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Moradabad News: आत्मनिर्भर बनने का अवसर बना हुनर, दिलाई सफलता

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 20 Jul 2026 02:23 AM IST
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Skills paved the way to self-reliance and brought success.
मुरादाबाद। महंगाई के दौर में महिलाएं अब सिर्फ घर संभालने तक सीमित नहीं हैं। वे अपने हुनर को अपनी पहचान बनाने का जरिया बना रही हैं। संगीत से लेकर सिलाई-कढ़ाई तक में शहर की महिलाएं घर की जिम्मेदारियों के साथ अपना कारोबार भी संभाल रही हैं। अपनी मेहनत से न सिर्फ अपने परिवार का सहयोग कर रही हैं, बल्कि दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रही हें।
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जरूरतमंदों को सिखा रहीं संगीत
इंदिरा आवास कॉलोनी निवासी निधि गुप्ता ने बताया कि जब वह चार-पांच साल की थीं, तभी उनके पापा ने उनको संगीत की बारीकियां सिखाना शुरु किया था। इसके बाद उन्होंने गायन और वादन में संगीत प्रभाकर की डिग्री ली। शादी के बाद बच्चों को संगीत सिखाना शुरु कर दिया। निधि ने बताया कि कुछ कारणों की वजह से अभी करीब दस-12 बच्चों को ही संगीत सिखा रही हूं। इसमें जरूरतमंद बच्चों को नि:शुल्क संगीत सिखाती हूं। उन्होंने बताया कि कई संस्थाओं के साथ जुड़कर बालिका शिक्षा पर वह काम कर चुकी हूं। अब भविष्य में संगीत अकादमी खोलने का सपना है, क्योंकि आजकल संगीत की शिक्षा बहुत महंगी हो गई है। मध्यम वर्ग के लोग अपने बच्चों को संगीत से जोड़ पाएं, इसके लिए जरूरी है कि फीस बहुत कम होनी चाहिए। इसके अलावा वह अपने पति के साथ भी उनके व्यवसाय में बराबर का सहयोग देती हैं। उनका कहना है कि महिलाओं का आत्मनिर्भर होना जरूरी है। क्योंकि लोगों के खर्चे ज्यादा हैं और आय के स्रोत कम हैं। जब महिलाएं काम करती हैं तो वे परिवार की सहयोगी बनती हैं। पढ़ी-लिखी महिलाएं अपने बच्चों के लिए रोल मॉडल बनती हैं। जब बच्चे माता-पिता को मेहनत करते देखते हैं तो वे भी मेहनत के लिए प्रेरित होते हैं।
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हुनर से 50 बेटियों को दिया रोजगार
मोहम्मद अली रोड निवासी सुल्ताना जरीन ने टेलरिंग और कढ़ाई के हुनर को आत्मनिर्भरता का जरिया बनाया। जब बच्चे छोटे थे और पति निजी स्कूल में शिक्षक थे, तब उन्होंने सोचा कि बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए कुछ करना होगा। उन्होंने सूट पर एंब्राइडरी और बुर्के पर डिजाइन का काम शुरू किया। खुद कपड़ा खरीदकर सैंपल बनाकर दिल्ली भेजती थीं। शुरुआत में मुश्किलें आईं, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। सुल्ताना ने अपने साथ मोहल्ले की जरूरतमंद लड़कियों को भी जोड़ा। अब तक वे करीब 50 बेटियों को सिलाई-कढ़ाई का हुनर सिखा चुकी हैं। उनका मानना है कि हर महिला में कोई न कोई टैलेंट होता है। परिवार का सहयोग मिले तो बड़े स्तर पर काम करें, नहीं तो छोटे स्तर से शुरू करें। लेकिन काम जरूर करें। टाइम टेबल बनाकर घर बैठे भी करियर बनाया जा सकता है। सिलाई, बुनाई, कढ़ाई हर महिला को आनी चाहिए।
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