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अफसरों और स्टाफ के बयान सही मानें तो राज्यरानी पलटी ही नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Tue, 25 Apr 2017 02:50 AM IST
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रामपुर में राज्यरानी एक्सप्रेस के 9 डिब्बे पटरी से उतरे
- फोटो : self
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15 अप्रैल की सुबह रामपुर में राज्यरानी एक्सप्रेस पलटी थी। ये सबने देखा। घटना में तमाम यात्री घायल भी हुए। पूरे मंडल से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक हलचल मची रही। रेलवे की हाई लेवल कमेटी के साथ ही जीआरपी, आरपीएफ और एटीएस ने भीजांच शुरू की।
लेकिन जांचों के जो नतीजे सामने आ रहे हैं, उनसे ऐसा लगता है कि राज्यरानी पलटी ही नहीं थी। रेलवे अपनी लापरवाही मानने को तैयार नहीं है और एटीएस व जीआरपी ने हादसे के पीछे आतंकी साजिश को नकार दिया है। इंजीनियरिंग सेक्शन ने ट्रैक फ्रैक्चर की बात खारिज कर दी है।
यानि राज्यरानी के पलटने में किसी की लापरवाही नहीं थी, बलि्क सबकुछ दुरुस्त होने के बावजूद ये ट्रेन बेवजह खुद ब खुद पलट गई। रामपुर रेल हादसे के करीब घंटेभर पहले ट्रैक सही था। पेट्रोलिंग के दौरान कीमैन को पटरी सही मिली थी। कीमैन सात बजे के करीब घटना स्थल वाले ट्रैक के पास से गुुजरा था।
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ये बातें जांच अधिकारी को दिए ट्रैक मैन और कीमैन के दिए बयान से निकलकर सामने आई है। रेल अफसरों के बाद सोमवार को कर्मचारियों के बयान हुए। छह ट्रैक मैन और कीमैन ने अपने बयान दर्ज कराए। जल्द ही बयान के लिए दूसरे अधिकारी बुलाए जाएंगे।
पंद्रह अप्रैल की सुबह रामपुर स्टेशन से दो किमी पहले राज्यरानी एक्सप्रेस के डिरेल मामले में जीआरपी ने मुकदमा दर्ज अब तक पंद्रह रेल अधिकारियों के बयान दर्ज कर चुकी है। अब अफसरों के बाद जीआरपी ने कर्मचारियों को नोटिस भेजा था। सोमवार को छह ट्रैक मैन और कीमैन बयान देने एसपी रेल कार्यालय पहुुंचे।
एसपी रेल की गैरमौजूदगी मेें जांच अधिकारी सीओ जीआरपी गाजियाबाद रनवीर सिंह ने एक-एक सभी के बयान लिए। बयान में एक कीमैन ने बताया कि राज्यरानी एक्सप्रेस के पटरी से उतरने से करीब एक घंटे पहले सात बजे करीब उसने ट्रैक की पेट्रोलिंग की थी। इस दौरान ट्रैक सही था। कहीं कोई फ्रैक्चर नहीं था।
बाद में उसे हादसे की जानकारी हुुई। वहीं कुछ ने हादसे वाले दिन अवकाश पर रहना बताया तो किसी ने उस वक्त ड्यूटी पर न होना बताया। जांच अधिकारी सीओ जीआरपी गाजियाबाद रनवीर सिंह ने बताया कि रेल हादसे में पंद्रह अधिकारियों के बाद छह ट्रैक मैन और कीमैन के बयान दर्ज किए गए हैं। दूसरी सूची बनाई जा रही है। जल्द ही बाकी बचे अधिकारियों औ
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लेकिन जांचों के जो नतीजे सामने आ रहे हैं, उनसे ऐसा लगता है कि राज्यरानी पलटी ही नहीं थी। रेलवे अपनी लापरवाही मानने को तैयार नहीं है और एटीएस व जीआरपी ने हादसे के पीछे आतंकी साजिश को नकार दिया है। इंजीनियरिंग सेक्शन ने ट्रैक फ्रैक्चर की बात खारिज कर दी है।
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यानि राज्यरानी के पलटने में किसी की लापरवाही नहीं थी, बलि्क सबकुछ दुरुस्त होने के बावजूद ये ट्रेन बेवजह खुद ब खुद पलट गई। रामपुर रेल हादसे के करीब घंटेभर पहले ट्रैक सही था। पेट्रोलिंग के दौरान कीमैन को पटरी सही मिली थी। कीमैन सात बजे के करीब घटना स्थल वाले ट्रैक के पास से गुुजरा था।
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ये बातें जांच अधिकारी को दिए ट्रैक मैन और कीमैन के दिए बयान से निकलकर सामने आई है। रेल अफसरों के बाद सोमवार को कर्मचारियों के बयान हुए। छह ट्रैक मैन और कीमैन ने अपने बयान दर्ज कराए। जल्द ही बयान के लिए दूसरे अधिकारी बुलाए जाएंगे।
पंद्रह अप्रैल की सुबह रामपुर स्टेशन से दो किमी पहले राज्यरानी एक्सप्रेस के डिरेल मामले में जीआरपी ने मुकदमा दर्ज अब तक पंद्रह रेल अधिकारियों के बयान दर्ज कर चुकी है। अब अफसरों के बाद जीआरपी ने कर्मचारियों को नोटिस भेजा था। सोमवार को छह ट्रैक मैन और कीमैन बयान देने एसपी रेल कार्यालय पहुुंचे।
एसपी रेल की गैरमौजूदगी मेें जांच अधिकारी सीओ जीआरपी गाजियाबाद रनवीर सिंह ने एक-एक सभी के बयान लिए। बयान में एक कीमैन ने बताया कि राज्यरानी एक्सप्रेस के पटरी से उतरने से करीब एक घंटे पहले सात बजे करीब उसने ट्रैक की पेट्रोलिंग की थी। इस दौरान ट्रैक सही था। कहीं कोई फ्रैक्चर नहीं था।
बाद में उसे हादसे की जानकारी हुुई। वहीं कुछ ने हादसे वाले दिन अवकाश पर रहना बताया तो किसी ने उस वक्त ड्यूटी पर न होना बताया। जांच अधिकारी सीओ जीआरपी गाजियाबाद रनवीर सिंह ने बताया कि रेल हादसे में पंद्रह अधिकारियों के बाद छह ट्रैक मैन और कीमैन के बयान दर्ज किए गए हैं। दूसरी सूची बनाई जा रही है। जल्द ही बाकी बचे अधिकारियों औ