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कोरोना काल में टूटा 45 हजार बच्चों का सुरक्षा चक्र
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मुरादाबाद। कोरोना संक्रमण काल में नियमित टीकाकरण प्रभावित हुआ है। जिले में करीब 45 हजार बच्चों का सुरक्षा चक्र टूट गया है। जिले में जीरो से दो साल के 45,096 बच्चों को टीका नहीं लगा है। वहीं इस साल जिले में डिप्थीरिया के दस केस मिले हैं, जबकि एक बच्चे की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में सुरक्षा चक्र टूटने से बच्चों पर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
बच्चों को टीबी, डिप्थीरिया, काली खांसी, टीटनेस, हेपेटाइटिस, निमोनिया जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए नियमित टीकाकरण किया जाता है। जो अलग-अलग अवधि में लगाया जाता है। कोरोना काल में संक्रमण के चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रही। कभी लॉकडाउन के चलते तो कभी संक्रमण के फैलाव के कारण। इसका असर नियमित टीकाकरण पर पड़ा। संक्रमण काल में टीकाकरण अभियान ठप रहा। अभियान चला भी तो लोगों ने डर से बच्चों का टीकाकरण नहीं कराया। नतीजतन जिले में 45,096 बच्चों का सुरक्षा चक्र टूट गया। इन बच्चों का किन्हीं कारणवश शत प्रतिशत टीकाकरण हो सका था। ये सभी बच्चे शून्य से दो साल तक के हैं। दूसरी ओर सुरक्षा चक्र टूटने से जिले में डिप्थीरिया के दस केस मिले। डिलारी ब्लाक के अकबरपुर गांव निवासी डिप्थीरिया पीड़ित बच्चे की इलाज के दौरान दिल्ली में मौत हो चुकी है। ऐसे में बच्चों के सुरक्षा चक्र को टूटने से बचाने के लिए वैक्सीन की डोज का कवच लगाना होगा।
ये टीके हैं जीवनरक्षक
टीका----बीमारी से बचाव
बीसीजी---टीबी
पेंटा------काली खांसीए, डिप्थीरिया, टिटनेस
चिकिनपॉक्स---चिकिनपॉक्स
इन्फ्लूएंजा-----सर्दी, खांसी, जुकाम
एमएमआर-----खसरा, गलसुआ, रूबैला
रोटावायरस-----संक्रमण
नियोमोकोकल---निमोनिया
पोलियो-------अपंगता से बचाव
हीमोफिलस बी---हेपेटाइटिस
जीरो से दो साल की अवधि में लगने वाले टीके
- जन्म के 24 घंटे में : हेपेटाइटिस-बी, पोलियो की जीरो डोज, बीसीजी, टीबी, डिप्थीरिया
- डेढ़ माह पर : पोलियो, रोटा, पेंटा वैलेंट, एफआईपीवी, पीसीवी
- ढाई माह पर : एफआईपीवी और पीसीवी को छोड़कर डेढ़ माह पर लगने वाले सभी टीके
- साढ़े तीन माह पर : डेढ़ माह पर लगने वाले सभी टीके
- नौ माह पर : एमआर, पीसीवी, विटामिन-ए
- 16 माह पर : पोलियो, डीपीटी, एमआर-2, विटामिन-ए
सुरक्षा चक्र टूटने के संभावित कारण
- लॉकडाउन
- व्यक्तिगत कारण
- रूढ़िवादी सोच
- मां-बाप में जागरूकता की कमी
- टीमों का गांवों में नहीं पहुंचना
सलाह
- हर हाल में बच्चों का टीकाकरण कराएं
- टीकाकरण से वंचित होने पर सीएचसी-पीएचसी में संपर्क
- टीके से वंचित या समय अवधि निकल जाने के बाद भी टीकाकरण कराएं
- किसी अफवाह पर ध्यान न दें
ये बीमारियां हो सकती हैं बच्चों को
- टीबी, डिप्थीरिया, काली खांसी, टीटनेस, हेपेटाइटिस, डायरिया, निमोनिया
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बच्चों को टीबी, डिप्थीरिया, काली खांसी, टीटनेस, हेपेटाइटिस, निमोनिया जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए नियमित टीकाकरण किया जाता है। जो अलग-अलग अवधि में लगाया जाता है। कोरोना काल में संक्रमण के चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रही। कभी लॉकडाउन के चलते तो कभी संक्रमण के फैलाव के कारण। इसका असर नियमित टीकाकरण पर पड़ा। संक्रमण काल में टीकाकरण अभियान ठप रहा। अभियान चला भी तो लोगों ने डर से बच्चों का टीकाकरण नहीं कराया। नतीजतन जिले में 45,096 बच्चों का सुरक्षा चक्र टूट गया। इन बच्चों का किन्हीं कारणवश शत प्रतिशत टीकाकरण हो सका था। ये सभी बच्चे शून्य से दो साल तक के हैं। दूसरी ओर सुरक्षा चक्र टूटने से जिले में डिप्थीरिया के दस केस मिले। डिलारी ब्लाक के अकबरपुर गांव निवासी डिप्थीरिया पीड़ित बच्चे की इलाज के दौरान दिल्ली में मौत हो चुकी है। ऐसे में बच्चों के सुरक्षा चक्र को टूटने से बचाने के लिए वैक्सीन की डोज का कवच लगाना होगा।
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ये टीके हैं जीवनरक्षक
टीका----बीमारी से बचाव
बीसीजी---टीबी
पेंटा------काली खांसीए, डिप्थीरिया, टिटनेस
चिकिनपॉक्स---चिकिनपॉक्स
इन्फ्लूएंजा-----सर्दी, खांसी, जुकाम
एमएमआर-----खसरा, गलसुआ, रूबैला
रोटावायरस-----संक्रमण
नियोमोकोकल---निमोनिया
पोलियो-------अपंगता से बचाव
हीमोफिलस बी---हेपेटाइटिस
जीरो से दो साल की अवधि में लगने वाले टीके
- जन्म के 24 घंटे में : हेपेटाइटिस-बी, पोलियो की जीरो डोज, बीसीजी, टीबी, डिप्थीरिया
- डेढ़ माह पर : पोलियो, रोटा, पेंटा वैलेंट, एफआईपीवी, पीसीवी
- ढाई माह पर : एफआईपीवी और पीसीवी को छोड़कर डेढ़ माह पर लगने वाले सभी टीके
- साढ़े तीन माह पर : डेढ़ माह पर लगने वाले सभी टीके
- नौ माह पर : एमआर, पीसीवी, विटामिन-ए
- 16 माह पर : पोलियो, डीपीटी, एमआर-2, विटामिन-ए
सुरक्षा चक्र टूटने के संभावित कारण
- लॉकडाउन
- व्यक्तिगत कारण
- रूढ़िवादी सोच
- मां-बाप में जागरूकता की कमी
- टीमों का गांवों में नहीं पहुंचना
सलाह
- हर हाल में बच्चों का टीकाकरण कराएं
- टीकाकरण से वंचित होने पर सीएचसी-पीएचसी में संपर्क
- टीके से वंचित या समय अवधि निकल जाने के बाद भी टीकाकरण कराएं
- किसी अफवाह पर ध्यान न दें
ये बीमारियां हो सकती हैं बच्चों को
- टीबी, डिप्थीरिया, काली खांसी, टीटनेस, हेपेटाइटिस, डायरिया, निमोनिया