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Raksha Bandhan: शहीद भाई की प्रतिमा को 23 साल से राखी बांध रहीं बहनें, अरविंद की बहन बोलीं- हमें शहादत पर गर्व
Sun, 18 Aug 2024 02:14 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 18 Aug 2024 02:14 PM IST
सार
कारगिल युद्ध के शहीद अरविंद सिंह की प्रतिमा को 23 साल से उनकी बहनें राखी बांध रहीं हैं। बहनों का कहना है कि हमें भाई की शहादत पर गर्व है। देश की रक्षा में उन्होंने जान दी। तीनों बहनें हर साल रक्षाबंधन पर भाई की प्रतिमा को राखी बांधती हैं। इसके बाद छोटे भाई धर्मेंद्र सिंह को राखी बांधने जाती हैं।
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शहीद भाई की प्रतिमा को राखी बांधती बहन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
देश की रक्षा के लिए कारगिल युद्ध में अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले शहीद अरविंद सिंह की बहनें सर्वेश, सुदेश और शशि 23 साल से रक्षाबंधन पर भाई की प्रतिमा को राखी बांध रही हैं। त्योहार नजदीक आते ही भले ही भाई की याद में बहनों की आंखें नम हैं, लेकिन उन्हें गर्व है कि उनके भाई ने देश की रक्षा में अपना बलिदान दिया।
कांठ क्षेत्र के गांव मिलक आवी हफीजपुर निवासी अरविंद सिंह 1997 में सेना में भर्ती हुए थे। 1999 में पाकिस्तान से जब कारगिल में युद्ध हुआ, तब अरविंद सिंह की रेजिमेंट को कारगिल युद्ध के मोर्चे पर तैनात किया गया था। पाकिस्तान की ओर से हुई गोलीबारी में 29 जून 1999 को अरविंद सिंह शहीद हो गए थे।
पिता मुख्तार सिंह और भाई धर्मेंद्र सिंह ने एक साल बाद ही 2000 में गांव में शहीद अरविंद सिंह की प्रतिमा बनवाई थी। इसके बाद से ही अरविंद सिंह की तीनों बहन सर्वेश, सुदेश और शशि हर साल रक्षाबंधन पर गांव आती हैं और शहीद भाई की प्रतिमा की कलाई पर रखी बांधती हैं और तिलक लगाती हैं।
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अमरोहा के गजरौला की टीचर कॉलोनी निवासी शहीद अरविंद की सबसे छोटी बहन सर्वेश ने बताया कि उन्हें गर्व है कि उनके भाई ने देश की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया। सर्वेश ने बताया कि उनकी बड़ी बहन सुदेश अमरोहा में हसनपुर क्षेत्र में देहरी जट गांव में रहती हैं, जबकि दूसरे नंबर की बहन शशि की शादी पाकबड़ा के फलैदा गांव में हुई है।
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कांठ क्षेत्र के गांव मिलक आवी हफीजपुर निवासी अरविंद सिंह 1997 में सेना में भर्ती हुए थे। 1999 में पाकिस्तान से जब कारगिल में युद्ध हुआ, तब अरविंद सिंह की रेजिमेंट को कारगिल युद्ध के मोर्चे पर तैनात किया गया था। पाकिस्तान की ओर से हुई गोलीबारी में 29 जून 1999 को अरविंद सिंह शहीद हो गए थे।
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पिता मुख्तार सिंह और भाई धर्मेंद्र सिंह ने एक साल बाद ही 2000 में गांव में शहीद अरविंद सिंह की प्रतिमा बनवाई थी। इसके बाद से ही अरविंद सिंह की तीनों बहन सर्वेश, सुदेश और शशि हर साल रक्षाबंधन पर गांव आती हैं और शहीद भाई की प्रतिमा की कलाई पर रखी बांधती हैं और तिलक लगाती हैं।
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अमरोहा के गजरौला की टीचर कॉलोनी निवासी शहीद अरविंद की सबसे छोटी बहन सर्वेश ने बताया कि उन्हें गर्व है कि उनके भाई ने देश की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया। सर्वेश ने बताया कि उनकी बड़ी बहन सुदेश अमरोहा में हसनपुर क्षेत्र में देहरी जट गांव में रहती हैं, जबकि दूसरे नंबर की बहन शशि की शादी पाकबड़ा के फलैदा गांव में हुई है।
तीनों बहनें हर साल रक्षाबंधन पर भाई की प्रतिमा को राखी बांधती हैं। इसके बाद छोटे भाई धर्मेंद्र सिंह को राखी बांधने जाती हैं। सोमवार सुबह तीनों बहन गांव पहुंचकर शहीद भाई की प्रतिमा को राखी बांधेंगी।
भाई ने कहा था, जीतकर लौटेंगे
सर्वेश ने बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान भाई अरविंद सिंह से एक बार बात हुई थी, तब उन्होंने कहा था कि यहां गंभीर हैं। हम सब अपनी हिम्मत के बल पर युद्ध जीतकर लौटेंगे। उन्होंने पूरे परिवार से कहा था कि किसी को घबराने या डरने की जरूरत नहीं है। फौजी की तरह फौजी का परिवार भी हिम्मत वाला होता है।
सर्वेश ने बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान भाई अरविंद सिंह से एक बार बात हुई थी, तब उन्होंने कहा था कि यहां गंभीर हैं। हम सब अपनी हिम्मत के बल पर युद्ध जीतकर लौटेंगे। उन्होंने पूरे परिवार से कहा था कि किसी को घबराने या डरने की जरूरत नहीं है। फौजी की तरह फौजी का परिवार भी हिम्मत वाला होता है।
छुट्टी रद्द कर गए थे युद्ध में
सर्वेश ने बताया कि भाई छुट्टी लेकर घर आए थे। दो दिन बाद ही उनके पास फोन आया है कि उनकी छुट्टी रद्द कर दी गई है। पाकिस्तान से युद्ध छिड़ गया है। इसके बाद भाई वापस चले गए थे। 29 जून 1999 को सूचना मिली कि भाई शहीद हो गए। भाई आज भी हमारी यादों में जिंदा हैं।
सर्वेश ने बताया कि भाई छुट्टी लेकर घर आए थे। दो दिन बाद ही उनके पास फोन आया है कि उनकी छुट्टी रद्द कर दी गई है। पाकिस्तान से युद्ध छिड़ गया है। इसके बाद भाई वापस चले गए थे। 29 जून 1999 को सूचना मिली कि भाई शहीद हो गए। भाई आज भी हमारी यादों में जिंदा हैं।