फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   Someone please tell them... give them the address of their night shelter

Moradabad News: कोई तो बता दो... इन्हें रैन बसरे का पता दो

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 03 Jan 2026 02:16 AM IST
विज्ञापन
Someone please tell them... give them the address of their night shelter
मुरादाबाद। पूस की कंपकंपाती रात में 9 डिग्री सेल्सियस तापमान में खुले आसमान के नीचे रात बिताने वाले लोग कहते हैं कि उन्हें नहीं पता कि रैन बसेरा कहां है। कुछ ऐसे हैं जिनके पास आधार कार्ड न होने के कारण उन्हें पनाह नहीं दी गई, तो किसी का आरोप है कि रैन बसेरे में ठहरने के लिए रुपये मांगे गए। कारण जो भी रहा हो लेकिन हकीकत यह है कि ये लोग खुले में सड़क पर रात बिताने को मजबूर हैं।
विज्ञापन

बुध बाजार में हिंदू मॉडल इंटर कॉलेज के बाहर सड़क किनारे रात गुजार रहे मो. आलम बताते हैं कि वह हापुड़ के रहने वाले हैं। यहां बेलदारी का काम करते हैं। उनके पास आधार कार्ड नहीं है। वह सड़क किनारे कंबल ओढ़कर लेटे थे, वहां से 200 मीटर दूर रैन बसेरा है। नईम का कहना था कि आधार कार्ड के बिना अंदर घुसने से मना कर दिया गया। मान मुनव्वल की तो उनसे रुपये मांगे गए। इसके बाद उन्होंने कभी रैन बसेरे का रुख नहीं किया। इसी तरह दिल्ली रोड पर शोरूम के बाहर सोने वाले राजस्थानी लोगों का हाल है। वह कहते हैं कि सड़कों पर गुब्बारे बेचकर गुजारा करते हैं। दो महीने यहां इसी काम से रुपये कमाएंगे और सड़क पर रात बिताएंगे। इसके बाद अपने घर राजस्थान लौट जाएंगे।
विज्ञापन

शुक्रवार की रात को 11:30 बजे मुरादाबाद डिपो के पास बना अस्थायी रैन बसेरा लगभग खाली था। सिर्फ चार बेड पर लोग लेटे थे। इसके अलावा कोई नहीं था। स्टेशन पर बने स्थायी रैन बसेरे में महिला कक्ष में सिर्फ तीन बेड भरे थे। जबकि पुरुष कक्ष में सभी बेड फुल रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन


लोगों का कहना
हम लोग राजस्थान से आए हैं। पिछले 20 दिन से यहीं शोरूम के बाहर तिरपाल बिछाकर सो जाते हैं। दिन में गुब्बारे बेचते हैं। रैन बसेरे के बारे में हमें जानकारी नहीं है।
- गोपी
मैं हापुड़ का रहने वाला हूं। यहां बेलदारी करता हूं। आधार कार्ड नहीं है इसलिए कोई किराये पर कमरा नहीं देता। रैन बसेरे वाले ठहराने के पैसे मांगते हैं।
- मो. आलम
सड़क पर ही सोना होता है। रैन बसेरा किधर है हमें नहीं पता। परिवार के साथ सड़क किनारे सोते हैं।

कंगना
मेरा घर चक्कर की मिलक में है। वहां कोई अपना नहीं है। भाई और भाभी से कई साल पहले अनबन हुई। तब से दिन में रिक्शा चलाता हूं और रात में कहीं भी सो जाता हूं। रिक्शा छोड़कर रैन बसेरे में नहीं जा सकता।
- बब्लू
मैं रामपुर के शाहबाद का रहने वाला हूं। यहां रिक्शा चलाता हूं और रात में कहीं भी सड़क किनारे समय काट लेता हूं। हर 15 दिन में घर जाता हूं। रैन बसेरे में जाने की कभी कोशिश नहीं की।

- गैंदल
-------------------------
रैन बसेरों को जांचने निकले अधिकारी
अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद शुक्रवार को डीएम, एसएसपी और नगर आयुक्त रैन बसेरों का निरीक्षण करने निकले। डीएम ने बताया कि रेलवे स्टेशन के पास स्थायी रैन बसेरे में बेड फुल थे। अच्छी व्यवस्था थी। रोडवेज के पास अस्थायी रैन बसेरे में कुछ लोग थे। अन्य जरूरतमंद लोगों के देर रात में वहां पहुंचने की उम्मीद जताई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed