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जिगर कॉलोनी के बाद नदी में गहराई कम, नहीं हो सका सर्वे
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मुरादाबाद। सीवरेज, मिलों के अपशिष्ट और अवैध निर्माणों से रामगंगा नदी की दुर्दशा का सर्वे स्टीमर के सहारे होना था। जलशक्ति अभियान में नगर निगम की सहयोगी डब्लूडब्लूएफ ने प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी तैयार की। डीएम राकेश कुमार से साझा की गई। लेकिन रामगंगा नदी में जिगर कॉलोनी के बाद गहराई कम होने से सर्वे ही ठंडे बस्ते में चला गया। हालांकि िजब रामगंगा में भरपूर पानी था तब इसका सर्वे करने की जहमत नहीं उठाई गई।
रामगंगा नदी में बारिश का पानी अधिक होता है। मुरादाबाद में औसत से 27 फीसदी कम बारिश हुई थी। 523.8 मिली बारिश का अनुमान था। 380.7 मिमी बारिश ही हुई। इसकी वजह से जितना जलस्तर अनुमानित था, उससे कम पर नदी में बहाव है। जलशक्ति अभियान में डब्लूडब्लूएफ संस्था को सीवरेज, मिलों के अपशिष्ट और नदी किनारे होने वाले अवैध कब्जों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करानी थी। इसके लिए मुफीद स्टीमर पर ही टीम को रामगंगा नदी में सर्वे कराना था। चट्टा पुल से जिगर कॉलोनी के बीच नदी में गहराई ठीक मिली। लेकिन इसके बाद गहराई कम होने के बाद स्टीमर चलना ही मुश्किल हो गया। यही वजह रही कि सर्वे ही खटाई में पड़ गया। अब पहाड़ों में बारिश अधिक होने का इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि उसके बाद ही रामगंगा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होगी। हालांकि अभी चंद रोज पहले ही बारिश के कारण रामगंगा में काफी पानी बह रहा था तब भी सर्वे किया जा सकता था पर ऐसा नहीं किया जा सका।
तीन साल पहले हुआ था सर्वे
डब्लूडब्लूएफ के मो. आलम के मुताबिक तीन साल पहले रामगंगा नदी में सर्वे किया गया था। इसकी रिपोर्ट प्रशासकीय अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दी गई थी। इन्हीं रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम कार्रवाईयां हुई थीं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रामगंगा नदी में गिरने वाले अपशिष्ट पर पहले ही चिंता जता चुका है।
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रामगंगा नदी में बारिश का पानी अधिक होता है। मुरादाबाद में औसत से 27 फीसदी कम बारिश हुई थी। 523.8 मिली बारिश का अनुमान था। 380.7 मिमी बारिश ही हुई। इसकी वजह से जितना जलस्तर अनुमानित था, उससे कम पर नदी में बहाव है। जलशक्ति अभियान में डब्लूडब्लूएफ संस्था को सीवरेज, मिलों के अपशिष्ट और नदी किनारे होने वाले अवैध कब्जों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करानी थी। इसके लिए मुफीद स्टीमर पर ही टीम को रामगंगा नदी में सर्वे कराना था। चट्टा पुल से जिगर कॉलोनी के बीच नदी में गहराई ठीक मिली। लेकिन इसके बाद गहराई कम होने के बाद स्टीमर चलना ही मुश्किल हो गया। यही वजह रही कि सर्वे ही खटाई में पड़ गया। अब पहाड़ों में बारिश अधिक होने का इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि उसके बाद ही रामगंगा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होगी। हालांकि अभी चंद रोज पहले ही बारिश के कारण रामगंगा में काफी पानी बह रहा था तब भी सर्वे किया जा सकता था पर ऐसा नहीं किया जा सका।
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तीन साल पहले हुआ था सर्वे
डब्लूडब्लूएफ के मो. आलम के मुताबिक तीन साल पहले रामगंगा नदी में सर्वे किया गया था। इसकी रिपोर्ट प्रशासकीय अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दी गई थी। इन्हीं रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम कार्रवाईयां हुई थीं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रामगंगा नदी में गिरने वाले अपशिष्ट पर पहले ही चिंता जता चुका है।
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