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बारिश के कारण कच्चे मकान की छत गिरने से दो बच्चों की मौत
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मुरादाबाद। बारिश के कारण मंगलवार तड़के नागफनी थानाक्षेत्र के नवाबपुरा के गुड़ियाबाग में एक कच्चे मकान की छत गिर गई। नीचे सो रहे परिवार के आठ लोग मलबे के नीचे दब गए। जिनमें से दो मासूम बच्चों की मौत हो गई। हादसे में जख्मी छह लोगों में से पांच को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस हादसे से नवाबपुरा के अन्य कई कच्चे मकानों में रहने वाले परिवार खौफजदा हैं। उनको डर है कि बारिश के कारण कहीं उनके भी मकान की छत न गिर जाए।
जिस मकान में हादसा हुआ है, उसमें तीन भाई जमीर अहमद, भूरे उर्फ सगीर अहमद और वसीम का परिवार रहता है। मकान में दो कमरे बने हैं। मकान करीब 15 साल पुराना है। आर्थिक तंगी की वजह से उसे पक्का नहीं बनवाया जा सका। दालान की छत लकड़ी की थी, जिस पर मिट्टी डाल दी गई थी। जहीर आलम ने बताया कि रात करीब साढे़ तीन बजे तेज बारिश हो रही थी, इस दौरान बिजली चली गई थी। गर्मी की वजह से उनका मासूम बेटा रोने लगा। वह उसे कमरे से बाहर ले आए और दालान में मम्मी-पापा के पास सुला कर पानी पीने के लिए मुख्य दरवाजे के पास बने नल की ओर चला गया। जैसे ही वह नल के पास पहुंचा तो मकान की छत भरभरा कर गिर गई। मलबे के नीचे मासूम आमिर, महक, जमीर अहमद, चमन, सुहैल, फहीम , भूरे उर्फ सगीर अहमद, कैफ दब गए। जहीर आलम ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को मदद के लिए बुलाया। इसके बाद आसपास के लोगों ने मलबा हटाया तो सभी लोग बेसुध हालत में थे। मलबा हटाने के बाद हादसे की सूचना पुलिस को दी गई। जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर एंबुलेंस के जरिए मलबे के नीचे दबे सभी लोगों को अस्पताल पहुंचाया। जहां पर डॉक्टरों ने आमिर (10 माह) और महक (10 वर्ष) को मृत घोषित कर दिया। परिवार वालों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। शव को उनके सुपुर्द कर दिया गया है। जमीर अहमद, चमन, सुहैल, भूरे और कैफ को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कर लिया है। हादसे से परिवार में कोहराम मच गया। सूचना पर एडीएम फाइनेंस प्रीति जायसवाल पहुंची। उन्होंने पीड़ित परिवार से हादसे की जानकारी ली और सरकारी मदद दिलाने का आश्वासन दिया है।
ये लोग थे मकान में
यह भरा पूरा परिवार है। तीनों भाइयों में सबसे बड़े जमीर अहमद के परिवार में पत्नी चमन, पांच बेटे जहीर आलम, अजीम, समीर, सुहैल, फहीम तीन बेटियां जेबा, सना और जुबैदा हैं। इसके अलावा जमीर के बेटे जहीर आलम की पत्नी नाजिया और दस माह का बेटा आमिर है। भूरे उर्फ सगीर अहमद के परिवार में बेटी महक (10) और बेटा मोहम्मद कैफ है। वसीम के परिवार में पत्नी बहारो और बेटा हैदर अली है। जिस समय हादसा हुआ सभी मकान में ही थे पर जिस दालान की छत गिरी वहां आठ लोग सोए थे। सभी मलबे में दब गए थे।
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जिस मकान में हादसा हुआ है, उसमें तीन भाई जमीर अहमद, भूरे उर्फ सगीर अहमद और वसीम का परिवार रहता है। मकान में दो कमरे बने हैं। मकान करीब 15 साल पुराना है। आर्थिक तंगी की वजह से उसे पक्का नहीं बनवाया जा सका। दालान की छत लकड़ी की थी, जिस पर मिट्टी डाल दी गई थी। जहीर आलम ने बताया कि रात करीब साढे़ तीन बजे तेज बारिश हो रही थी, इस दौरान बिजली चली गई थी। गर्मी की वजह से उनका मासूम बेटा रोने लगा। वह उसे कमरे से बाहर ले आए और दालान में मम्मी-पापा के पास सुला कर पानी पीने के लिए मुख्य दरवाजे के पास बने नल की ओर चला गया। जैसे ही वह नल के पास पहुंचा तो मकान की छत भरभरा कर गिर गई। मलबे के नीचे मासूम आमिर, महक, जमीर अहमद, चमन, सुहैल, फहीम , भूरे उर्फ सगीर अहमद, कैफ दब गए। जहीर आलम ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को मदद के लिए बुलाया। इसके बाद आसपास के लोगों ने मलबा हटाया तो सभी लोग बेसुध हालत में थे। मलबा हटाने के बाद हादसे की सूचना पुलिस को दी गई। जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर एंबुलेंस के जरिए मलबे के नीचे दबे सभी लोगों को अस्पताल पहुंचाया। जहां पर डॉक्टरों ने आमिर (10 माह) और महक (10 वर्ष) को मृत घोषित कर दिया। परिवार वालों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। शव को उनके सुपुर्द कर दिया गया है। जमीर अहमद, चमन, सुहैल, भूरे और कैफ को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कर लिया है। हादसे से परिवार में कोहराम मच गया। सूचना पर एडीएम फाइनेंस प्रीति जायसवाल पहुंची। उन्होंने पीड़ित परिवार से हादसे की जानकारी ली और सरकारी मदद दिलाने का आश्वासन दिया है।
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ये लोग थे मकान में
यह भरा पूरा परिवार है। तीनों भाइयों में सबसे बड़े जमीर अहमद के परिवार में पत्नी चमन, पांच बेटे जहीर आलम, अजीम, समीर, सुहैल, फहीम तीन बेटियां जेबा, सना और जुबैदा हैं। इसके अलावा जमीर के बेटे जहीर आलम की पत्नी नाजिया और दस माह का बेटा आमिर है। भूरे उर्फ सगीर अहमद के परिवार में बेटी महक (10) और बेटा मोहम्मद कैफ है। वसीम के परिवार में पत्नी बहारो और बेटा हैदर अली है। जिस समय हादसा हुआ सभी मकान में ही थे पर जिस दालान की छत गिरी वहां आठ लोग सोए थे। सभी मलबे में दब गए थे।
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