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बिहार की ट्रेनों में नवंबर तक सीटें फुल, महंगा सफर बना मजबूरी
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मुरादाबाद। मुरादाबाद से पूर्वांचल और बिहार जाने वाली अधिकांश ट्रेनों में नवंबर तक सीटें फुल हो चुकी हैं। ऐसे में फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों में मंहगा सफर यात्रियों की मजबूरी बन गया है। दो दिन पहले फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों की घोषणा के बाद रेलवे ने गुरुवार रात बारह बजे से इनमें बुकिंग शुरू करने का दावा किया था। हालांकि तय समय तक किराये की सूची जारी नहीं हुई। वहीं शहीद और हरिहर एक्सप्रेस जैसी कुछ ट्रेनों में 15 अक्तूबर के बाद कुछ सीटें खाली हैं।
हाल ही में घोषित ट्रेनों के अलावा अन्य फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों की बात करें तो इनमें किराया सामान्य से ज्यादा है। फर्स्ट एसी और सेकेंड एसी कोचों में तो यह अंतर डेढ़ गुना तक है। पिछले एक साल से यात्रियों के साथ यही खेल चलता आ रहा है। कुछ ट्रेनें ऐसी भी हैं जिन्हें पिछले साल दीपावली और छठ पूजा के मौके पर फेस्टिवल स्पेशल के रूप में चलाया गया। इसके बाद जनवरी में कुंभ मेले और प्रयागराज में माघ मेले के दौरान उन्हें मेला स्पेशल नाम दे दिया गया। इसके बाद वहीं ट्रेनें होली पर फिर फेस्टिवल स्पेशल बनकर चलीं और अब तक संचालन जारी है। हालांकि कुछ समय के लिए चलाई गई क्लोन ट्रेनों का संचालन रेलवे ने बंद कर दिया था। वास्तव में फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों का मंहगा किराया मंडल मुख्यालय या जोनल मुख्यालय की पहुंच से बाहर है। रेलवे प्रशासन के मुताबिक किराया बोर्ड स्तर से तय होता है। स्पेशल होने के कारण इनके किराये में किसी प्रकार की रियायत भी यात्रियों को नहीं दी जाती। 11 अक्तूबर से चलने वाली फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों के किराये का विवरण गुरुवार रात बारह बजे तक जारी नहीं हुआ। गाड़ी संख्या 05098 भागलपुर स्पेशल एक्सप्रेस, 05910 अवध-असम एक्सप्रेस, 05522 सहरसा फेस्टिवल स्पेशल, 05212 डिब्रुगढ़ फेस्टिवल स्पेशल, 04650 सरयू यमुना स्पेशल एक्सप्रेस, 02558 मुजफ्फरपुर सप्तक्रांति, 04008 सद्भावना स्पेशल आदि ट्रेनों में सीटों की किल्लत है। सीनियर डीसीएम सुधीर सिंह का कहना है कि त्योहारों पर भीड़ की स्थिति और यात्रियों की सहूलियत को देखते हुए फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें चलाई गई हैं।
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हाल ही में घोषित ट्रेनों के अलावा अन्य फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों की बात करें तो इनमें किराया सामान्य से ज्यादा है। फर्स्ट एसी और सेकेंड एसी कोचों में तो यह अंतर डेढ़ गुना तक है। पिछले एक साल से यात्रियों के साथ यही खेल चलता आ रहा है। कुछ ट्रेनें ऐसी भी हैं जिन्हें पिछले साल दीपावली और छठ पूजा के मौके पर फेस्टिवल स्पेशल के रूप में चलाया गया। इसके बाद जनवरी में कुंभ मेले और प्रयागराज में माघ मेले के दौरान उन्हें मेला स्पेशल नाम दे दिया गया। इसके बाद वहीं ट्रेनें होली पर फिर फेस्टिवल स्पेशल बनकर चलीं और अब तक संचालन जारी है। हालांकि कुछ समय के लिए चलाई गई क्लोन ट्रेनों का संचालन रेलवे ने बंद कर दिया था। वास्तव में फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों का मंहगा किराया मंडल मुख्यालय या जोनल मुख्यालय की पहुंच से बाहर है। रेलवे प्रशासन के मुताबिक किराया बोर्ड स्तर से तय होता है। स्पेशल होने के कारण इनके किराये में किसी प्रकार की रियायत भी यात्रियों को नहीं दी जाती। 11 अक्तूबर से चलने वाली फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों के किराये का विवरण गुरुवार रात बारह बजे तक जारी नहीं हुआ। गाड़ी संख्या 05098 भागलपुर स्पेशल एक्सप्रेस, 05910 अवध-असम एक्सप्रेस, 05522 सहरसा फेस्टिवल स्पेशल, 05212 डिब्रुगढ़ फेस्टिवल स्पेशल, 04650 सरयू यमुना स्पेशल एक्सप्रेस, 02558 मुजफ्फरपुर सप्तक्रांति, 04008 सद्भावना स्पेशल आदि ट्रेनों में सीटों की किल्लत है। सीनियर डीसीएम सुधीर सिंह का कहना है कि त्योहारों पर भीड़ की स्थिति और यात्रियों की सहूलियत को देखते हुए फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें चलाई गई हैं।
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