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Moradabad News: बथुआ खेड़ा में किसानों और ग्रामीणों का धरना-प्रदर्शन जारी
Sun, 05 May 2024 02:36 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Sun, 05 May 2024 02:36 AM IST
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ठाकुरद्वारा। शनिवार को बथुआ खेड़ा में सेंचुरी से अपनी मांगों को लेकर किसानों और ग्रामीणों का धरना प्रदर्शन जारी रहा। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को सेंचुरी ने गांव में धरना स्थल के पास अपना निर्माण कार्य शुरू किया तो गांव के ग्रामीण और किसान भड़क गए।
उन्होंने काम कर रही महिला मजदूरों को वहां से भगा दिया। जिसकी मिल प्रबंधन की सूचना पर पहुंची पुलिस, एसडीम और सीओ से ग्रामीणों किसानों नोक झोंक हुई। इस दौरान भीड़ में हंगामे के दौरान गांव की महिला संतोष बेहोश होकर गिर गई। जिसे नगर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। महिला की हालत में सुधार हो जाने पर शनिवार को सुबह उसे घर भेज दिया गया। शनिवार को बथुआ खेड़ा और धरना स्थल के आसपास शांति दिखाई दी। वहां न पुलिस थी और न सेंचुरी के कर्मचारी। लेकिन ग्रामीणों का धरना प्रदर्शन जारी रहा।उनका धरना प्रदर्शन 10 जनवरी से चल रहा है। किसानों का कहना है कि उनसे 35 वर्ष पूर्व जमीन का सरकार ने नेपा पेपर मिल के लिए अधिग्रहण किया था। अधिग्रहण करते समय उन्हें उनके परिवार के सदस्य को मिल में नौकरी देने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन सरकार ने यहां पर मिल लगाने की बजाय भूमि को 1995 में बिरला ग्रुप (सेंचुरी) को बेच दिया। उसने भी 29 साल बाद यहां पर कोई भी मिल या फैक्ट्री नहीं लगाया है। जबकि किसानों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है ।बथुआ खेड़ा में अलीगंज के नाम से लगने वाले मिल के लिए करीब 800 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था ।जिसमें से 500 एकड़ भूमि का अधिग्रहण बथुआ खेड़ा के किसानों का हुआ है। इसलिए सबसे ज्यादा प्रभावित बथुआ खेड़ा के ग्रामीण और किसान है। इसके अलावा मानपुर दतराम अलीगंज ,बुरहानपुर आदि के किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया गया था। किसानों की मांग है कि उनकी अधिग्रहण की गई भूमि का 35 वर्ष का मुआवजा प्रत्येक किसान को 60 लाख रुपए दिया जाए, हाई कोर्ट में चल रहे मुकदमे का निस्तारण किया जाए, 3 महीने के अंदर भूमि पर फैक्ट्री लगाकर जमीन देने वाले किसानों के परिवार को नौकरी दी जाए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो किसान अपनी दी गई भूमि पर कब्जा कर और उसकी जुताई कर वहां फसल बोकर अपने परिवार का पालन पोषण करेंगे। शनिवार को धरना प्रदर्शन करने वाले किसानों में साबिर हुसैन, बलवीर सिंह यादव, ऋषिपाल सिंह यादव, साकिर हुसैन मोहित कुमार ,जुम्मा शाह, मुख्तार,अकरम हुसैन, इसाक आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने काम कर रही महिला मजदूरों को वहां से भगा दिया। जिसकी मिल प्रबंधन की सूचना पर पहुंची पुलिस, एसडीम और सीओ से ग्रामीणों किसानों नोक झोंक हुई। इस दौरान भीड़ में हंगामे के दौरान गांव की महिला संतोष बेहोश होकर गिर गई। जिसे नगर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। महिला की हालत में सुधार हो जाने पर शनिवार को सुबह उसे घर भेज दिया गया। शनिवार को बथुआ खेड़ा और धरना स्थल के आसपास शांति दिखाई दी। वहां न पुलिस थी और न सेंचुरी के कर्मचारी। लेकिन ग्रामीणों का धरना प्रदर्शन जारी रहा।उनका धरना प्रदर्शन 10 जनवरी से चल रहा है। किसानों का कहना है कि उनसे 35 वर्ष पूर्व जमीन का सरकार ने नेपा पेपर मिल के लिए अधिग्रहण किया था। अधिग्रहण करते समय उन्हें उनके परिवार के सदस्य को मिल में नौकरी देने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन सरकार ने यहां पर मिल लगाने की बजाय भूमि को 1995 में बिरला ग्रुप (सेंचुरी) को बेच दिया। उसने भी 29 साल बाद यहां पर कोई भी मिल या फैक्ट्री नहीं लगाया है। जबकि किसानों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है ।बथुआ खेड़ा में अलीगंज के नाम से लगने वाले मिल के लिए करीब 800 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था ।जिसमें से 500 एकड़ भूमि का अधिग्रहण बथुआ खेड़ा के किसानों का हुआ है। इसलिए सबसे ज्यादा प्रभावित बथुआ खेड़ा के ग्रामीण और किसान है। इसके अलावा मानपुर दतराम अलीगंज ,बुरहानपुर आदि के किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया गया था। किसानों की मांग है कि उनकी अधिग्रहण की गई भूमि का 35 वर्ष का मुआवजा प्रत्येक किसान को 60 लाख रुपए दिया जाए, हाई कोर्ट में चल रहे मुकदमे का निस्तारण किया जाए, 3 महीने के अंदर भूमि पर फैक्ट्री लगाकर जमीन देने वाले किसानों के परिवार को नौकरी दी जाए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो किसान अपनी दी गई भूमि पर कब्जा कर और उसकी जुताई कर वहां फसल बोकर अपने परिवार का पालन पोषण करेंगे। शनिवार को धरना प्रदर्शन करने वाले किसानों में साबिर हुसैन, बलवीर सिंह यादव, ऋषिपाल सिंह यादव, साकिर हुसैन मोहित कुमार ,जुम्मा शाह, मुख्तार,अकरम हुसैन, इसाक आदि मौजूद रहे।
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