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लॉकडाउन में हनुमान बनकर आ रहे, डाकिया डाक नहीं, 'संजीवनी' ला रहे

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 14 May 2020 01:18 AM IST
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postmans dilivered medicine in lockdown
मुरादाबाद। लंबे समय से अपनी उपयोगिता खो चुका डाक विभाग लॉकडाउन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। किसी जमाने में चिट्ठी के लिए डाकिया का बेसब्री से इंतजार होता था। डिजिटल युग में खतों की दुनिया पीछे छूट गई और डाकिया का इंतजार भी खत्म हो गया। लिहाजा डाक विभाग भी हाशिए पर पहुंच गया। लेकिन कोरोना संक्रमण के इस दौर में डाक विभाग ने फिर अपना लोहा मनवाया है। लॉकडाउन लागू होने के बाद से डाकिया मरीजों के लिए संजीवनी लेकर पहुंच रहे हैं। जिले में 220 लोगों को डाक विभाग ने उनके घराें पर दवाएं पहुंचाकर फिर से अपनी उपयोगिता साबित की है।
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डाक विभाग द्वारा 25 मार्च से दवाईयों की आपूर्ति की जा रही है। प्रवर डाक अधीक्षक का कहना है कि दवाईयां पहुंचाने के मामले में हम देरी नहीं करते हैं। यह जिंदगी का सवाल है। अब तक सिर्फ मुरादाबाद में ही 220 लोगों को दवाईयां दे चुके हैं। ज्यादातर पैकेट दिल्ली और लखनऊ से आए हैं। लॉकडाउन में डाक कर्मचारी कोरोना योद्धा बनकर काम कर रहे हैं। शहरों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी दवाईयां पहुंचा रहे हैं। मुरादाबाद के अलावा दो मरीजों के लिए रामपुर और एक मरीज के लिए संभल में भी दवाईयां पहुंचाई हैं। 21 अप्रैल को मुरादाबाद के तीन चिकित्सकों के यहां आधी रात को जीवन रक्षक दवाईयां पहुंचाई थीं और तीन मई रविवार को जनपद संभल के गांव पेली में एसएन त्यागी के यहां डाक कर्मचारी दवा देकर आए हैं।
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मेरी मम्मी की नियमित दवाईयां चल रही हैं। जिस कंपनी की दवा मम्मी लेती हैं, वह मुरादाबाद में नहीं मिलतीं। पहले मैं गाजियाबाद से लाता था। अब बड़े भैया ने देहरादून से डाक विभाग से दवाईयां भेजी हैं। - यश अरोरा, लाजपत नगर।
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दवा की कंपनी में काम करता हूं। मुरादाबाद में बहुत सी दवाईयों की कमी है। न्यूरो साइक्रेट्रिक सेग्मेंट की दवाईयां लंबी चलती हैं और मरीज कोई दूसरी कंपनी की दवा प्रयोग नहीं कर सकता। लॉकडाउन की वजह से यह दवाईयां नहीं मिल रही थीं। अब तक पांच-छह बार मंगवा चुके हैं। मुश्किल वक्त में यह दवाईयां मिलना संजीवनी की तरह हैं।- राजेश गुप्ता, सूर्य नगर लाइनपार।

पहले महीने में दवाईयों के एकाध पैकेट ही आते थे, लेकिन लॉकडाउन में लोग डाक से दवाईयां मंगवा रहे हैं। मुश्किल वक्त में हम मरीजों की मदद कर पा रहे हैं, यह अच्छी बात है। इसलिए हम छुट्टी में भी काम कर रहे हैं। - चंद्रपाल, प्रवर अधीक्षक, मुख्य डाकघर।
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