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संभल दंगा : कमिश्नर कल करेंगे जांच रिपोर्ट की समीक्षा
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मुरादाबाद। संभल के खग्गू सराय में 46 साल से बंद मंदिर मिलने के बाद चर्चाओं में आए 1978 के दंगे की जांच रिपोर्ट की कमिश्नर बृहस्पतिवार को समीक्षा करेंगे। 19 दिसंबर को कमिश्नर कार्यालय में अभियोजन अधिकारियों की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में कमिश्नर के सामने जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
14 दिसंबर को संभल के खग्गू सराय मोहल्ले में एक मंदिर मिला था। यह मंदिर 46 साल से बंद था। प्रशासन ने दरवाजा खुलवाकर मंदिर की साफ-सफाई गई। मंदिर में पूजा अर्चना शुरू हो गई। साथ ही मंदिर के पास कुएं की खोदाई भी शुरू करा दी गई। इसके बाद संभल के 1978 का दंगा चर्चाओं में आ गया। इसकी गूंज लखनऊ से दिल्ली तक सुनाई पड़ी। 1978 के दंगे को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि घटना के 46 साल बाद अभी तक किसी को सजा तक नहीं मिली। प्रशासन और स्थानीय लोगों की सक्रियता से 46 साल से बंद मंदिर के पट खुले। सीएम के इस बयान के बाद प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आ गए। सोमवार को कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने दंगे की फाइल दोबारा खोलने का निर्णय लिया। जांच में किस स्तर पर चूक हुई है, यह जानने के लिए कमिश्नर ने संभल प्रशासन से दंगे से जुड़ीं फाइलें मांगी है।
कमिश्नर ने बताया कि 19 दिसंबर को मंडल की समीक्षा बैठक बुलाई गई। इस दौरान संभल के अभियोजन अधिकारी 1978 के दंगे की स्थिति के बारे में अपनी रिपोर्ट रिपोर्ट पेश करेंगे। रिपोर्ट के आधार पर समीक्षा की जाएगी।
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इन बिंदुओं पर होगी समीक्षा
- संभल में 1978 हुए दंगे की समीक्षा में गवाहों को कितनी बार पेश किया गया, अदालत के वारंट की स्थिति क्या रही, साक्ष्यों को इकट्ठा करने में किस स्तर पर लापरवाही बरती गई समेत अन्य बिंदुओं पर कमिश्नर जांच रिपोर्ट की समीक्षा करेंगे। इसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
अभियोजन स्तर पर मुरादाबाद के सबसे ज्यादा मामले लंबित
- कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने बताया कि रूटीन के तहत मंडल के 1981 से 1990 तक अभियोजन स्तर पर अमरोहा के चार, मुरादाबाद के 12 और डीजीसी स्तर पर अमरोहा के दो मामले लंबित थे। इनमें मुरादाबाद के दो मामलों का निस्तारण किया गया है। रामपुर का एक पुराना प्रकरण भी सामने आया है। समीक्षा में अदालतों से जारी वारंट और तामील की स्थिति पर चर्चा की जाएगी।
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14 दिसंबर को संभल के खग्गू सराय मोहल्ले में एक मंदिर मिला था। यह मंदिर 46 साल से बंद था। प्रशासन ने दरवाजा खुलवाकर मंदिर की साफ-सफाई गई। मंदिर में पूजा अर्चना शुरू हो गई। साथ ही मंदिर के पास कुएं की खोदाई भी शुरू करा दी गई। इसके बाद संभल के 1978 का दंगा चर्चाओं में आ गया। इसकी गूंज लखनऊ से दिल्ली तक सुनाई पड़ी। 1978 के दंगे को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि घटना के 46 साल बाद अभी तक किसी को सजा तक नहीं मिली। प्रशासन और स्थानीय लोगों की सक्रियता से 46 साल से बंद मंदिर के पट खुले। सीएम के इस बयान के बाद प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आ गए। सोमवार को कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने दंगे की फाइल दोबारा खोलने का निर्णय लिया। जांच में किस स्तर पर चूक हुई है, यह जानने के लिए कमिश्नर ने संभल प्रशासन से दंगे से जुड़ीं फाइलें मांगी है।
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कमिश्नर ने बताया कि 19 दिसंबर को मंडल की समीक्षा बैठक बुलाई गई। इस दौरान संभल के अभियोजन अधिकारी 1978 के दंगे की स्थिति के बारे में अपनी रिपोर्ट रिपोर्ट पेश करेंगे। रिपोर्ट के आधार पर समीक्षा की जाएगी।
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इन बिंदुओं पर होगी समीक्षा
- संभल में 1978 हुए दंगे की समीक्षा में गवाहों को कितनी बार पेश किया गया, अदालत के वारंट की स्थिति क्या रही, साक्ष्यों को इकट्ठा करने में किस स्तर पर लापरवाही बरती गई समेत अन्य बिंदुओं पर कमिश्नर जांच रिपोर्ट की समीक्षा करेंगे। इसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
अभियोजन स्तर पर मुरादाबाद के सबसे ज्यादा मामले लंबित
- कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने बताया कि रूटीन के तहत मंडल के 1981 से 1990 तक अभियोजन स्तर पर अमरोहा के चार, मुरादाबाद के 12 और डीजीसी स्तर पर अमरोहा के दो मामले लंबित थे। इनमें मुरादाबाद के दो मामलों का निस्तारण किया गया है। रामपुर का एक पुराना प्रकरण भी सामने आया है। समीक्षा में अदालतों से जारी वारंट और तामील की स्थिति पर चर्चा की जाएगी।