर्मा ने शुक्रवार को परीक्षा तो दी लेकिन वह जिंदगी के इम्तिहान में फेल हो गई। वह इंजीनियरिंग कॉलेज की पांचवीं मंजिल पर पहले टहलती रही और उसने फोन पर लंबी बातचीत की। इसके बाद उसने खिड़की से छलांग लगा दी। छात्रा की रूम मेट ने पुलिस को बताया कि उन्हें कभी आभास तक नहीं हुआ कि करुणा विश्वकर्मा सुसाइड जैसा कदम भी उठा सकती है।
उसने जब फोन कर बताया कि उसके लिए गिफ्ट छोड़ दिया है, तब उसे कोई अंदाजा नहीं था। जब वह रूम में पहुंची और गिफ्ट की तलाश की तो उसे एक सुसाइड नोट मिला। उसने तुरंत इस मामले की विश्वविद्यालय प्रबंधन को दे दी थी। करुणा रोज की तरह शुक्रवार सुबह जागी थी। इसके बाद वह तैयार हुई। इसके बाद वह परीक्षा देने चली गई थी।
परीक्षा देने के बाद उसे रूम लौटना था, लेकिन वह इंजीनियरिंग कॉलेज की पांचवीं मंजिल पर पहुंच गई। यहां उसने कई लोगों से फोन पर बात की। अंतिम में उसने अपनी रूम मेट आयुषी को कॉल की थी। उसने बताया कि वह अभी रूम पर नहीं आ रही है। उसने आयुषी से कहा कि उसके लिए गिफ्ट छोड़ा है।
सुसाइड नोट लिखकर पांचवीं मंजिल से छलांग लगाई
टीएमयू में शुक्रवार दोपहर को बीटेक की छात्रा करुणा विश्वकर्मा (20) ने सुसाइड नोट लिखकर पांचवीं मंजिल से छलांग लगा दी। टीएमयू के हॉस्पिटल में करीब साढ़े छह घंटे के उपचार के बाद उसने दम तोड़ दिया। सुसाइड नोट में लिखा है- सॉरी मम्मी-पापा मैं आपकी अच्छी बेटी नहीं बन सकी। छोटी बहन को खूब पढ़ाना, वो आपका ध्यान अच्छे से रखेगी। आप सब अपना ख्याल रखना... करुणा लूजर। छात्रा ने अपने एक मित्र के लिए भी कुछ शब्द लिखे हैं।
मूल रूप से बिहार के मधुबनी जनपद के नगनिया की रहने वाली करुणा विश्वकर्मा टीएमयू के ओल्ड गर्ल्स हाॅस्टल में रहती थी। उसी कमरे में तीन अन्य छात्राएं भी रहती हैं। बीटेक मेकेनिकल प्रथम वर्ष की छात्रा करुणा ने शुक्रवार को परीक्षा दी। दिन में 11.30 बजे पेपर खत्म होने के बाद वह कॉलेज की पांचवीं मंजिल पर टहलने लगी।
इस दौरान उसने अपनी रूम पार्टनर और दोस्त आयुषी को फोन करके कहा-मैं तेरे लिए एक गिफ्ट छोड़ कर आई हूं। आयुषी ने जब कमरे में देखा तो वहां करुणा का सुसाइड नोट मिला। जब तक आयुषी यह जानकारी विश्वविद्यालय प्रबंधन को देती, तब तक करुणा पांचवीं मंजिल से कूद चुकी थी।
टीएमयू के मीडिया प्रभारी एमपी सिंह ने बताया कि करुणा पांचवीं मंजिल की खिड़की से कूदी थी। उसके परिवार को सूचना दे दी है। सुसाइड नोट पुलिस को सौंप दिया है। एसपी सिटी अखिलेश भदौरिया ने बताया कि पाकबड़ा पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। फोरेंसिक टीम ने भी मौके से नमूने लिए हैं।
17 नवंबर को हॉस्टल में पहुंची थी छात्रा
करुणा के सुसाइड करने के बाद पाकबड़ा पुलिस ने टीएमयू पहुंची। छात्रा की रूममेट और स्टाफ अन्य छात्राओं से पूछताछ की। पुलिस ने बताया कि पूछताछ में सामने आया है कि करुणा दिवाली की छुट्टी पर घर जाने की बात कहकर टीएमयू से गई थी, लेकिन वह अपने घर नहीं पहुंची। बिहार में ही अपने एक मित्र से मिलने चली गई थी। बताया जा रहा है कि छात्रा के मित्र का 26 नवंबर को जन्मदिन है, लेकिन वह उसे पहले ही गिफ्ट लेने के बाद बिहार से दिल्ली अपनी बुआ के घर चली गई थी। बुआ के घर रुकने के बाद वह 17 नवंबर को टीएमयू में लौटी थी।
आत्महत्या में मानसिक रोग विशेषज्ञ के सुझाव
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अनंत राणा का कहना है कि दूर रहकर पढ़ाई करने वाले बच्चों पर माता-पिता को ज्यादा ध्यान देना चाहिए। अकेलेपन के कारण अपनी परेशानी किसी से न कह पाना आत्महत्या के ख्याल की सबसे बड़ी वजह है। युवाओं को ध्यान देना चाहिए यदि अपनी क्षमताओं या पसंद से विपरीत जाकर लक्ष्य निर्धारित किया है तो उसे बदलने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए।
जिंदगी बचने के एवज में यदि कुछ साल बर्बाद होते हैं तो हो जाएं। डॉ. राणा ने कहा कि आत्महत्या का विचार अचानक नहीं आता। कई दिन या कई महीनों से व्यक्ति अवसाद से जूझ रहा होता है। इस बीच वह अपने परिजनों व मित्रों को संकेत भी देता है कि वह कुछ गलत कदम उठा सकता है। परिजनों या मित्रों को इसे भांपकर उसकी काउंसलिंग करनी चाहिए। यदि खुद से बात नहीं बनती तो डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।
अवसाद से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
- अपनी परेशानी मन में न रखें, दोस्तों या परिवार से साझा करें
- खुलकर बात नहीं कर सकते तो मैसेज लिखकर भेज दें
- पढ़ाई, परिवार व मनोरंजन के बीच सामंजस्य बनाएं
- पढ़ाई या किसी भी बात को लेकर बहुत ज्यादा तनाव न लें
- सोचें कि आपकी जिंदगी से बढ़कर कुछ नहीं है
- हर दिन संभव नहीं है तो सप्ताह में एक बार दोस्तों के साथ समय बिताएं
- माह में एक बार कोई फिल्म देखने जाएं या रिश्तेदारों से मिलें
- कॅरिअर संबंधी लक्ष्य का निर्धारण करते समय क्षमता व संसाधनों को ध्यान में रखें