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Moradabad News: दो बैराजों से पानी छोड़ने से रामगंगा नदी उफान पर

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 19 Aug 2026 02:33 AM IST
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Ramganga River in spate following water release from two barrages.
नदी के किनारे रहने वाले लोगों को किया गया अलर्ट
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अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। उत्तराखंड के काशीपुर स्थित फीका बैराज और बिजनौर के खो बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण रामगंगा नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। जिला प्रशासन ने पानी के बहाव को देखते हुए नदी के किनारे रहने वाले लोगों को अलर्ट कर दिया है। अभी रामगंगा नदी खतरे के निशान से नीचे बह रही है। वहीं अन्य नदियों का पानी भी स्थिर है।
काशीपुर स्थित फीका बैराज से 9484 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी ढेला नदी से होते हुए रामगंगा नदी में मिलेगा। इसी प्रकार बिजनौर जिले से शेरगढ़ कोट स्थित खो बैराज से 50 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी रामगंगा नदी में बुधवार तक आएगा। अभी तक रामगंगा नदी का जलस्तर 188.230 मीटर है। रामगंगा नदी के कटघर रेलवे पुल पर खतरे का निशान 190.60 मीटर है। बाढ़ खंड विभाग के अधिशासी अभियंता राजेश गंगवार का कहना है कि खो बैराज का पानी बुधवार तक रामगंगा नदी में आएगा लेकिन खतरे के निशान से नीचे रहेगा।
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जिले में 24 घंटे के दौरान 300.62 मिमी हुई बरसात
स्थान का नाम पानी मिमी में
मुरादाबाद शहर 377.5 मिमी
कांठ 30.5 मिमी
बिलारी 328.5 मिमी
ठाकुरद्वारा 466 मिमी
कुल वर्षा 1202.5 मिमी
औसत वर्षा 300.62 मिमी


जिले में 35 बाढ़ चौकियां सक्रिय, 199 गांवों पर नजर
जिला आपदा विशेषज्ञ प्रदीप कुमार के अनुसार कटघर रेलवे पुल पर रामगंगा का जलस्तर 188.23 मीटर दर्ज किया गया है, जो खतरे के निशान से 190 सेंटीमीटर नीचे है। उत्तराखंड के काशीपुर स्थित जलाशय से ठाकुरद्वारा क्षेत्र की सहायक ढेला नदी में 9,484 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। प्रशासन ने कृषि की दृष्टिकोण से 199 गांव और आबादी के लिहाज से मूंढापांडे के रनिया ठेर एवं हरपाल नगर सहित 12 से 15 संवेदनशील गांव चिन्हित किए हैं। शहरी क्षेत्र में भोलानाथ कॉलोनी, गागन नदी से प्रभावित वार्ड और नागफनी के निचले इलाकों पर नजर है। जिले में 35 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं और चारों तहसीलों में चार-चार अनिवार्य राहत चौपालों का आयोजन कर ग्रामीणों को 1078 टोल-फ्री नंबर एवं सचेत एप की जानकारी दी जा रही है। किसी भी आपात स्थिति के लिए पीएसी की सर्च एंड रेस्क्यू फ्लड यूनिट और आरटीओ के जरिए वाहन व ईंधन की व्यवस्था मुकम्मल कर ली गई है।
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