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जलस्तर बढ़ने से रामगंगा खादर के खेतों में घुसा पानी, किसानों की पलेज की फसलें बही
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मुरादाबाद। दो दिन लगातार हुई बारिश से रामगंगा का जलस्तर सामान्य से 1.225 मीटर बढ़ गया। नदी का पानी खादर किनारे खेतों में घुस गया और फसलें जलमग्न हो गई। कुछ किसानों की सब्जी की फसल पानी में बह गई है। किसान खेतों में फसल बचाने में जुटे रहे।
रामगंगा नदी के किनारे आसपास रहने वाले सैकडों किसानों ने बेल वाली सब्जियां बो रखी हैं। इनमें टमाटर, करेला, भिंडी, तोरी, लोकी, खीरा, परवल ,काशीफल की फसल लगा रखी है। नदी का किनारा होने की वजह से नमी होती है और पानी की अधिक जरूरत नहीं होती। किसानों ने बताया कि शनिवार को अचानक रामगंगा में पानी बढ गया और तेज प्रवाह के साथ ये पानी खादर में उनके खेतों में घुस गया। धार तेज होने की वजह से किसानों की फसल बेल से टूट गई। कई फसल बहने लगी।
आसपास के लोग और बच्चे भी टूटी फसलें उठाकर ले गए। इसका पता चलने पर किसान खेतों की तरफ दौड़े और फसलों को बचाने में जुट गए। कासिफ, हामिद, खामिनी, इशमत समेत कई किसानों ने बताया कि आसपास के गांवों के किसानों की पालेज गी है। पानी भरने से बेल टूट गई और तैयार फल भी पानी में बह गया। किसानों ने खेतों में पहुंचकर टूटी फसल को बोरों में भरकर बचाया। किसानों का कहना है कि सैकडों किसानों को नुकसान हुआ है। सरकार को इसका मुआवजा देना चाहिए।
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नाव में भरकर लाए तैयार सब्जी
खेतों में पानी भरने के बाद किसानों की फसल डूब गई। कुछ किसानों की लौकी, तरोई ,टमाटर, भिंडी आदि कई सब्जियां बहने लगी तो किसानों ने नाव का सहारा लिया। किसान नाव में अपने फसल भरकर लाए । इकराम व शाकिब आदि ने बताया कि अधिकतर फसल बह गई है जो बची है नाव में लाए हैं इसे भी औने पौने दाम पर ही बेचना पड़ेगा। नाव चालक यादराम सैनी ने बताया कि काफी किसान अपनी खेत की फसल उसकी नाव में भरकर लाए हैं। उन्हें काफी नुकसान हुआ है।
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रामगंगा नदी के किनारे आसपास रहने वाले सैकडों किसानों ने बेल वाली सब्जियां बो रखी हैं। इनमें टमाटर, करेला, भिंडी, तोरी, लोकी, खीरा, परवल ,काशीफल की फसल लगा रखी है। नदी का किनारा होने की वजह से नमी होती है और पानी की अधिक जरूरत नहीं होती। किसानों ने बताया कि शनिवार को अचानक रामगंगा में पानी बढ गया और तेज प्रवाह के साथ ये पानी खादर में उनके खेतों में घुस गया। धार तेज होने की वजह से किसानों की फसल बेल से टूट गई। कई फसल बहने लगी।
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आसपास के लोग और बच्चे भी टूटी फसलें उठाकर ले गए। इसका पता चलने पर किसान खेतों की तरफ दौड़े और फसलों को बचाने में जुट गए। कासिफ, हामिद, खामिनी, इशमत समेत कई किसानों ने बताया कि आसपास के गांवों के किसानों की पालेज गी है। पानी भरने से बेल टूट गई और तैयार फल भी पानी में बह गया। किसानों ने खेतों में पहुंचकर टूटी फसल को बोरों में भरकर बचाया। किसानों का कहना है कि सैकडों किसानों को नुकसान हुआ है। सरकार को इसका मुआवजा देना चाहिए।
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नाव में भरकर लाए तैयार सब्जी
खेतों में पानी भरने के बाद किसानों की फसल डूब गई। कुछ किसानों की लौकी, तरोई ,टमाटर, भिंडी आदि कई सब्जियां बहने लगी तो किसानों ने नाव का सहारा लिया। किसान नाव में अपने फसल भरकर लाए । इकराम व शाकिब आदि ने बताया कि अधिकतर फसल बह गई है जो बची है नाव में लाए हैं इसे भी औने पौने दाम पर ही बेचना पड़ेगा। नाव चालक यादराम सैनी ने बताया कि काफी किसान अपनी खेत की फसल उसकी नाव में भरकर लाए हैं। उन्हें काफी नुकसान हुआ है।